भारतीय पहलवान मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। जीत के बाद वह अपने पिता को याद कर भावुक हो गईं। मनीषा ने बताया कि कुश्ती ही उनकी जिंदगी है और अब उनका अगला लक्ष्य 2028 ओलंपिक है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के लिए इतिहास रचने वाली मनीषा भनवाला की आंखें उस वक्त नम हो गईं, जब उन्होंने अपनी कामयाबी के पीछे पिता के योगदान को याद किया। कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित चैंपियनशिप में मनीषा ने महिलाओं के 59 किलोग्राम वर्ग में अमेरिका की अबीगैल नेत्ते को 8-6 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। वह विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं।
पिता की सीख याद कर भावुक हुईं मनीषा
विश्व चैंपियन बनने के बाद मनीषा भनवाला ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और कोच को दिया। इस दौरान पिता का जिक्र आते ही वह भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि उनके पिता हमेशा एक बात सिखाते थे कि जीवन में जो काम शुरू किया है, उसे अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। मुश्किल कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए।
![]()
मनीषा के लिए पिता की यह सीख आज भी बहुत मायने रखती है। उन्होंने बताया कि वह हर दिन अपने पिता को याद करती हैं। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि पिता आज भी उनके साथ हैं और उनसे बातें करते हैं।
मनीषा के पिता का वर्ष 2022 में निधन हो गया था। इसके बाद उनके जीवन में मुश्किल दौर आया, लेकिन परिवार के सहयोग से उन्होंने कुश्ती जारी रखी। विश्व चैंपियनशिप में मिली इस सफलता को उन्होंने अपने पिता की याद से जोड़ा।
मनीषा ने अपने खेल को लेकर साफ कहा कि कुश्ती उनके लिए पहला और आखिरी विकल्प है। इसी खेल से उन्हें पहचान मिली और जिंदगी में आगे बढ़ने का रास्ता मिला। वह अपनी पूरी मेहनत इसी खेल में लगाना चाहती हैं।
फाइनल में छह अंक से पिछड़ने के बाद जीता गोल्ड
मनीषा के लिए विश्व चैंपियनशिप का फाइनल आसान नहीं था। अमेरिका की अबीगैल नेत्ते ने शुरुआत में उन पर दबाव बनाया और एक समय मुकाबले में 6-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसे में मनीषा के लिए वापसी करना चुनौती बन गया था।
लेकिन भारतीय पहलवान ने हार नहीं मानी। उन्होंने धीरे-धीरे अंक जुटाए और मुकाबले में वापसी की। आखिर में मनीषा ने 8-6 से जीत दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
30 अक्टूबर 2026 को मिली इस जीत के साथ मनीषा सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली भारत की पहली महिला बनीं। उनसे पहले पुरुष वर्ग में सुशील कुमार ने 2010 में विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता था।
एशियन गेम्स में हार के बाद खुद से किया था वादा
मनीषा ने बताया कि विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतना उनके लिए बहुत जरूरी था। एशियन गेम्स में वह मेडल हासिल नहीं कर पाई थीं। उस हार के बाद उन्होंने अपनी तैयारी पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया।
उन्हें विश्वास था कि अगर वह लगातार मेहनत करती रहीं तो विश्व चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। इसी भरोसे के साथ वह प्रतियोगिता में उतरी थीं।
मनीषा के मुताबिक, अलग-अलग भार वर्ग के पहलवानों के साथ अभ्यास करने से उन्हें काफी फायदा हुआ। वह चार अलग-अलग भार वर्गों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इससे उन्हें अलग-अलग तरह के प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलने का अनुभव मिला।
उनका मानना है कि अभ्यास के दौरान मिली सीख फाइनल में भी काम आई। शुरुआती बढ़त गंवाने के बावजूद उन्होंने मुकाबले पर ध्यान बनाए रखा और आखिरकार जीत हासिल की।
अब 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी
विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मनीषा की नजर अब 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर है। उन्होंने बताया कि स्वर्ण पदक जीतने के बाद उसी शाम कोच और टीम के साथ आगे की तैयारी पर बातचीत हुई थी।आने वाले समय में वह सीनियर नेशनल और प्रो रेसलिंग लीग जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की योजना बना रही हैं। इसके बाद भारतीय टीम का कैंप शुरू होने पर ओलंपिक की तैयारी को आगे बढ़ाया जाएगा।
मनीषा के अनुसार, कौन-सी प्रतियोगिता खेलनी है और किससे दूर रहना है, इसका फैसला कोच और टीम मिलकर करेंगे। फिलहाल उनका ध्यान अपनी तैयारी को बेहतर बनाने पर है।
ओलंपिक के लिहाज से उन्हें भार वर्ग पर भी ध्यान देना होगा, क्योंकि विश्व चैंपियनशिप का 59 किलोग्राम वर्ग ओलंपिक में शामिल नहीं है। उनकी नजर 57 किलोग्राम वर्ग में अपनी दावेदारी मजबूत करने पर है।
मनीषा की इस जीत के साथ भारतीय महिला कुश्ती टीम ने विश्व चैंपियनशिप में कुल चार पदक हासिल किए। इनमें एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक शामिल हैं।









