PM Awas Yojana: बीकानेर में 2.83 करोड़ की कथित गड़बड़ी, कर्मचारी के निलंबन पर हाईकोर्ट की रोक, जानें मामला

बीकानेर की देशनोक नगर पालिका में पीएम आवास योजना के तहत 2.83 करोड़ की कथित गड़बड़ी सामने आई। हाईकोर्ट ने कर्मचारी सुरेंद्र सिंह के निलंबन पर रोक लगाई।

बीकानेर की देशनोक नगर पालिका में पीएम आवास योजना के तहत 2.83 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी कर्मचारी सुरेंद्र सिंह टिंडल के निलंबन पर रोक लगाई है। विवाद निलंबन आदेश जारी करने के अधिकार को लेकर है।

बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर जिले की देशनोक नगर पालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करोड़ों रुपये के संदिग्ध भुगतान का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। करीब 2.83 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी में आरोपों का सामना कर रहे कर्मचारी सुरेंद्र सिंह टिंडल को अदालत से अंतरिम राहत मिली है। राजस्थान हाईकोर्ट ने उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। कर्मचारी की ओर से दलील दी गई कि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को निलंबन आदेश जारी करने का अधिकार नहीं था।

हाईकोर्ट ने कर्मचारी के निलंबन पर लगाई रोक

बीकानेर की देशनोक नगर पालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हुए संदिग्ध भुगतान का मामला चर्चा में है। इस मामले में नगर पालिका के कर्मचारी सुरेंद्र सिंह टिंडल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी। उन्होंने इस आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां से उन्हें राहत मिली है।

PM Awas Yojana: बीकानेर में 2.83 करोड़ की कथित गड़बड़ी, कर्मचारी के निलंबन पर हाईकोर्ट की रोक, जानें मामला

सुरेंद्र सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता परमेंद्र बोहरा ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि उनके मुवक्किल की नियुक्ति नगर पालिका बोर्ड के माध्यम से हुई थी। ऐसे में उन्हें निलंबित करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी था।

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) उनके नियुक्ति प्राधिकारी नहीं हैं। इसलिए वे अपने स्तर पर निलंबन का आदेश जारी नहीं कर सकते। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर रोक लगाई है।

84 लाख रुपये के संदिग्ध भुगतान से शुरू हुआ मामला

यह मामला जून 2026 में सामने आए 84 लाख रुपये के संदिग्ध भुगतान से जुड़ा है। उस समय सुरेंद्र सिंह टिंडल के पास प्रधानमंत्री आवास योजना शाखा की जिम्मेदारी थी।

मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, 25 जून 2026 को करीब 84 लाख रुपये के ऐसे बिल भुगतान के लिए भेजे गए, जिन्हें बाद में फर्जी बताया गया।

नगर पालिका ने इन बिलों को निरस्त कराने के लिए 1 जुलाई को जयपुर स्थित रूडिसको को पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू की। आरोप है कि इस पत्र को ईमेल करने की जिम्मेदारी सुरेंद्र सिंह को दी गई थी, लेकिन उन्होंने ईमेल नहीं भेजा।

इसके बाद नगर पालिका के अधिकारियों ने 6 जुलाई को खुद ईमेल भेजा। हालांकि, भुगतान प्रक्रिया समय रहते नहीं रुक सकी। रिकॉर्ड के अनुसार, 8 जुलाई को 84 लाख रुपये की रकम संदिग्ध खातों में ट्रांसफर हो गई।

कर्मचारी ने वापस जमा कराए 84 लाख रुपये

संदिग्ध भुगतान की जानकारी मिलने के बाद नगर पालिका ने 10 जुलाई को मामले में कार्रवाई शुरू की। इसके बाद 22 जुलाई 2026 को सुरेंद्र सिंह टिंडल ने 84 लाख रुपये नगर पालिका के बैंक खाते में वापस जमा करा दिए।

रकम वापस आने के बावजूद मामले की जांच बंद नहीं हुई। नगर पालिका की जांच समिति ने प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड की पड़ताल की।

जांच में सामने आया कि संदिग्ध भुगतान का मामला केवल 84 लाख रुपये तक सीमित नहीं था। इससे पहले भी कई बिलों के जरिए भुगतान किए जाने की बात सामने आई।

जांच में मिले 49 संदिग्ध बिल, रकम 2.83 करोड़ पहुंची

जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 से जून 2026 के बीच कुल 49 ऐसे बिल मिले, जिन्हें फर्जी बताया गया है। इन बिलों के माध्यम से कथित तौर पर 2 करोड़ 83 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान ऐसे खातों में किया गया, जिनके लाभार्थियों की वैधता पर सवाल उठे हैं।

इसमें से 84 लाख रुपये वापस जमा कराए जा चुके हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बाकी 1 करोड़ 99 लाख 80 हजार रुपये की रकम अभी बकाया बताई गई है।

इतनी बड़ी राशि के संदिग्ध भुगतान का मामला सामने आने के बाद नगर पालिका की भुगतान प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जांच में सामने आए आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि होना अभी बाकी है।

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