यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। प्रियंका गांधी ने दिल्ली में प्रदेश के बड़े नेताओं के साथ बैठक की। इसमें संगठन में बदलाव, चुनाव प्रचार और नई समितियां बनाने पर चर्चा हुई। वहीं, सपा के साथ सीटों के बंटवारे पर भी जल्द बातचीत हो सकती है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सभी पार्टियां अपने-अपने तरीके से चुनाव की तैयारी कर रही हैं। कांग्रेस भी अब यूपी में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली में अपने घर पर प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ बैठक की।
इसमें चुनाव की तैयारियों के साथ पार्टी संगठन को लेकर भी बातचीत हुई। किस नेता को क्या जिम्मेदारी दी जाए और चुनाव से पहले किन जिलों में ज्यादा काम करने की जरूरत है, इन बातों पर चर्चा की गई।
प्रियंका गांधी के घर ढाई घंटे चली बैठक
प्रियंका गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर दोपहर करीब साढ़े तीन बजे बैठक शुरू हुई थी। करीब ढाई घंटे तक चली इस बैठक में यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना, कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में यूपी में कांग्रेस की स्थिति को लेकर बातचीत हुई। पार्टी के सामने सवाल है कि जिन इलाकों में उसका संगठन कमजोर पड़ चुका है, वहां दोबारा कार्यकर्ताओं को कैसे जोड़ा जाए।
इसके लिए जिला और बूथ स्तर पर काम करने की तैयारी है। चुनाव आने से पहले पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करना चाहती है। बैठक के बाद राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि चुनावी कामकाज के लिए अलग-अलग समितियां बनाने पर चर्चा हुई है। चुनाव प्रचार और घोषणापत्र तैयार करने के लिए भी समितियां बनाई जाएंगी। कुछ नेताओं के नामों पर बात हुई है, लेकिन अभी किसी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को लेना है।
यूपी में कांग्रेस के सामने संगठन खड़ा करने की चुनौती
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस की स्थिति पहले जैसी नहीं रही है। पिछले कई विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा है। कई सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर पाए हैं। यही वजह है कि पार्टी इस बार चुनाव से पहले अपने संगठन पर ज्यादा ध्यान दे रही है। दिसंबर 2024 में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की अपनी प्रदेश कार्यकारिणी भंग कर दी थी।
उसके बाद से नई कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। मंगलवार की बैठक में इस मुद्दे पर भी बातचीत हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस बात पर चर्चा हुई कि नई टीम में किन लोगों को जिम्मेदारी दी जाए। कांग्रेस की कोशिश है कि सिर्फ लखनऊ और दिल्ली में बैठकों तक चुनावी तैयारी सीमित न रहे। जिलों में भी पार्टी के कार्यक्रम हों और स्थानीय नेता लोगों से सीधे संपर्क करें। जिन जगहों पर कांग्रेस के कार्यकर्ता कम सक्रिय हैं, वहां संगठन को फिर से खड़ा करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
![]()
समाजवादी पार्टी से कितनी सीटें मांग रही है कांग्रेस?
यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों का बंटवारा सबसे अहम मुद्दों में से एक है। दोनों पार्टियां INDIA गठबंधन में शामिल हैं और अगले चुनाव में भी साथ उतरने की तैयारी कर रही हैं। राजेंद्र पाल गौतम ने बैठक के बाद बताया कि कांग्रेस की ओर से 175 से 200 विधानसभा सीटों की सूची समाजवादी पार्टी को पहले ही दी जा चुकी है। हालांकि, यह केवल उन सीटों की सूची है, जिन पर कांग्रेस चुनाव लड़ना चाहती है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि गठबंधन में उसे कितनी सीटें मिलेंगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। कांग्रेस चाहती है कि उसे उन इलाकों में चुनाव लड़ने का मौका मिले, जहां उसके पास मजबूत उम्मीदवार और कार्यकर्ता मौजूद हैं। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी अपनी चुनावी स्थिति को ध्यान में रखकर सीटों पर फैसला करना चाहती है। प्रदेश प्रभारी के मुताबिक, दिवाली के बाद दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच सीट बंटवारे पर बातचीत होगी। इसके बाद ही तय हो पाएगा कि कांग्रेस और सपा कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगी।
दिल्ली की रैली के बाद यूपी में बढ़ेंगी कांग्रेस की गतिविधियां
दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को हुई विपक्ष की रैली के बाद कांग्रेस अब उत्तर प्रदेश में भी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम करने की तैयारी में है। पार्टी की कोशिश है कि रैली में पहुंचे कार्यकर्ताओं को आगे के चुनावी अभियान से जोड़ा जाए। राजेंद्र पाल गौतम ने रैली में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि आने वाले महीनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सभाएं और रैलियां कैसे आयोजित की जाएं।
कांग्रेस के सामने फिलहाल दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, प्रदेश में अपने संगठन को बूथ तक मजबूत करना और दूसरी, समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे पर सहमति बनाना। अब देखना होगा कि प्रियंका गांधी की अगुवाई में चल रही चुनावी तैयारियों से यूपी में कांग्रेस को कितनी मजबूती मिलती है।









