डॉलर के मुकाबले रुपया एक हफ्ते के उच्चतम स्तर पर, RBI के कदमों से मिला मजबूत सपोर्ट

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया एक हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। Reserve Bank of India के कदमों से करेंसी को मजबूत सपोर्ट मिला। जानें करेंसी मार्केट का

भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक हफ्ते का सबसे मजबूत स्तर छू लिया। हाल के दिनों में भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) द्वारा उठाए गए नीतिगत कदमों और वैश्विक आर्थिक संकेतों में सुधार के चलते रुपये में मजबूती देखने को मिली है।

बिजनेस न्यूज़: भारतीय रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 92.93 पर खुला और शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें लगभग 0.5 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई, जिसके बाद यह 92.7250 के स्तर तक पहुंच गया। यह 10 अप्रैल के बाद रुपये का सबसे मजबूत स्तर माना जा रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (भारतीय रिजर्व बैंक) ने सरकारी तेल कंपनियों से डॉलर की खरीद बंद करने और विदेशी मुद्रा जरूरतों के लिए विशेष क्रेडिट लाइन का उपयोग करने को कहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से डॉलर की मांग घटेगी और रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है।

RBI के कदमों का असर

मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, हाल के दिनों में Reserve Bank of India ने रुपये पर दबाव कम करने और अस्थिरता नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं-

  • सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर खरीद से रोकना
  • विदेशी मुद्रा जरूरतों के लिए विशेष क्रेडिट लाइन का उपयोग बढ़ाना
  • बैंकों की नेट ओपन फॉरेक्स पोजीशन पर सीमा तय करना
  • बैंकों द्वारा कॉरपोरेट नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) ऑफरिंग पर नियंत्रण

इन उपायों से डॉलर की अत्यधिक मांग पर अंकुश लगा है, जिससे रुपये को समर्थन मिला है।

डॉलर के मुकाबले रुपया एक हफ्ते के उच्चतम स्तर पर, RBI के कदमों से मिला मजबूत सपोर्ट

पिछले महीने की गिरावट के बाद रिकवरी

हाल ही में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को भी पार कर गया था, जो दबाव की स्थिति को दर्शाता था। हालांकि, उसके बाद इसमें लगभग 2.5 प्रतिशत की रिकवरी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि केंद्रीय बैंक की सक्रिय नीति के कारण मुद्रा बाजार में स्थिरता लौटी है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है। रुपये की मजबूती सिर्फ घरेलू नीतियों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी योगदान है।

  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में कमी की उम्मीद
  • घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुझान
  • विदेशी निवेश प्रवाह में सुधार की संभावना

इन कारकों ने भी रुपये को मजबूती प्रदान की है। वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ 98.07 के स्तर पर रहा, जो डॉलर की स्थिर स्थिति को दर्शाता है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी रुपये के लिए सकारात्मक संकेत रही। ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 1.16 प्रतिशत गिरकर 98.24 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।

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