Ali Larijani की मौत के बाद ईरान ने इज़रायल पर Operation True Promise 4 के तहत बड़ा हमला किया। तेल अवीव समेत कई ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया।
Middle East: पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष अब और तेज हो गया है। ईरान ने इज़रायल पर बड़ा जवाबी हमला किया है। यह कार्रवाई अली लारीजानी की मौत के बाद की गई है, जिसे ईरान ने सीधे तौर पर अपनी सुरक्षा पर हमला माना है। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
ऑपरेशन ‘True Promise 4’ के तहत हमला
ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC ने इस जवाबी कार्रवाई को ‘Operation True Promise 4’ का हिस्सा बताया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह इस ऑपरेशन की 61वीं लहर थी, जिसमें इज़रायल के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरान का कहना है कि यह हमला लारीजानी की हत्या का बदला लेने के लिए किया गया। इस ऑपरेशन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि ईरान अपने नेताओं पर हमले को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं करेगा।
तेल अवीव में 100 से ज्यादा ठिकानों पर हमला
ईरान ने दावा किया है कि उसने इज़रायल की राजधानी Tel Aviv में 100 से अधिक सैन्य और सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों को बेहद सुनियोजित और बड़े पैमाने पर अंजाम दिया गया।
सरकारी मीडिया के अनुसार, मिसाइलों ने बिना किसी बड़े अवरोध के अपने लक्ष्यों को भेदा। इससे यह संकेत मिलता है कि हमले की तैयारी काफी समय से की जा रही थी और इसे उच्च स्तर की रणनीति के साथ अंजाम दिया गया।
उन्नत मिसाइलों का इस्तेमाल
इस हमले में ईरान ने कई आधुनिक और शक्तिशाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इनमें Khorramshahr-4 और Qadr जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल थीं, जिनमें multiple warheads लगाने की क्षमता होती है। इसके अलावा Emad और Khaibar Shekan जैसे advanced projectiles का भी उपयोग किया गया।

इन हथियारों के इस्तेमाल से यह स्पष्ट होता है कि ईरान ने इस ऑपरेशन को केवल प्रतीकात्मक जवाब नहीं, बल्कि एक मजबूत सैन्य संदेश के रूप में अंजाम दिया है।
हमलों के बाद ‘ब्लैकआउट’ की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों के बाद तेल अवीव के कई हिस्सों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से आम जनजीवन के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ा।
जमीनी हालात का हवाला देते हुए बताया गया कि इस स्थिति में बचाव कार्य और नियंत्रण बनाए रखना कठिन हो गया। इससे यह भी साफ होता है कि हमलों का प्रभाव केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर के सामान्य जीवन पर भी पड़ा।
हताहतों की संख्या और नुकसान
IRGC के दावे के मुताबिक, इस ऑपरेशन में 230 से अधिक लोग हताहत हुए हैं, जिनमें मारे गए और घायल दोनों शामिल हैं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे हमले की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अन्य शहरों और ठिकानों को भी बनाया निशाना
तेल अवीव के अलावा ईरान ने इज़रायल के कई अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी हमले किए। इनमें Haifa का बंदरगाह, Beersheba और नेगेव क्षेत्र के रणनीतिक ठिकाने शामिल हैं। इसके अलावा Al-Quds के आसपास के इलाकों को भी निशाना बनाए जाने की खबर है। यह दिखाता है कि हमला केवल एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे देश में फैला हुआ था।
अमेरिकी ठिकानों पर भी असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जवाबी कार्रवाई का असर क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी पड़ा है। कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और सऊदी अरब में स्थित कुछ ठिकानों पर हमलों के असर की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इन हमलों की पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय स्तर से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय आयाम ले सकता है।








