प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विदेशी मदद लेने का आरोप लगाने के बाद राहुल गांधी बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं। बीजेपी प्रवक्ता सीआर केशवन ने उनका पुराना वीडियो शेयर कर जवाब दिया है। उन्होंने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भी सवाल उठाए हैं।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच विदेशी मदद को लेकर शुरू हुई बयानबाजी अब और तेज हो गई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि नरेंद्र मोदी विदेशी ताकतों की मदद से प्रधानमंत्री बने और अब भी उसी सहारे सत्ता में हैं। इस पर मंगलवार, 3 नवंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी का 2023 में लंदन में दिया गया एक पुराना बयान साझा किया और उन पर विदेशी हस्तक्षेप की मांग करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी प्रवक्ता केशवन ने क्या कहा?
राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखकर कांग्रेस नेता के आरोपों को गलत बताया। केशवन ने कहा कि राहुल गांधी दूसरों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन उनके अपने पुराने बयान ही उन पर सवाल खड़े कर देते हैं।
केशवन ने मार्च 2023 में राहुल गांधी की लंदन यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान राहुल ने भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठाते हुए विदेशी देशों से दखल देने की बात कही थी। अपनी पोस्ट के साथ उन्होंने राहुल का एक पुराना वीडियो भी लगाया।
इस वीडियो में राहुल गांधी भारत में लोकतंत्र की स्थिति पर बात कर रहे हैं। वह सवाल उठाते हैं कि अमेरिका और यूरोप के देश इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। बीजेपी इस बयान को भारत के अंदरूनी मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की मांग बताती रही है। हालांकि, राहुल ने अपनी बात लोकतंत्र को लेकर चिंता जताने के संदर्भ में कही थी। सिर्फ इस वीडियो के आधार पर यह साबित नहीं होता कि उन्होंने किसी विदेशी सरकार से भारत में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।
सोनिया गांधी और जॉर्ज सोरोस का नाम क्यों आया?
केशवन ने अपनी पोस्ट में राहुल गांधी के साथ सोनिया गांधी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एशिया-पैसिफिक के फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक लीडर्स नाम के संगठन से सोनिया गांधी के कथित जुड़ाव का मामला उठाया। बीजेपी प्रवक्ता ने दावा किया कि इस संगठन ने कश्मीर को अलग देश बनाने के विचार का समर्थन किया था। उन्होंने अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से भी संगठन के संबंध होने का आरोप लगाया।
इसके अलावा केशवन ने हिंडनबर्ग रिसर्च और जर्मनी की शिक्षाविद कॉर्नेलिया वोल का नाम लिया। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि इन लोगों और संगठनों के साथ उसके क्या संबंध हैं और पार्टी इस पर जवाब क्यों नहीं देती। हालांकि, केशवन की पोस्ट में कोई ऐसा नया सबूत सामने नहीं रखा गया, जिससे राहुल गांधी या कांग्रेस की किसी गैरकानूनी विदेशी गतिविधि में भागीदारी साबित होती हो। फिलहाल ये बीजेपी प्रवक्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं।
राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भी पूछे सवाल
सीआर केशवन ने राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर भी सवाल किए। उन्होंने पूछा कि राहुल विदेश जाकर किन लोगों से मिलते हैं और इन मुलाकातों में क्या बातचीत होती है। केशवन का कहना है कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, इसलिए उनकी विदेश यात्राओं से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता ने इन मुलाकातों को देश की सुरक्षा से जोड़ते हुए चिंता जताई। हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी ऐसी खास बैठक या यात्रा का प्रमाण नहीं दिया, जिससे यह पता चलता हो कि राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा है।
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राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दी थी बहस की चुनौती
यह विवाद सोमवार, 2 नवंबर को राहुल गांधी की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर जवाब देते हुए आरोप लगाया कि वह विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने और अब भी उन्हें विदेशों से समर्थन मिल रहा है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री से जुड़ी वित्तीय व्यवस्था को विदेशी ताकतों का सहारा मिलता है और विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी उनके पक्ष में काम करते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को इस मुद्दे पर खुली बहस करने की चुनौती दी। राहुल ने कहा कि वह किसी भी मंच पर और किसी भी समय बहस के लिए तैयार हैं। हालांकि, राहुल गांधी ने भी अपनी पोस्ट में इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया। इसलिए विदेशी मदद से सत्ता में आने या बने रहने की उनकी बात को फिलहाल राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा क्या कहा था, जिससे शुरू हुई बहस?
इस पूरे मामले की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 31 अक्टूबर के भाषण से हुई थी। सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस का कार्यक्रम रखा गया था। इसी कार्यक्रम में मोदी ने विपक्ष के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए थे। प्रधानमंत्री ने कहा था कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार की नीतियों का विरोध करना है। लेकिन उनके मुताबिक, विपक्ष अब विकास के कामों में रुकावट डालने लगा है। उन्होंने विपक्ष को 'विरोध पक्ष' की जगह 'अवरोध पक्ष' बताया था।
मोदी ने अपने भाषण में विदेशों में होने वाली गुप्त मुलाकातों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि कौन विदेश जाकर किससे मिल रहा है और भारत विरोधी ताकतें किन लोगों का साथ दे रही हैं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने और विदेशों में भारत की छवि खराब करने की कथित कोशिशों का भी जिक्र किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने उन पर पलटवार किया और अब बीजेपी प्रवक्ता केशवन ने राहुल के पुराने बयानों और विदेश यात्राओं पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। दोनों तरफ से विदेशी संबंधों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों को साबित करने वाले ठोस प्रमाण सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आए हैं।









