मेघालय में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 12 में से 11 विधायक भाजपा और एनपीपी में शामिल हो चुके हैं। इसके बाद UDP अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।
शिलांग: मेघालय की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री मेटबाह लिंगदोह ने 31 अक्टूबर को अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री कोनराड संगमा को सौंप दिया। पार्टी के ज्यादातर विधायक पहले ही दूसरे दलों में जा चुके हैं। अब विधानसभा में लिंगदोह UDP के अकेले विधायक बचे हैं। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए सरकार में मंत्री बने रहना उचित नहीं समझा।
11 विधायक छोड़ गए पार्टी, मेटबाह लिंगदोह ने क्यों दिया इस्तीफा?
मेघालय में सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा रही यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी इन दिनों अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। कुछ महीने पहले तक विधानसभा में पार्टी के 12 विधायक थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ एक रह गई है। आठ विधायक भाजपा में शामिल हो गए, जबकि तीन ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) का साथ चुना। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ने कैबिनेट छोड़ने का फैसला किया।
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लिंगदोह मेघालय विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी में हुए बदलाव और मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर विचार करने के बाद इस्तीफा दिया है। उनका कहना है कि जब उनकी पार्टी के बाकी विधायक दूसरे दलों में चले गए हैं, तो ऐसे हालात में मंत्री पद पर बने रहना उचित नहीं होगा।
उन्होंने यह भी साफ किया कि इस्तीफा देने के लिए उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था। यह फैसला उन्होंने खुद लिया है। हालांकि, उन्होंने पार्टी अध्यक्ष का पद नहीं छोड़ा है।
सितंबर से शुरू हुआ विधायकों के पार्टी छोड़ने का सिलसिला
UDP में टूट की शुरुआत सितंबर 2026 में हुई थी। उस समय पार्टी के आठ विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद अक्टूबर में तीन अन्य विधायक एनपीपी में शामिल हो गए। विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों समूहों के विलय को मान्यता दे दी। इससे सदन में UDP की संख्या सीधे 12 से घटकर एक रह गई।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा भाजपा और एनपीपी को मिला है। भाजपा के पास अब विधानसभा में 10 विधायक हैं, जबकि एनपीपी की संख्या बढ़कर 36 हो गई है। मेघालय विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं और बहुमत के लिए 31 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में एनपीपी अब अपने दम पर भी बहुमत के आंकड़े से आगे है।
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा और UDP दोनों ही कोनराड संगमा के नेतृत्व वाले मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) का हिस्सा रहे हैं। यानी UDP के विधायक किसी विरोधी गठबंधन में नहीं, बल्कि सरकार में शामिल दूसरे दलों में गए हैं। इससे गठबंधन के अंदर भी राजनीतिक ताकत का संतुलन बदल गया है।
2023 में जीती थीं 12 सीटें, अब सिर्फ एक विधायक बचा
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में UDP ने 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। पार्टी खासकर खासी और जयंतिया हिल्स इलाके में मजबूत क्षेत्रीय दल के तौर पर सामने आई थी। चुनाव के बाद सरकार गठन में भी उसकी अहम भूमिका रही।
लेकिन तीन साल के भीतर तस्वीर काफी बदल चुकी है। जिस पार्टी के पास विधानसभा में 12 विधायकों की ताकत थी, उसे अब सिर्फ अपने अध्यक्ष के सहारे आगे बढ़ना होगा। लिंगदोह मायरांग विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
UDP के सामने अब केवल विधानसभा में संख्या घटने की चुनौती नहीं है। पार्टी को अपने संगठन को संभालने और कार्यकर्ताओं का भरोसा बनाए रखने की भी जरूरत होगी। लगातार विधायकों के जाने से क्षेत्रीय राजनीति में उसकी पहले जैसी स्थिति कमजोर हुई है।
अब UDP का अगला कदम क्या होगा?
मेटबाह लिंगदोह के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि UDP आगे क्या फैसला लेगी। पार्टी की केंद्रीय कार्यकारी समिति इस पूरे मामले पर चर्चा कर रही है। लिंगदोह के मुताबिक, पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों से बातचीत के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
फिलहाल UDP ने सत्ताधारी गठबंधन से अलग होने की घोषणा नहीं की है। लिंगदोह ने मंत्री पद छोड़ा है, लेकिन पार्टी के भविष्य और सरकार के साथ उसके संबंधों पर अंतिम निर्णय सामने आना बाकी है।
दूसरी ओर, एनपीपी की बढ़ी हुई ताकत ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की स्थिति मजबूत कर दी है। भाजपा भी विधानसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। अब देखना होगा कि UDP अपने बचे हुए संगठन को किस तरह संभालती है और आने वाले दिनों में मेघालय की राजनीति में उसकी भूमिका क्या रहती है।









