बिहार के सुगौली स्थित हिंदुस्तान बायोफ्यूल लिमिटेड में अब गन्ने के रस से सीधे एथनॉल नहीं बनाया जाएगा। मिल पहले चीनी तैयार करेगी और फिर बचे शीरे से एथनॉल बनाएगी। 10 नवंबर के बाद पेराई शुरू होने की उम्मीद है। इस बार 45 लाख क्विंटल गन्ना पेरने का लक्ष्य है।
मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की सुगौली चीनी मिल में इस बार गन्ने से चीनी और एथनॉल बनाने का तरीका बदलने जा रहा है। हिंदुस्तान बायोफ्यूल लिमिटेड अब गन्ने के रस का इस्तेमाल पहले चीनी बनाने में करेगी। इसके बाद चीनी तैयार होने पर निकलने वाले शीरे से एथनॉल बनाया जाएगा। सरकार के निर्देश पर मिल प्रबंधन ने यह बदलाव किया है। इसका मकसद चीनी का उत्पादन बढ़ाना है। मिल में 10 नवंबर के बाद गन्ने की पेराई शुरू होने की संभावना है।
गन्ने के रस से सीधे नहीं बनेगा एथनॉल
सुगौली स्थित हिंदुस्तान बायोफ्यूल लिमिटेड में अब तक गन्ने के रस से चीनी बनाने के साथ सीधे एथनॉल भी तैयार किया जाता था। इसके कारण गन्ने के रस का एक हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो जाता था।
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अब सरकार के निर्देश के बाद मिल प्रबंधन ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है। इस पेराई सत्र में गन्ने के रस से सीधे एथनॉल तैयार नहीं किया जाएगा।
पहले गन्ने के रस से चीनी बनाई जाएगी। इसके बाद चीनी उत्पादन के दौरान निकलने वाले शीरे का इस्तेमाल एथनॉल बनाने में होगा।
मिल प्रबंधन का मानना है कि इससे गन्ने के रस का अधिक हिस्सा चीनी उत्पादन के काम आएगा। ऐसे में पिछले सत्रों के मुकाबले चीनी का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
10 नवंबर के बाद शुरू हो सकती है गन्ने की पेराई
सुगौली चीनी मिल में नए पेराई सत्र की तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रबंधन के मुताबिक, 10 नवंबर के बाद गन्ने की पेराई शुरू की जा सकती है।
इस बार मिल को करीब चार महीने तक चलाने की योजना बनाई गई है। इस दौरान किसानों से गन्ने की खरीद के साथ चीनी और एथनॉल का उत्पादन किया जाएगा।
पूर्वी चंपारण जिले में इस वर्ष करीब 26 हजार एकड़ जमीन पर गन्ने की खेती हुई है। मिल प्रबंधन ने 45 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य रखा है।
इसके लिए उत्पादन और गन्ने की आपूर्ति से जुड़ी तैयारियां की जा रही हैं। मिल की कोशिश निर्धारित लक्ष्य के अनुसार किसानों से गन्ना लेकर समय पर पेराई पूरी करने की होगी।
रोजाना तीन हजार क्विंटल चीनी बनाने की क्षमता
हिंदुस्तान बायोफ्यूल लिमिटेड की उत्पादन क्षमता भी काफी महत्वपूर्ण है। सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन करीब तीन हजार क्विंटल चीनी तैयार की जा सकती है।
वहीं, मिल की एथनॉल उत्पादन क्षमता रोजाना लगभग 55 हजार से 60 हजार लीटर है। अब दोनों उत्पादों को तैयार करने के लिए गन्ने के इस्तेमाल का तरीका बदला जाएगा।
मिल प्रबंधन के अनुसार, पहले भी चीनी बनाने के बाद निकलने वाले शीरे से एथनॉल तैयार किया जाता था। बाद में गन्ने के रस से सीधे एथनॉल बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
अब चीनी उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पुरानी व्यवस्था फिर अपनाई जा रही है। हालांकि, उत्पादन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी, यह पेराई सत्र पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम को भेजा जाता है एथनॉल
सुगौली मिल में तैयार होने वाले एथनॉल की बिक्री सामान्य बाजार में नहीं की जाती है। मिल प्रबंधन के अनुसार, यहां बनने वाला एथनॉल सीधे हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड को भेजा जाता है।
इसके बाद कंपनी अपनी जरूरत और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार एथनॉल का इस्तेमाल करती है।
एथनॉल का उपयोग पेट्रोल में मिश्रण सहित विभिन्न औद्योगिक कामों में किया जाता है। चीनी मिलों के लिए यह अतिरिक्त उत्पादन का एक जरिया भी है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सुगौली मिल में चीनी उत्पादन को प्राथमिकता मिलेगी, जबकि एथनॉल बनाने के लिए चीनी उत्पादन से प्राप्त शीरे का इस्तेमाल किया जाएगा।
चार साल में घट गई चीनी की रिकवरी
सुगौली मिल के पिछले चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो चीनी की रिकवरी दर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
वित्त वर्ष 2022-23 में एक क्विंटल गन्ने से औसतन 8.85 किलो चीनी तैयार हुई थी। वर्ष 2023-24 में यह मात्रा बढ़कर 8.96 किलो हो गई।
इसके बाद 2024-25 में रिकवरी घटकर 8.54 किलो प्रति क्विंटल रह गई। वहीं, 2025-26 में एक क्विंटल गन्ने से औसतन 7.89 किलो चीनी प्राप्त हुई।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले दो पेराई सत्रों में चीनी की रिकवरी कम हुई है। हालांकि, रिकवरी पर गन्ने की गुणवत्ता और उत्पादन प्रक्रिया सहित कई बातों का असर पड़ता है।
150 दिन मिल चलाने का लक्ष्य अब तक अधूरा
सरकार ने चीनी मिलों को साल में 150 दिन चलाने का लक्ष्य दिया है। लेकिन सुगौली मिल पिछले चार वर्षों में एक बार भी इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।
वर्ष 2022-23 में मिल 110 दिन चली थी। अगले सत्र 2023-24 में 132 दिन और 2024-25 में 123 दिन तक पेराई हुई। वहीं, 2025-26 में मिल केवल 110 दिन चल सकी।
मिल प्रबंधन ने इसका एक प्रमुख कारण गन्ने की खेती का पर्याप्त रकबा नहीं होना बताया है।
पिछले चार वर्षों में सबसे ज्यादा गन्ने की खेती 2024-25 में 33,174 एकड़ में हुई थी। वहीं, 2025-26 में यह घटकर 26,760 एकड़ रह गई।
इसी अवधि में गन्ने की खरीद भी 39.20 लाख क्विंटल से घटकर 28.56 लाख क्विंटल हो गई थी।
गन्ने की खेती बढ़ाने के लिए किसानों को मिलेगा बीज
सुगौली मिल में पेराई के दिनों की संख्या बढ़ाने के लिए गन्ने का उत्पादन बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
मिल प्रबंधन और सरकारी स्तर पर किसानों को गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। नए क्षेत्रों में खेती शुरू कराने के उद्देश्य से किसानों को मुफ्त गन्ना बीज उपलब्ध कराया जा रहा है।
योजना के तहत किसानों को पांच एकड़ तक गन्ने की खेती के लिए बीज देने की व्यवस्था की गई है।
मिल प्रबंधन को उम्मीद है कि इससे गन्ने की खेती का क्षेत्र बढ़ेगा और आने वाले वर्षों में मिल को अधिक गन्ना मिल सकेगा।
फिलहाल सुगौली चीनी मिल में नए पेराई सत्र और बदली हुई उत्पादन व्यवस्था की तैयारियां चल रही हैं। अब देखना होगा कि चीनी को प्राथमिकता देने से उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी होती है और मिल 45 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य कितना पूरा कर पाती है।










