IND A vs NZ A: ध्रुव जुरैल ने शतक लगाकर इंडिया-ए को संकट से निकाला, ऋषभ पंत की बढ़ाई चुनौती

IND A vs NZ A के दूसरे अनऑफिशियल टेस्ट में ध्रुव जुरैल ने 105 रन बनाए। आकाशदीप ने 68 रन की पारी खेली। जानें ऋषभ पंत के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती।

न्यूजीलैंड-ए के खिलाफ दूसरे अनऑफिशियल टेस्ट में ध्रुव जुरैल ने 105 रनों की शानदार पारी खेली। आकाशदीप ने 68 और देवदत्त पडिक्कल ने 80 रन बनाए। इन पारियों की मदद से इंडिया-ए ने पहली पारी में 346 रन बनाए।

स्पोर्ट्स न्यूज़: इंडिया-ए के कप्तान ध्रुव जुरैल ने न्यूजीलैंड-ए के खिलाफ दूसरे अनऑफिशियल टेस्ट में शानदार शतक लगाकर टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला। शनिवार को 99 रन पर नाबाद लौटे जुरैल ने रविवार, 1 नवंबर को अपना शतक पूरा किया। उन्होंने 171 गेंदों में 105 रन बनाए। उनकी इस पारी से इंडिया-ए पहली पारी में 346 रन तक पहुंच गई। जुरैल के लगातार अच्छे प्रदर्शन से भारतीय टेस्ट टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज की जगह के लिए ऋषभ पंत के सामने प्रतिस्पर्धा और मजबूत होती दिखाई दे रही है।

मुश्किल समय में ध्रुव जुरैल ने संभाली इंडिया-ए की पारी

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में खेले जा रहे इस मुकाबले में इंडिया-ए की शुरुआत अच्छी नहीं रही। न्यूजीलैंड-ए ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम को पहला झटका शुरुआती ओवर में ही लग गया, जब यशस्वी जायसवाल बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद साई सुदर्शन और देवदत्त पडिक्कल ने पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 91 रन जोड़कर टीम को शुरुआती दबाव से बाहर निकाला।

IND A vs NZ A: ध्रुव जुरैल ने शतक लगाकर इंडिया-ए को संकट से निकाला, ऋषभ पंत की बढ़ाई चुनौती

साई सुदर्शन 41 रन बनाकर आउट हुए, जबकि पडिक्कल ने 80 रनों की पारी खेली। इसके बाद भारतीय टीम की बल्लेबाजी अचानक लड़खड़ा गई। एक समय टीम ने 160 रन पर छह विकेट गंवा दिए थे। ऐसे हालात में कप्तान ध्रुव जुरैल ने जिम्मेदारी उठाई और न्यूजीलैंड के गेंदबाजों का डटकर सामना किया।

जुरैल ने जल्दबाजी में बड़े शॉट खेलने के बजाय विकेट पर टिकने को प्राथमिकता दी। उन्होंने खराब गेंदों पर रन बनाए और दूसरे छोर पर मौजूद बल्लेबाजों के साथ साझेदारियां बनाईं। उनकी समझदारी भरी बल्लेबाजी ने इंडिया-ए को छोटे स्कोर पर सिमटने से बचाया।

99 रन पर नाबाद लौटे थे जुरैल, दूसरे दिन पूरा किया शतक

ध्रुव जुरैल ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक 155 गेंदों में 99 रन बना लिए थे। वह अपने शतक से सिर्फ एक रन दूर थे। रविवार को दूसरे दिन बल्लेबाजी करने उतरे जुरैल ने शतक पूरा किया। हालांकि, इसके बाद वह ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक पाए और 105 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।

जुरैल ने अपनी पारी के दौरान 171 गेंदों का सामना किया और 11 चौके तथा तीन छक्के लगाए। इस दौरान उन्होंने जरूरत पड़ने पर आक्रामक बल्लेबाजी भी की, लेकिन उनका ज्यादा ध्यान टीम को मुश्किल से बाहर निकालने पर रहा।

इस पारी में जुरैल ने यह भी दिखाया कि वह परिस्थितियों के हिसाब से अपना खेल बदल सकते हैं। जब टीम के विकेट लगातार गिर रहे थे, तब उन्होंने संयम बनाए रखा। वहीं, निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ खेलते हुए उन्होंने स्कोर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभाई।

आकाशदीप ने बनाए 68 रन, पडिक्कल ने भी निभाई अहम भूमिका

जुरैल के अलावा तेज गेंदबाज आकाशदीप ने भी बल्लेबाजी में शानदार योगदान दिया। उन्होंने 116 गेंदों पर 68 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और दो छक्के शामिल रहे। आकाशदीप ने जुरैल के साथ मिलकर आठवें विकेट के लिए 75 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने इंडिया-ए को 300 रन के पार पहुंचाने में मदद की।

आकाशदीप आमतौर पर अपनी तेज गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस मुकाबले में उन्होंने बल्ले से भी उपयोगी प्रदर्शन किया। उन्होंने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के सामने विकेट पर समय बिताया और कप्तान का अच्छा साथ दिया। इससे भारतीय टीम पहली पारी में 346 रन बनाने में सफल रही।

देवदत्त पडिक्कल ने भी शुरुआती दबाव में महत्वपूर्ण पारी खेली थी। उन्होंने 140 गेंदों में 12 चौकों की मदद से 80 रन बनाए। पडिक्कल और साई सुदर्शन की साझेदारी ने पहले विकेट के जल्दी गिरने के बाद टीम को संभाला था। हालांकि, बीच में लगातार विकेट गिरने से भारत मुश्किल में आ गया था। बाद में जुरैल और आकाशदीप ने स्थिति सुधारी।

ऋषभ पंत के लिए क्यों बढ़ सकती है ध्रुव जुरैल की चुनौती?

ध्रुव जुरैल ने न्यूजीलैंड-ए के खिलाफ जिस तरह बल्लेबाजी की, उससे भारतीय टेस्ट टीम में उनकी दावेदारी और मजबूत हुई है। हालांकि, विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर ऋषभ पंत अब भी टीम के भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। पंत कई बार मुश्किल हालात में तेज रन बनाकर भारत को मैच में वापस ला चुके हैं। दूसरी ओर, जुरैल को जब भी मौका मिला है, उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित करने की कोशिश की है।

दोनों के खेलने के अंदाज में भी फर्क है। पंत मैदान पर उतरते ही गेंदबाजों के खिलाफ खुलकर शॉट खेलना पसंद करते हैं। वहीं, न्यूजीलैंड-ए के खिलाफ जुरैल ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की और बड़ी पारी खेली। उन्होंने दिखाया कि जरूरत पड़ने पर वह क्रीज पर टिककर रन बना सकते हैं और टीम की जिम्मेदारी उठा सकते हैं।

फिलहाल एक शतक के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि टेस्ट टीम में पंत की जगह पर कोई खतरा है। पंत के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा अनुभव है और वह कई अहम मुकाबलों में अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। फिर भी जुरैल की इस पारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 

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