Agra MLC Election: बूथ कैप्चरिंग मामले में 27 अधिकारियों पर आरोप पत्र, छह निलंबित, चुनाव आयोग को भेजी रिपोर्ट

Agra MLC Election: आगरा शिक्षक एमएलसी चुनाव में बूथ कैप्चरिंग के आरोपों पर 27 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र भेजे गए। छह अधिकारी निलंबित हैं।

आगरा शिक्षक एमएलसी चुनाव में बूथ कैप्चरिंग और सुरक्षा में लापरवाही के मामले में 27 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। छह अधिकारी पहले ही निलंबित हो चुके हैं। मंडलायुक्त ने आरोप पत्र निर्वाचन आयोग को भेजे हैं।

आगरा: शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर हुई गड़बड़ी के मामले में चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। 23 अक्टूबर को मतदान के दौरान तीन बूथों पर अनियमितता की शिकायतें सामने आई थीं। अब आगरा के मंडलायुक्त और रिटर्निंग अधिकारी नगेंद्र प्रताप ने छह निलंबित अधिकारियों समेत 27 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर निर्वाचन आयोग को भेज दिए हैं। मामले में पुलिस और मतदान कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में है।

बूथ कैप्चरिंग के आरोपों के बाद 27 अधिकारियों पर कार्रवाई

आगरा खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में मतदान के दौरान हुई गड़बड़ी का मामला अब विभागीय कार्रवाई तक पहुंच गया है। निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्रों की सुरक्षा में लापरवाही को गंभीर माना है। मामले में छह अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि 21 अन्य कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।

चुनाव के दौरान फतेहाबाद और सैंया ब्लॉक के मतदान केंद्रों पर हंगामा हुआ था। आरोप है कि कुछ लोग मतदान केंद्रों के अंदर पहुंच गए और वहां रखे मतपत्रों को अस्त-व्यस्त कर दिया। उस समय ड्यूटी पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारी उन्हें रोकने में नाकाम रहे। इस घटना से जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए थे। 

आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में आगरा और मथुरा समेत 12 जिले शामिल हैं। यहां करीब 50 हजार मतदाताओं के लिए 150 बूथ बनाए गए थे। आगरा जिले के 24 बूथों पर 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक मतदान हुआ था। इसी दौरान फतेहाबाद के बूथ संख्या 26 और सैंया के बूथ संख्या 21 पर विवाद की शिकायत मिली थी।

सपा प्रत्याशी की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

मतदान के दिन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने कमिश्नरी पहुंचकर मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप से शिकायत की थी। उन्होंने बूथ कैप्चरिंग और मतदान में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए संबंधित वीडियो भी अधिकारियों को सौंपे थे। उनका कहना था कि मतदान केंद्रों पर हुई घटनाओं से चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।

शिकायत मिलने के बाद निर्वाचन आयोग ने 24 अक्टूबर को मामले की रिपोर्ट मांगी। रिटर्निंग अधिकारी की ओर से 25 अक्टूबर को रिपोर्ट आयोग को भेजी गई। इसके बाद आयोग ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

मतदान में अनियमितताओं के कारण खेरागढ़ के बूथ संख्या 20, सैंया के बूथ संख्या 21 और फतेहाबाद के बूथ संख्या 26 पर पहले हुए मतदान को रद्द कर दिया गया था। इन तीनों बूथों पर 26 अक्टूबर को दोबारा मतदान कराया गया।

कौन-कौन से अधिकारी हुए निलंबित?

फतेहाबाद ब्लॉक के बूथ संख्या 26 पर ड्यूटी में लापरवाही के मामले में सेक्टर मजिस्ट्रेट और प्रभागीय वनाधिकारी विशाल राठौर, सेक्टर पुलिस अधिकारी पुरुषोत्तम लाल और उप निरीक्षक सुमित त्यागी को निलंबित किया गया है।

इसी तरह सैंया ब्लॉक के बूथ संख्या 21 पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट और जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी ओपी चक, क्राइम ब्रांच के निरीक्षक हरिशरण सिंह और एत्माद्दौला थाने के उप निरीक्षक संदीप कुमार के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई हुई है।

इन छह अधिकारियों के अलावा दोनों बूथों के दो पीठासीन अधिकारियों और तीन मतदान अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई चल रही है। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात 16 पुलिसकर्मी भी कार्रवाई के दायरे में हैं। इनमें पांच मुख्य आरक्षी और 11 सिपाही शामिल हैं। इस तरह कुल 27 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। 

आयोग को भेजे आरोप पत्र, अब आगे क्या होगा?

रिटर्निंग अधिकारी और मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप के अनुसार, फतेहाबाद और सैंया ब्लॉक में ड्यूटी पर तैनात संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर निर्वाचन आयोग को भेजे गए हैं। अब विभागीय प्रक्रिया के तहत उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।

चुनाव आयोग ने इस मामले में मतदान केंद्रों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को गंभीर माना है। आयोग का कहना है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की जिम्मेदारी निष्पक्ष और सुरक्षित मतदान कराना है। मतदान केंद्रों पर निगरानी में इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। 

फिलहाल छह अधिकारी निलंबित हैं और बाकी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी है। आरोप पत्रों पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी।

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