Google का बड़ा एक्शन, चीनी कंपनी ने 13 लाख Android डिवाइस में छिपाया मैलवेयर, अब पार्टनरशिप खत्म

Google Android Malware: चीनी कंपनी Videostrong पर 13 लाख से ज्यादा Android डिवाइस में मैलवेयर डालने का आरोप। गूगल ने साझेदारी खत्म कर बड़ा एक्शन लिया। Copy

गूगल ने चीनी कंपनी Videob के साथ साझेदारी खत्म कर दी है। कंपनी पर 13 लाख से ज्यादा Android डिवाइस में खतरनाक सॉफ्टवेयर डालने का आरोप है। इन डिवाइस का इस्तेमाल मालिकों की जानकारी के बिना साइबर अपराध में किया जा रहा था।

Google Android Malware: गूगल ने चीन की टेक कंपनी Videob Technology के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। गूगल की जांच में सामने आया कि इस कंपनी के बनाए 13 लाख से ज्यादा Android डिवाइस एक खतरनाक नेटवर्क से जुड़े थे। इनके जरिए साइबर अपराधी लोगों का डेटा चुराने और इंटरनेट कनेक्शन का गलत इस्तेमाल करने जैसी गतिविधियां चला रहे थे। गूगल ने अब कंपनी से संबंध तोड़ने के साथ इस नेटवर्क को बंद करने की कार्रवाई की है।

चीनी कंपनी ने Android डिवाइस में छिपाया था खतरनाक सॉफ्टवेयर

गूगल ने अपने एक Android मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के खिलाफ कार्रवाई की है। कंपनी का नाम Videob Technology है और इसका मुख्यालय चीन के शेनझेन में है। गूगल की सिक्योरिटी टीम को जांच के दौरान पता चला कि इस कंपनी के बनाए लाखों डिवाइस में पहले से एक ऐसा सॉफ्टवेयर मौजूद था, जिसकी मदद से उन्हें दूर बैठकर कंट्रोल किया जा सकता था।

Google का बड़ा एक्शन, चीनी कंपनी ने 13 लाख Android डिवाइस में छिपाया मैलवेयर, अब पार्टनरशिप खत्म

गूगल की Threat Intelligence Group ने 2 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट में बताया कि इस नेटवर्क का नाम XCPE है। इसके जरिए 13 लाख से ज्यादा Android डिवाइस को एक बड़े बॉटनेट का हिस्सा बना दिया गया था। बॉटनेट ऐसे डिवाइस का नेटवर्क होता है, जिन्हें उनके मालिक की जानकारी के बिना इंटरनेट के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है।

गूगल का आरोप है कि Videob ने यह सॉफ्टवेयर जानबूझकर अपने बनाए डिवाइस में डाला था। कंपनी ने साइबर अपराधियों को इन डिवाइस तक पहुंच देकर पैसे कमाए। इसके बाद अपराधी इनका इस्तेमाल फर्जी विज्ञापन चलाने, लोगों की जानकारी निकालने और दूसरे खतरनाक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए करते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि यह काम लंबे समय से चल रहा था। अलग-अलग ब्रांड और मॉडल के डिवाइस में मैलवेयर मौजूद था। इसकी वजह से सामान्य ग्राहकों को पता ही नहीं चल पाता था कि उनका डिवाइस किसी दूसरे के कंट्रोल में है।

Android TV बॉक्स समेत कई डिवाइस हुए प्रभावित

इस साइबर हमले का सबसे ज्यादा असर Android TV सेट-टॉप बॉक्स पर पड़ा। ये वही डिवाइस हैं, जिनकी मदद से सामान्य टीवी पर इंटरनेट, ऑनलाइन वीडियो और स्ट्रीमिंग ऐप इस्तेमाल किए जाते हैं।

इसके अलावा कुछ दूसरे Android आधारित डिवाइस भी प्रभावित हुए। इनमें हेल्थकेयर से जुड़े उपकरण, कराओके मशीन और डिजिटल डिस्प्ले जैसे प्रोडक्ट शामिल थे। यानी खतरा केवल स्मार्टफोन या टीवी तक सीमित नहीं था।

गूगल के मुताबिक, Videob ने मैलवेयर को छिपाने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया था। जब कोई ग्राहक नया डिवाइस खरीदकर पहली बार चालू करता था, तब उसमें खतरनाक सॉफ्टवेयर लोड हो जाता था। इससे सामान्य सिक्योरिटी जांच में इसे पकड़ना मुश्किल हो गया था।

यह मैलवेयर डिवाइस में छिपकर काम करता था। कई मामलों में साइबर अपराधी स्क्रीनशॉट ले सकते थे, अकाउंट से जुड़ी जानकारी निकाल सकते थे और इंटरनेट कनेक्शन के जरिए दूसरी गतिविधियां चला सकते थे।

सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि डिवाइस का मालिक सामान्य तरीके से टीवी या दूसरी सुविधाएं इस्तेमाल करता रहता था। उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं होता था कि उसी इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल कोई और कर रहा है।

गूगल ने कंपनी पर लगाया बैन, लाखों डिवाइस के नेटवर्क पर कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद गूगल ने Videob Technology के साथ अपने सभी कारोबारी संबंध खत्म कर दिए हैं। अब इस कंपनी को गूगल से सर्टिफाइड Android डिवाइस बनाने या बेचने की अनुमति नहीं होगी। कंपनी दूसरे सर्टिफाइड Android निर्माताओं को सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध नहीं करा सकेगी।

गूगल ने अपने टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के साथ मिलकर XCPE बॉटनेट को कंट्रोल करने वाले सर्वर और डोमेन पर भी कार्रवाई की है। इन सर्वर के जरिए साइबर अपराधी प्रभावित डिवाइस तक पहुंच बनाते थे और उनमें नया मैलवेयर भेजते थे।

गूगल का अनुमान है कि इस कार्रवाई से कम से कम एक करोड़ दूसरे प्रभावित डिवाइस तक भी अपराधियों की पहुंच बाधित हो सकती है। हालांकि, ये एक करोड़ डिवाइस उसी निर्माता के बनाए हुए नहीं थे। इनमें अलग-अलग तरीकों से संक्रमित हुए दूसरे उपकरण भी शामिल हैं।

इस घटना के बाद गूगल ने Android डिवाइस बनाने वाली कंपनियों की सिक्योरिटी जांच में बदलाव करने की बात कही है। कंपनी का कहना है कि अब ऐसे खतरनाक सॉफ्टवेयर को पकड़ने के लिए जांच प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा।

इस मामले ने उन ग्राहकों के लिए भी चिंता बढ़ाई है, जो कम कीमत वाले Android TV बॉक्स और दूसरे स्मार्ट डिवाइस खरीदते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ आमतौर पर भरोसेमंद ब्रांड के डिवाइस खरीदने, नियमित सिक्योरिटी अपडेट करने और अनजान ऐप इंस्टॉल करने से बचने की सलाह देते हैं।

अगर कोई Android डिवाइस असामान्य तरीके से काम कर रहा है या उसमें बिना जानकारी के ऐप दिखाई दे रहे हैं, तो उसकी सिक्योरिटी जांच कराना जरूरी है। हालांकि, ऐसी परेशानी होने का मतलब हमेशा मैलवेयर संक्रमण नहीं होता।

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