लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष एकजुट लेकिन बहुमत की कमी

विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए, लेकिन बहुमत न होने से पारित होने की संभावना कम।

विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस और अन्य दल शामिल हैं। 118 सांसदों ने समर्थन दिया, लेकिन बहुमत नहीं होने के कारण प्रस्ताव का पारित होना मुश्किल है। संसद में बहस जारी रहेगी।

New Delhi: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के अनुसार, इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर किए गए हैं। हालांकि, सदन में आवश्यक बहुमत न होने के कारण इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। संसद का बजट सत्र 2026 का दूसरा चरण शुरू हो चुका है और इसी सत्र में विपक्ष स्पीकर के खिलाफ अपनी असंतोष व्यक्त करने की कोशिश कर रहा है।

अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया

लोकसभा में स्पीकर को हटाने के लिए पहले नोटिस प्रस्तुत करना होता है। इसके लिए कम से कम 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े होना जरूरी है। यदि यह संख्या पूरी नहीं होती, तो प्रस्ताव सदन में पेश नहीं किया जा सकता। इसके बाद सदन में प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होता है। इस दौरान स्पीकर अपनी कुर्सी पर बैठ सकते हैं, लेकिन चर्चा के समय वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते।

कांग्रेस के तीन सांसद करेंगे प्रस्ताव पेश

स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव को पेश करने के लिए कांग्रेस के तीन सदस्य—मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि—सदन की अनुमति लेंगे। जैसे ही 50 सांसदों का समर्थन मिल जाएगा, प्रस्ताव चर्चा और मतदान के लिए रखा जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान उपाध्यक्ष या पैनल में वरिष्ठ सांसद कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगे।

स्पीकर को हटाने के लिए आवश्यक वोट

लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है, यानी कम से कम 272 वोट चाहिए। वर्तमान में विपक्ष के पास कुल 238 सांसद हैं, जिनमें 99 कांग्रेस के हैं और बाकी समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों के हैं। तृणमूल कांग्रेस ने अब समर्थन देने की बात कही है, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष पर्याप्त बहुमत जुटाने में असमर्थ है।

सरकार का मजबूत आंकड़ा

वर्तमान लोकसभा में सरकार का समर्थन 293 सांसदों के पास है। इसमें 240 बीजेपी, 16 जेडीयू, 12 टीडीपी और अन्य NDA दल शामिल हैं। संख्या बल के लिहाज से देखा जाए तो सरकार का समर्थन पर्याप्त है और इस कारण विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने की संभावना बहुत कम है।

विपक्ष ने लगाए आरोप

विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्पीकर कुछ मामलों में सरकार के पक्ष में फैसले लेते हैं और विपक्ष को उचित समय या अवसर नहीं दिया जाता। इसके अलावा, सांसदों की व्याख्यान और सवाल पूछने की प्रक्रिया में भी कई अड़चनें आती हैं।

बहस और कार्यवाही

यदि प्रस्ताव नोटिस के बाद सदन में पेश होता है, तो बहस का समय तय किया जाएगा। इस बहस के दौरान स्पीकर अपनी कुर्सी पर नहीं बैठेंगे और उपाध्यक्ष या पैनल में वरिष्ठ सांसद कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगे। वर्तमान में वरिष्ठ सांसद और बीजेपी सदस्य जगदंबिका पाल इस कार्यवाही को संभाल सकते हैं।

संसद में विपक्ष का रुख

विपक्ष ने पहले चरण के बजट सत्र में ही नोटिस पेश किया था, जिसमें 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए। अब तृणमूल कांग्रेस का समर्थन मिलने से विपक्ष की संख्या बढ़ गई है, लेकिन बहुमत की कमी के कारण प्रस्ताव प्रतीकात्मक ही रहेगा। विपक्ष का उद्देश्य मुख्य रूप से स्पीकर के व्यवहार पर ध्यान आकर्षित करना और सदन में मुद्दों पर बहस को सुनिश्चित करना है।

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