पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों और सुशासन की सराहना की। उन्होंने कानून-व्यवस्था, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो और गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों का उल्लेख किया। यह टिप्पणी उनकी आत्मकथा के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह में आई।
लखनऊ: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों और सुशासन की सराहना की। लोकभवन सभागार में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह में उन्होंने कानून-व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का उल्लेख किया। उन्होंने प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की भी प्रशंसा की।
रामनाथ कोविन्द ने की योगी सरकार के विकास कार्यों की सराहना
डिजिटल डेस्क, लखनऊ/नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों और सुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को नई ऊर्जा मिली है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के प्रयासों को गति मिली है।
कोविन्द ने एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे आवागमन सुगम हुआ है। उन्होंने सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को भी रेखांकित किया और कहा कि इन योजनाओं से गरीब परिवारों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प की भी सराहना की।
पूर्व राष्ट्रपति बुधवार को लोकभवन सभागार में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इसे अपने लिए भावनात्मक अवसर बताया। कोविन्द ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई मंचों से लोगों को संबोधित किया है, लेकिन इस बार चर्चा का विषय उनका अपना जीवन है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ और यहीं उनकी परवरिश तथा शिक्षा हुई। उन्होंने राज्य को अपनी कर्मभूमि भी बताया।
राजनीति में राष्ट्रसेवा और समावेशी विकास का उल्लेख
रामनाथ कोविन्द ने कहा कि राजनीति के लिए भारतीय जनता पार्टी को चुनने के पीछे प्रमुख कारण पार्टी में राष्ट्र को सर्वोपरि रखने की भावना थी। उन्होंने कहा कि पार्टी में जातिवाद, क्षेत्रवाद और वंशवाद से ऊपर उठकर समावेशी विकास पर जोर दिया जाता है।
उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी, कल्याण सिंह, योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि सामान्य सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले लोग भी देश और प्रदेश के शीर्ष पदों तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग से आने वाला व्यक्ति भी राष्ट्रपति बन सकता है और इसे भारतीय गणतंत्र की उपलब्धि के रूप में देखा जाना चाहिए।
कोविन्द ने अटल बिहारी वाजपेयी को अपने जीवन पर गहरा प्रभाव डालने वाला नेता बताया। उनके अनुसार, वाजपेयी से उन्हें राजनीति को केवल सत्ता प्राप्त करने के बजाय राष्ट्रसेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा मिली।
बचपन की यादें और गरीबों के लिए आवास का जिक्र
पूर्व राष्ट्रपति ने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि कानपुर देहात के एक छोटे से गांव में उनका साधारण घर था, जिसकी छत बारिश के दौरान टपकती थी। वर्ष 2017 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उन्हें वे दिन फिर याद आए थे। उन्होंने उस समय की अपनी भावना का उल्लेख करते हुए कहा था कि देश के किसी गांव में आज भी कोई बच्चा टपकती छत के नीचे खड़े होकर बेहतर भविष्य का सपना देख रहा होगा।
कोविन्द ने कहा कि मोदी और योगी सरकार ने करोड़ों गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए हैं। उनके अनुसार, आवास मिलने से लोगों को सुरक्षा और गरिमा का एहसास होता है।
उन्होंने अपने पिता के योगदान को भी याद किया। कोविन्द के मुताबिक, उनके पिता शिक्षा को जीवन बदलने का माध्यम मानते थे और जमीन दान करने के बावजूद उन्होंने बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। गांव से मिले भाईचारे, संवेदना और बड़ों के सम्मान के संस्कार भी उनके जीवन का हिस्सा बने रहे।
उत्तर प्रदेश और महाकुंभ का किया उल्लेख
रामनाथ कोविन्द ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए हैं, लेकिन राज्य में जन्मे किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति बनने का अवसर पहली बार मिला। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय प्रदेश के करोड़ों लोगों के सपनों और आकांक्षाओं का सम्मान बताया।
उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने दुनिया के सामने भारत की आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता को प्रदर्शित किया।
समारोह के अंत में कोविन्द ने बताया कि उनकी आत्मकथा आने वाले दिनों में देश की सभी क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित की जाएगी। कार्यक्रम में उनके जीवन, राजनीतिक यात्रा और उत्तर प्रदेश से जुड़े अनुभवों पर चर्चा हुई।









