क्राउडस्ट्राइक ने चीन से जुड़े हैकर समूह वेपर पांडा के बड़े साइबर जासूसी अभियान का खुलासा किया है। एआई टूल्स की मदद से 14 देशों के 200 से ज्यादा संगठनों को निशाना बनाया गया। नौ संगठनों में घुसपैठ की पुष्टि हुई है।
टेक न्यूज़: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब साइबर जासूसी के लिए भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। साइबर सुरक्षा कंपनी क्राउडस्ट्राइक ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन से जुड़े हैकर समूह वेपर पांडा ने एआई की मदद से कई देशों के सरकारी विभागों और बड़ी कंपनियों के नेटवर्क को निशाना बनाया। इस अभियान में विदेश मंत्रालय, रक्षा क्षेत्र की कंपनियां, दवा निर्माता और टेलीकॉम सेवाएं भी शामिल हैं।
11 दिनों में 200 से ज्यादा संगठनों को बनाया निशाना
साइबर सुरक्षा कंपनी क्राउडस्ट्राइक ने 29 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट में एक बड़े साइबर जासूसी अभियान की जानकारी दी है। कंपनी के मुताबिक, वेपर पांडा नाम के हैकर समूह ने 17 अक्टूबर से एआई आधारित टूल्स का इस्तेमाल शुरू किया था। इसके बाद 11 दिनों के भीतर कम से कम 14 देशों के 200 से ज्यादा संगठनों को निशाना बनाया गया।
इस अभियान में सरकारी मंत्रालयों के अलावा रक्षा, दवा, सेमीकंडक्टर, परमाणु ऊर्जा, वित्तीय सेवाओं और दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां शामिल थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि लैटिन अमेरिका के दो देशों के विदेश मंत्रालयों में घुसपैठ की गई। वहीं, मध्य पूर्व के एक देश के गृह मंत्रालय का नेटवर्क भी प्रभावित हुआ।
यूरोप के एक देश में हैकरों ने विदेश मंत्रालय के साथ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तथा रक्षा, न्याय और वित्त विभागों को भी निशाना बनाया। अमेरिका में 19 संगठनों पर साइबर हमले की कोशिश दर्ज की गई। हालांकि, 200 से ज्यादा संगठनों को निशाना बनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि सभी के नेटवर्क में सफलतापूर्वक सेंध लगाई गई। क्राउडस्ट्राइक ने नौ संगठनों में घुसपैठ के बाद संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि की है। ये आंकड़े कंपनी की जांच पर आधारित हैं।
डीपसीक और ARTEX की मदद से चलाया अभियान
इस साइबर जासूसी अभियान की सबसे अहम बात एआई का इस्तेमाल है। रिपोर्ट के मुताबिक, हैकरों ने ARTEX नाम के एजेंटिक एआई फ्रेमवर्क का सहारा लिया। इसके साथ चीन में विकसित डीपसीक और एक दूसरे कमर्शियल एआई मॉडल का भी इस्तेमाल किया गया। ARTEX एक ऐसा फ्रेमवर्क है, जिसमें कई एआई एजेंट मिलकर अलग-अलग तकनीकी काम कर सकते हैं। इसके जरिए नेटवर्क की जांच, कमजोरियों की पहचान और दूसरे सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश जैसे काम एक साथ किए जा सकते हैं।
पहले ऐसे कई काम हैकरों को खुद करने पड़ते थे। अब एआई की मदद से एक व्यक्ति कई सिस्टम पर एक साथ गतिविधियां चला सकता है। हालांकि, इस अभियान में एआई पूरी तरह अपने आप फैसले नहीं ले रहा था। हैकर उसे निर्देश दे रहे थे और जरूरत के अनुसार काम की दिशा बदल रहे थे। क्राउडस्ट्राइक को मिले रिकॉर्ड में चीनी भाषा में दिए गए निर्देश भी सामने आए हैं।
कंपनी के मुताबिक, एक हमले में एआई एजेंटों ने लगभग 1.4 अरब इनपुट टोकन इस्तेमाल किए। इससे अंदाजा मिलता है कि अभियान में एआई का कितने बड़े स्तर पर उपयोग हुआ।
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नेटवर्क में घुसकर लगाया BLOODALCHEMY बैकडोर
क्राउडस्ट्राइक की जांच में सामने आया कि हैकरों ने कुछ संगठनों के नेटवर्क में BLOODALCHEMY नाम का बैकडोर इस्तेमाल किया। यह ऐसा नुकसानदायक सॉफ्टवेयर है, जिसकी मदद से हमलावर किसी प्रभावित सिस्टम तक दोबारा पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नौ संगठनों में नेटवर्क तक पहुंचने के बाद हैकरों ने अंदरूनी सिस्टम की जानकारी जुटाई। उन्होंने लॉगिन क्रेडेंशियल हासिल करने, नेटवर्क की पड़ताल करने और दूसरे कंप्यूटरों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश की।
इसके अलावा कम से कम 12 अन्य संगठनों के खिलाफ पासवर्ड से जुड़ी जानकारी हासिल करने के प्रयास दर्ज किए गए। इनमें अमेरिकी थिंक टैंक और यूरोप की सरकारी संस्थाएं भी शामिल थीं। हैकरों ने ऐसे कंप्यूटरों की पहचान करने की कोशिश भी की, जिनमें क्राउडस्ट्राइक का सुरक्षा सॉफ्टवेयर मौजूद नहीं था। इसका मकसद उन सिस्टमों तक पहुंचना था, जहां संदिग्ध गतिविधियां पकड़ने की व्यवस्था कमजोर हो सकती थी।
सरकारी विभागों और कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती
एआई आधारित साइबर हमलों का खतरा इसलिए गंभीर है, क्योंकि अब कम संसाधनों के साथ भी बड़ी संख्या में नेटवर्क को निशाना बनाया जा सकता है। सरकारी मंत्रालयों और रक्षा कंपनियों में संवेदनशील जानकारी मौजूद होती है। ऐसे में उनके सिस्टम की सुरक्षा बेहद जरूरी है। क्राउडस्ट्राइक की रिपोर्ट बताती है कि हैकर केवल नए सॉफ्टवेयर की कमजोरियों पर निर्भर नहीं हैं। वे पुराने लॉगिन रिकॉर्ड, सुरक्षा चाबियों और कमजोर पासवर्ड व्यवस्था का भी फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस तरह के हमलों से बचाव के लिए संगठनों को अपने नेटवर्क पर लगातार नजर रखनी होगी। पुराने पासवर्ड और सुरक्षा चाबियां बदलना, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाना और सभी जरूरी कंप्यूटरों पर सुरक्षा सिस्टम सक्रिय रखना महत्वपूर्ण है।









