बिहार के गया में सरसों तेल महंगा होने से घरों का खर्च बढ़ गया है। एक महीने में कीमत 10 से 15 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 215 रुपये तक पहुंच गई है। व्यापारियों को आगे और तेजी की आशंका है।
गया: त्योहारों के मौसम में खरीदारी करने निकले लोगों को इस बार खाने-पीने के सामान पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। चीनी के बाद अब सरसों तेल के बढ़ते दाम ने परेशानी बढ़ा दी है। गया के बाजारों में एक महीने पहले जो तेल करीब 195 रुपये लीटर मिल रहा था, उसकी कीमत अब 210 से 215 रुपये तक पहुंच गई है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में सरसों की आवक कम होने से कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
सरसों तेल महंगा होने से घर का खर्च बढ़ा
बिहार के गया में सरसों तेल की कीमतों में तेजी का असर अब आम परिवारों की खरीदारी पर दिखाई देने लगा है। किराना दुकानों पर तेल लेने पहुंच रहे ग्राहकों को पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। कार्तिक महीने में घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। ऐसे समय में तेल महंगा होने से लोगों को अपने खर्च का हिसाब दोबारा लगाना पड़ रहा है।
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सरसों तेल रोजाना खाना बनाने में इस्तेमाल होता है। सब्जी से लेकर पूड़ी और दूसरे पकवान तैयार करने तक इसकी जरूरत पड़ती है। इसलिए कीमत में मामूली बढ़ोतरी भी महीने के कुल राशन खर्च पर असर डालती है। खासकर उन परिवारों के लिए परेशानी ज्यादा है, जिनकी कमाई सीमित है और जिन्हें घर का पूरा खर्च तय बजट में चलाना पड़ता है।
पिछले दिनों चीनी के दाम बढ़ने से भी लोगों को परेशानी हुई थी। बाद में कीमतों में कुछ राहत मिली, लेकिन अब तेल महंगा होने लगा है। इससे त्योहारों की खरीदारी का खर्च और बढ़ गया है।
बाजार में कम पहुंच रही सरसों, व्यापारी बता रहे वजह
गया के पुरानी गोदाम इलाके में सरसों तेल का थोक कारोबार करने वाले अभिषेक भारद्वाज के मुताबिक, बीते एक महीने में तेल के दाम करीब 10 से 15 रुपये प्रति लीटर बढ़े हैं। उनका कहना है कि इस समय बाजार में सरसों की उपलब्धता पहले के मुकाबले कम है।
व्यापारियों के अनुसार, कई किसान अभी अपनी सरसों बेचने के बजाय उसे रोककर रख रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि आगे कीमत बढ़ने पर फसल का बेहतर पैसा मिलेगा। इससे मंडियों में सरसों की आवक घट रही है और तेल बनाने वाली मिलों को कच्चा माल मिलने में परेशानी हो सकती है।
हालांकि, बाजार में तेल की कीमत केवल सरसों की उपलब्धता से तय नहीं होती। खरीद की लागत, मिलों का उत्पादन, माल ढुलाई और स्थानीय मांग भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। त्योहारों के समय मांग बढ़ने पर बाजार में उपलब्ध स्टॉक का महत्व और बढ़ जाता है।
क्या 250 रुपये लीटर तक पहुंच सकता है तेल?
सरसों तेल की बढ़ती कीमतों के बीच व्यापारियों ने आने वाले दिनों में और तेजी की आशंका जताई है। थोक विक्रेता अभिषेक भारद्वाज का अनुमान है कि बाजार में मौजूदा स्थिति बनी रही तो तेल का भाव 250 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता है।
हालांकि, यह केवल कारोबारी अनुमान है। अभी यह तय नहीं है कि कीमत इतनी बढ़ेगी ही। अगर मंडियों में सरसों की आवक सुधरती है और तेल की सप्लाई सामान्य रहती है तो बाजार की स्थिति बदल सकती है।
फिलहाल ग्राहकों की चिंता यह है कि जरूरी खाद्य सामान लगातार महंगा हो रहा है। छोटे दुकानदारों के लिए भी बदलती कीमतों के हिसाब से माल खरीदना और बेचना चुनौती बन सकता है।
सरकारी समर्थन मूल्य बढ़ने का कितना असर?
सरसों तेल महंगा होने के पीछे समर्थन मूल्य में हुई बढ़ोतरी को भी एक वजह बताया जा रहा है। तेल कारोबारियों के अनुसार, सरकार ने सरसों का MSP 6,240 रुपये से बढ़ाकर 6,680 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इस तरह समर्थन मूल्य में 440 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इससे किसानों को अपनी सरसों बेचने पर पहले से अच्छा दाम मिलने की उम्मीद है।
वहीं, तेल मिल चलाने वालों के लिए खर्च बढ़ सकता है। सरसों महंगी खरीदी जाएगी तो उससे तेल निकालने की लागत भी बढ़ेगी। हालांकि, दुकानों पर बिकने वाला सरसों तेल सिर्फ MSP बढ़ने से महंगा नहीं होता। मंडियों में कितनी सरसों पहुंच रही है, व्यापारियों के पास कितना माल बचा है और बाजार में तेल की कितनी मांग है, इन बातों से भी भाव ऊपर-नीचे होते रहते हैं।








