यूपी के 1.42 करोड़ बच्चे सीख रहे पर्यावरण बचाने के तरीके, स्कूलों में चल रहा खास अभियान

UP School News: योगी सरकार ने 1.32 लाख से ज्यादा स्कूलों में ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह शुरू किया।

उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को पर्यावरण बचाने के तरीके सिखाए जा रहे हैं। प्रदेश के 1.32 लाख से ज्यादा परिषदीय विद्यालयों में 1 से 7 नवंबर तक ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह मनाया जा रहा है। इसमें करीब 1.42 करोड़ विद्यार्थियों को शामिल किया गया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में इस सप्ताह पढ़ाई के साथ बच्चों को पानी, बिजली और दूसरी जरूरी चीजों की बचत करना भी सिखाया जा रहा है। कहीं बच्चों से पर्यावरण पर पोस्टर बनवाए जा रहे हैं, तो कहीं उन्हें बताया जा रहा है कि घर में पानी और बिजली की बर्बादी कैसे रोकी जा सकती है। प्रदेश सरकार ने 1 से 7 नवंबर तक सभी परिषदीय विद्यालयों में ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह मनाने का फैसला किया है। इसके तहत बच्चों को ऐसी बातें सिखाई जा रही हैं, जिनका इस्तेमाल वे घर पर भी कर सकें।

1.32 लाख से ज्यादा स्कूलों के बच्चे अभियान में शामिल

प्रदेश सरकार के अनुसार, इस अभियान में यूपी के 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों को शामिल किया गया है। इन स्कूलों में करीब 1.42 करोड़ से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। इतने बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने का मकसद बच्चों को पर्यावरण से जुड़ी उन बातों की जानकारी देना है, जिनका सीधा संबंध उनकी रोज की जिंदगी से है।

यूपी के 1.42 करोड़ बच्चे सीख रहे पर्यावरण बचाने के तरीके, स्कूलों में चल रहा खास अभियान

स्कूलों में बच्चों को समझाया जा रहा है कि अगर कमरे में कोई नहीं है तो पंखा और लाइट बंद कर देनी चाहिए। नल खुला छोड़ने से पानी बर्बाद होता है। बाजार जाते समय बार-बार प्लास्टिक की थैली लेने के बजाय घर से कपड़े का थैला ले जाना भी एक अच्छी आदत है।

इस काम में शिक्षकों के साथ स्कूलों में बने इको क्लबों की मदद ली जा रही है। इको क्लब के जरिए बच्चे पर्यावरण से जुड़े अलग-अलग कामों में हिस्सा ले रहे हैं। कोशिश है कि बच्चों को जो बातें स्कूल में बताई जा रही हैं, उन्हें वे अपने घर और आसपास भी अपनाएं।

1 से 7 नवंबर तक हर दिन अलग विषय पर कार्यक्रम

ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह के लिए सात दिन का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसमें हर दिन बच्चों को एक अलग विषय की जानकारी दी जा रही है। यह अभियान केंद्र सरकार के मिशन लाइफ से जुड़ा हुआ है।

पहले दिन यानी 1 नवंबर को बच्चों को स्वस्थ रहने और अच्छी दिनचर्या अपनाने के बारे में बताया गया। 2 नवंबर का कार्यक्रम बिजली बचाने पर रखा गया था। इसके अगले दिन 3 नवंबर को पानी की बचत से जुड़ी गतिविधियां कराई गईं।

4 नवंबर को भोजन और उससे जुड़े संसाधनों के सही इस्तेमाल पर ध्यान दिया गया। बच्चों को समझाया गया कि जरूरत के हिसाब से ही खाना लेना चाहिए, ताकि भोजन बर्बाद न हो। इसके साथ ही खाने-पीने की चीजों का सही उपयोग करने के बारे में भी जानकारी दी गई।

आने वाले दिनों में भी स्कूलों में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे। 5 नवंबर को बच्चों को एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक से होने वाली परेशानियों के बारे में बताया जाएगा। 6 नवंबर को ई-कचरे पर कार्यक्रम होगा। इसमें पुराने मोबाइल, बैटरी और खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान से निकलने वाले कचरे के बारे में जानकारी दी जाएगी।

आखिरी दिन 7 नवंबर को कचरा कम करने और पुरानी चीजों को दोबारा इस्तेमाल करने पर कार्यक्रम रखे गए हैं।

बच्चों से बनवाए जा रहे पोस्टर, स्कूलों में होंगी कार्यशालाएं

इस अभियान में बच्चों को केवल शिक्षकों की बातें सुनने तक सीमित नहीं रखा गया है। स्कूलों में पोस्टर बनाने, जागरूकता कार्यक्रम और दूसरी गतिविधियों के जरिए उन्हें शामिल किया जा रहा है।

बच्चे अपनी समझ के मुताबिक पानी बचाने, पेड़-पौधों की देखभाल करने और प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने से जुड़े पोस्टर बना सकते हैं। स्कूलों में मिशन लाइफ की शपथ दिलाने और कार्यशालाएं आयोजित करने का भी प्रावधान है।

इन गतिविधियों के लिए शिक्षकों को जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। स्कूलों को इको क्लब के आधिकारिक पोर्टल ecoclubs.education.gov.in से जानकारी और शिक्षण सामग्री लेने की सुविधा दी गई है।

इससे शिक्षक अपने स्कूल में उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। बच्चों को भी ऐसी गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है, जिनके लिए ज्यादा सामान या किसी विशेष इंतजाम की जरूरत न पड़े।

बेसिक शिक्षा मंत्री ने बताई अभियान की जरूरत

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह ने कहा है कि बच्चों की पढ़ाई के साथ उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की समझ पैदा करना भी जरूरी है।

उनके मुताबिक, सरकार चाहती है कि बच्चे पानी और बिजली की बचत करना सीखें। इसके अलावा प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने और कचरे को सही तरीके से रखने जैसी आदतें भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनें।

मंत्री ने कहा कि बचपन में सीखी गई अच्छी आदतें आगे भी काम आती हैं। इसलिए स्कूलों में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कामों में शामिल किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को भी बच्चों से इन विषयों पर बातचीत करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसका मकसद है कि बच्चे पर्यावरण से जुड़ी बातों को समझें और खुद भी उन पर अमल करें।

घर में भी काम आएंगी स्कूल में सीखी गई बातें

इस पूरे कार्यक्रम में बच्चों के परिवारों को भी ध्यान में रखा गया है। स्कूल में पानी बचाने के बारे में सीखने वाला बच्चा घर पहुंचकर खुले नल को बंद कर सकता है। इसी तरह बिजली बचाने की आदत उसे घर में भी काम आएगी।

बच्चे अपने माता-पिता और परिवार के दूसरे लोगों को भी बता सकते हैं कि प्लास्टिक का कम इस्तेमाल क्यों करना चाहिए और घर के कचरे को अलग-अलग रखना क्यों जरूरी है।

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में यह कार्यक्रम 7 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान स्कूलों में मिशन लाइफ से जुड़े बाकी विषयों पर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभिभावक कार्यक्रम की जानकारी अपने बच्चों के स्कूल से ले सकते हैं। इसके अलावा इको क्लब के सरकारी पोर्टल पर भी इससे जुड़ी सामग्री उपलब्ध है।

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