स्ट्रॉबेरी की खेती से महिला ने बदली किस्मत, 50 हजार के कर्ज से शुरू किया काम, अब 18 लाख का कारोबार

झारखंड की कंचन देवी ने 50 हजार रुपये का कर्ज लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। तीन साल में कारोबार 18 लाख पहुंच गया। अब 40 किसान भी इस खेती से जुड़ गए हैं।

झारखंड के पलामू जिले की कंचन देवी ने 50 हजार रुपये का कर्ज लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की थी। तीन साल में उनका कारोबार 18 लाख रुपये तक पहुंच गया। अब उनसे प्रेरित होकर 40 किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं।

पलामू: झारखंड के पलामू जिले की रहने वाली कंचन देवी ने खेती से अपनी आमदनी बढ़ाने का नया रास्ता खोज लिया। तीन साल पहले उन्होंने 50 हजार रुपये का कर्ज लेकर एक एकड़ जमीन पर स्ट्रॉबेरी उगानी शुरू की थी। पहले ही साल पांच लाख रुपये का कारोबार हुआ। आज उनका सालाना टर्नओवर 18 लाख रुपये तक पहुंच गया है। उनकी कामयाबी देखकर आसपास के गांवों की महिलाएं भी स्ट्रॉबेरी की खेती करने लगी हैं।

50 हजार रुपये का कर्ज लेकर शुरू की खेती

पलामू जिले के मनातू प्रखंड की नौडीहा पंचायत के तीलो गांव में रहने वाली कंचन देवी ने तीन साल पहले स्ट्रॉबेरी की खेती करने का फैसला लिया था। उस समय गांव के ज्यादातर किसान धान, गेहूं और दूसरी पारंपरिक फसलें उगाते थे। कंचन ने इनसे अलग कुछ करने की सोची, लेकिन खेती शुरू करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे।

स्ट्रॉबेरी की खेती से महिला ने बदली किस्मत, 50 हजार के कर्ज से शुरू किया काम, अब 18 लाख का कारोबार

उन्होंने पलाश यानी झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से 50 हजार रुपये का कर्ज लिया। इस रकम से एक एकड़ जमीन पर स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए। शुरुआत में यह काम उनके लिए नया था, लेकिन पहले ही साल फसल की बिक्री से पांच लाख रुपये का कारोबार हो गया।

इसके बाद उन्होंने खेती जारी रखी। तीसरे साल तक उनका टर्नओवर 18 लाख रुपये पहुंच गया। हालांकि, यह कुल कारोबार की रकम है, शुद्ध मुनाफा नहीं। खेती पर आने वाला खर्च इसमें से अलग होता है।

कंचन को देखकर दूसरी महिलाओं ने भी शुरू की खेती

कंचन देवी की कमाई की चर्चा धीरे-धीरे आसपास के गांवों तक पहुंचने लगी। उनकी खेती देखकर दूसरी महिलाओं ने भी स्ट्रॉबेरी उगाने में दिलचस्पी दिखाई।

भीतरी गांव की रीना देवी और सुमित्रा देवी भी इस खेती से जुड़ गईं। इनके अलावा कई दूसरी महिलाओं ने भी अपनी जमीन पर स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाने शुरू कर दिए।

पहले गांव की महिलाएं ज्यादातर पारंपरिक खेती तक सीमित थीं। अब वे ऐसी फसलें भी उगा रही हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। इससे उन्हें परिवार की आमदनी बढ़ाने का मौका मिल रहा है।

पांच पंचायतों में पहुंची स्ट्रॉबेरी की खेती

मनातू प्रखंड में कुल सात पंचायतें हैं। इनमें से पांच पंचायतों के किसान अब स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। कंचन देवी की पहल से शुरू हुए इस काम में करीब 40 किसान जुड़ चुके हैं।

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की मनातू प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक नम्रता ने बताया कि इस साल 18 नए किसानों को भी स्ट्रॉबेरी की खेती से जोड़ने की पहल की गई है।

किसानों की मदद के लिए उद्यान विभाग और पलाश मिलकर काम कर रहे हैं। खेती शुरू करने वाले किसानों को आर्थिक सहायता के साथ मुफ्त स्ट्रॉबेरी के पौधे भी दिए जा रहे हैं।

इससे उन परिवारों को भी खेती का नया काम शुरू करने में मदद मिल रही है, जिनके पास शुरुआत में ज्यादा पैसे नहीं होते।

किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बनी स्ट्रॉबेरी

मनातू के कई परिवार खेती पर निर्भर हैं। यहां पहले ज्यादातर किसान सामान्य फसलें उगाते थे, लेकिन अब स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसल की तरफ भी उनका रुझान बढ़ रहा है।

स्ट्रॉबेरी की खेती में पौधों की देखभाल और सिंचाई का खास ध्यान रखना पड़ता है। फल तैयार होने के बाद समय पर उसकी तुड़ाई और बिक्री भी जरूरी होती है।

किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती फसल को सही समय पर बाजार पहुंचाना है। स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब होने वाला फल है। ऐसे में बिक्री में देरी होने पर नुकसान भी हो सकता है।

अच्छा बाजार मिला तो और बढ़ेगी कमाई

स्ट्रॉबेरी की खेती से मनातू के किसानों को कमाई का नया रास्ता मिला है, लेकिन उन्हें बेहतर बाजार की जरूरत है। यदि फसल को आसपास के शहरों और बड़े बाजारों तक पहुंचाने की अच्छी व्यवस्था मिल जाए तो किसानों को ज्यादा फायदा हो सकता है।

इसके लिए परिवहन और भंडारण की सुविधा होना जरूरी है। साथ ही किसानों को अपनी उपज की उचित कीमत मिलनी चाहिए।

कंचन देवी ने 50 हजार रुपये का कर्ज लेकर जो काम शुरू किया था, वह आज 40 किसानों तक पहुंच चुका है। उनकी सफलता से गांव की दूसरी महिलाओं को भी खेती के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने की प्रेरणा मिली है।

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