मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के हमलों के बीच बीजेपी ने पलटवार किया है। वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने पिछले रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर देती है।
Piyush Goyal Rahul Gandhi: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाने के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पलटवार किया है।
उन्होंने कांग्रेस के पुराने फैसलों और पूर्व चुनाव अधिकारियों की राजनीतिक नियुक्तियों का जिक्र करते हुए विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। गोयल ने अपने बयान में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और एमएस गिल के नाम भी लिए।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विवाद के बीच बीजेपी का जवाब
चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी निष्पक्षता को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी तथा विपक्ष के बीच विवाद लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के दूसरे नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं। इसी मुद्दे पर बीजेपी ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास को सामने रखते हुए जवाब दिया है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का आरोप है कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने शासनकाल में चुनाव अधिकारियों को दिए गए पदों और राजनीतिक अवसरों पर चर्चा नहीं करती। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर बहस करते समय सभी दलों के पुराने फैसलों और उनके रिकॉर्ड का भी आकलन होना चाहिए।
गोयल के मुताबिक, कांग्रेस ने अलग-अलग समय पर चुनाव आयोग से जुड़े रहे अधिकारियों को राजनीतिक पदों और जिम्मेदारियों के अवसर दिए। उन्होंने इसे कांग्रेस के आरोपों और उसके अपने राजनीतिक व्यवहार के बीच विरोधाभास के रूप में पेश किया।
टीएन शेषन को लेकर पीयूष गोयल ने क्या कहा?

पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। शेषन को भारतीय चुनाव व्यवस्था में सख्ती और चुनावी नियमों के पालन पर जोर देने के लिए जाना जाता है। गोयल ने दावा किया कि कांग्रेस ने 1999 में टीएन शेषन को लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पार्टी का टिकट दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसे एक पूर्व चुनाव आयुक्त को राजनीतिक रूप से पुरस्कृत करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
हालांकि, इस राजनीतिक आरोप को गोयल के बयान के रूप में ही समझना जरूरी है। किसी अधिकारी को चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिलना अपने आप में चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े किसी आरोप को साबित नहीं करता। ऐसे मामलों का आकलन संबंधित तथ्यों और ऐतिहासिक संदर्भ के आधार पर किया जाना चाहिए।
एमएस गिल की नियुक्तियों का भी किया जिक्र
बीजेपी नेता ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का उदाहरण भी दिया। गोयल ने कहा कि गिल 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। उन्होंने उनके सेवानिवृत्त होने के बाद कांग्रेस से जुड़ने, राज्यसभा पहुंचने और केंद्रीय मंत्री बनाए जाने का उल्लेख किया। गोयल ने इन घटनाओं को आधार बनाकर कांग्रेस पर चुनाव अधिकारियों को राजनीतिक लाभ देने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने पुराने फैसलों पर भी जवाब देना चाहिए।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी पूर्व अधिकारी का सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आना अपने आप में अनुचित आचरण का प्रमाण नहीं है। गोयल की टिप्पणियां इस समय जारी राजनीतिक विवाद में बीजेपी का पक्ष प्रस्तुत करती हैं।
अन्य अधिकारियों को लेकर भी उठाए सवाल
पीयूष गोयल ने अपने बयान में केरल और राजस्थान से जुड़े कुछ अधिकारियों का भी जिक्र किया। उन्होंने टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर के संबंध में राजनीतिक भूमिकाओं या नियुक्तियों का दावा करते हुए सवाल उठाए कि चुनावी जिम्मेदारियों के बाद अधिकारियों को दूसरी प्रशासनिक या राजनीतिक भूमिकाएं देना किस हद तक उचित है।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों की नियुक्तियों का सही विवरण महत्वपूर्ण है। किसी अधिकारी की नियुक्ति को चुनावी पक्षपात से जोड़ने के लिए केवल घटनाओं का क्रम पर्याप्त नहीं होता; इसके समर्थन में ठोस तथ्य भी आवश्यक हैं।










