पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। दो विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद अमृतसर नॉर्थ के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना पत्र सीधे स्पीकर को भेजा है।
चंडीगढ़: पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। पार्टी की पहली उम्मीदवार सूची आने के बाद दो दिनों में तीन विधायकों के इस्तीफे सामने आए हैं। ताजा मामला अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह का है। उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ने का फैसला किया है। इससे पहले रविवार को चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
दो दिन में तीन विधायकों के इस्तीफे, पंजाब AAP में बढ़ी हलचल
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आम आदमी पार्टी को लगातार राजनीतिक झटके लग रहे हैं। सोमवार, दो नवंबर को अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की जानकारी दी। उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे पंजाब विधानसभा के स्पीकर को भेजा है। इससे एक दिन पहले पार्टी के दो अन्य विधायक भी इस्तीफा दे चुके थे।
कुंवर विजय प्रताप ने अपने पत्र में एक नवंबर 2026 से विधानसभा सदस्यता छोड़ने की बात लिखी है। उन्होंने यह पत्र ई-मेल, व्हाट्सएप और डाक के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष को भेजा। हालांकि, उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के संबंध में अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुंवर विजय प्रताप पहले से पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जाते रहे हैं। जून 2025 में आम आदमी पार्टी ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया था। ऐसे में उनका नया फैसला पार्टी की सदस्यता छोड़ने का नहीं, बल्कि विधायक पद से इस्तीफा देने का है।
कुंवर विजय प्रताप ने इस्तीफे की वजह नहीं बताई
कुंवर विजय प्रताप सिंह ने अपने इस्तीफे में किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक कारण का उल्लेख नहीं किया है। हालांकि, सोमवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर अमृतसर के लोगों के नाम संदेश जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने जनता से मिले प्यार और सम्मान के लिए आभार जताया।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा, फिरौती, गैंगस्टरवाद और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने दावा किया कि विधायक रहते हुए उन्होंने अपने तय किए गए करीब 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरे कर लिए हैं।
कुंवर विजय प्रताप ने यह भी कहा कि राजनीति में माई-बाप संस्कृति को खत्म करना उनकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा है। उनके मुताबिक, राजनीति में जनता को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने आगे भी साफ-सुथरी राजनीति और पारदर्शी प्रशासन के लिए काम करने की बात कही है।
पूर्व IPS अधिकारी रहे हैं कुंवर विजय प्रताप सिंह
कुंवर विजय प्रताप सिंह राजनीति में आने से पहले भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी थे। वह 1998 बैच के पंजाब कैडर से जुड़े रहे हैं। पुलिस सेवा से समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थामा था। इसके बाद वह अमृतसर नॉर्थ सीट से विधायक चुने गए।
विधानसभा में रहते हुए उन्होंने अमृतसर के पानी और सीवरेज की समस्या के साथ कंपनी बाग, सर्किट हाउस, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी और सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़े मुद्दे उठाए। इसके अलावा बरगाड़ी बेअदबी का मामला भी उनके प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा है।
पार्टी से निलंबन के बाद भी वह कई मौकों पर पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व की आलोचना करते रहे। अब उनके विधायक पद से इस्तीफे के बाद विधानसभा अध्यक्ष की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
जौड़ामाजरा और पठानमाजरा ने भी छोड़ी आम आदमी पार्टी
कुंवर विजय प्रताप से पहले रविवार, एक नवंबर को समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था।
दोनों विधायकों ने पार्टी नेतृत्व पर पंजाब के हितों की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि राज्य की राजनीति से जुड़े कई फैसले दिल्ली से लिए जा रहे हैं। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
दोनों नेताओं के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। सोमवार को दिल्ली में भाजपा नेतृत्व की मौजूदगी में उनके पार्टी में शामिल होने की संभावना जताई गई है, लेकिन औपचारिक सदस्यता की पुष्टि होना अभी बाकी है।
40 उम्मीदवारों की पहली सूची के बाद बढ़ी नाराजगी
आम आदमी पार्टी ने 31 अक्टूबर को पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो मौजूदा विधायकों ने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया।
हालांकि, पहली सूची में समाना और सनौर सीटों के लिए उम्मीदवारों का एलान नहीं हुआ था। लेकिन दोनों क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज नियुक्त किए जाने के बाद मौजूदा विधायकों के टिकट को लेकर सवाल उठने लगे थे। समाना में सुरजीत सिंह रखड़ा और सनौर में रंजोध हडाना को जिम्मेदारी दी गई थी।
लगातार सामने आ रहे इस्तीफों ने चुनाव से पहले पंजाब की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि आम आदमी पार्टी इन घटनाक्रमों के बाद अपने संगठन और चुनावी तैयारियों को किस तरह आगे बढ़ाती है। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से जुड़ी नई राजनीतिक खबरों और उम्मीदवारों की घोषणाओं पर नजर बनाए रखें।







