आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने आरक्षण और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव खत्म होने तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। साथ ही राजनीतिक दलों से मतदाता सूची के पुनरीक्षण में सहयोग करने की अपील की।
इंदौर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने आरक्षण और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर अपनी राय रखी है। बुधवार, 4 नवंबर को इंदौर में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के अंतिम दिन उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। होसबाले ने कहा कि आरक्षण का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करने की प्रक्रिया का भी समर्थन किया।
आरक्षण खत्म करने के पक्ष में नहीं है संघ
मध्य प्रदेश के इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के आखिरी दिन कई मुद्दों पर चर्चा हुई। पत्रकारों से बातचीत में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने आरक्षण को लेकर संगठन का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि आरक्षण को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। समाज के जिन वर्गों ने लंबे समय तक भेदभाव और असमानता का सामना किया है, उन्हें आरक्षण का लाभ मिलता रहना चाहिए।
होसबाले ने साफ किया कि संघ आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। उनका कहना था कि जब तक समाज में भेदभाव और असमानता बनी हुई है, तब तक इस व्यवस्था की जरूरत भी बनी रहेगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरक्षण का फायदा उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें इसकी वास्तव में जरूरत है। इसके लिए राजनीतिक दलों को आपसी बयानबाजी से बचने की सलाह दी।
मतदाता सूची की जांच को बताया जरूरी
आरक्षण के अलावा होसबाले ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले मतदाता सूची की जांच और उसमें जरूरी सुधार करना सामान्य प्रक्रिया है। इसे लेकर राजनीतिक विवाद नहीं होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कई बार मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम बने रहते हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी होती है। कुछ लोगों के नाम एक से ज्यादा स्थानों पर दर्ज मिलते हैं। वहीं, कई लोग नौकरी या दूसरी वजहों से अपना पुराना शहर छोड़कर कहीं और रहने लगते हैं, लेकिन उनका नाम पुरानी सूची में बना रहता है।
होसबाले के मुताबिक, ऐसी गलतियों को ठीक करने के लिए समय-समय पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाना जरूरी है। इससे सूची में सही जानकारी दर्ज करने में मदद मिलती है।
हालांकि, पुनरीक्षण की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से न हटे।
देश की सुरक्षा से भी जोड़ा मतदाता सूची का मुद्दा
दत्तात्रेय होसबाले ने मतदाता सूची में गैर-नागरिकों के नाम होने की आशंका को गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज है, जो भारत का नागरिक नहीं है, तो इसकी जांच जरूरी है।
उनके मुताबिक, यह मामला केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। इसका संबंध देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल का भी जिक्र किया। होसबाले ने कहा कि मतदाता सूची को सही रखने के लिए पहले भी पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है।
भारत में मतदान का अधिकार पात्र नागरिकों को मिलता है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार करने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरी की जाती है।
राजनीतिक दलों से सहयोग करने की अपील
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। इस पर होसबाले ने कहा कि सूची को सही करने की प्रक्रिया को किसी पार्टी के समर्थन या विरोध से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस काम में निर्वाचन आयोग और प्रशासन का सहयोग करें। उनका कहना था कि मतदाता सूची में गलतियों को ठीक करना चुनाव व्यवस्था के लिए जरूरी है।
दूसरी ओर, पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से हटाया जाता है, तो उसे नियमानुसार दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए।
इंदौर में तीन दिन चली संघ की बैठक
इंदौर के डेली कॉलेज परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक 2 नवंबर से शुरू हुई थी। तीन दिवसीय बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल रहे। इस दौरान संगठन के कामकाज, सामाजिक गतिविधियों और देश से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक के अंतिम दिन होसबाले ने आरक्षण और मतदाता सूची के अलावा युवाओं को सामाजिक कार्यों से जोड़ने और नशामुक्ति जैसे विषयों पर भी अपनी बात रखी।
फिलहाल उनके आरक्षण और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े बयान सामने आए हैं। मतदाता अपने नाम और मतदान केंद्र की जानकारी भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।









