शोधकर्ताओं ने साइलेंट आर्टिफिशियल मसल्स विकसित की हैं, जो इंसानी मांसपेशियों की तरह काम करती हैं और बिना शोर के मूवमेंट करती हैं। MIT और इटली की यूनिवर्सिटी की यह तकनीक रोबोटिक्स और वियरेबल डिवाइसेस के डिजाइन को बदल सकती है और उन्हें ज्यादा हल्का, स्मार्ट और प्राकृतिक बना सकती है।
Silent Artificial Muscles Technology: MIT मीडिया लैब और इटली की Polytechnic University के शोधकर्ताओं ने साइलेंट आर्टिफिशियल मसल्स नाम की नई तकनीक विकसित की है, जो रोबोटिक्स क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। यह तकनीक इंसानी मांसपेशियों की तरह काम करती है और बिना किसी शोर के मूवमेंट कर सकती है। इन मसल्स को रोबोट और वियरेबल डिवाइसेस में इस्तेमाल करने पर उनका डिजाइन अधिक स्मार्ट और प्राकृतिक बन सकता है, जिससे हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
साइलेंट आर्टिफिशियल मसल्स क्या हैं और क्यों खास हैं
रोबोटिक्स में एक नई तकनीक सामने आई है जिसे साइलेंट आर्टिफिशियल मसल्स कहा जा रहा है। MIT मीडिया लैब और इटली की Polytechnic University के शोधकर्ताओं ने ऐसी मांसपेशियां विकसित की हैं जो इंसानी मसल्स की तरह सिकुड़ती और फैलती हैं।
यह तकनीक रोबोट्स और वियरेबल डिवाइसेस के डिजाइन को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है। खास बात यह है कि ये मसल्स साइलेंट हैं, यानी इनके चलने पर किसी तरह का शोर नहीं होता, जिससे मशीनें ज्यादा प्राकृतिक तरीके से काम कर सकती हैं।
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कैसे काम करती हैं ये आर्टिफिशियल मसल्स
यह सिस्टम दो मौजूदा तकनीकों को जोड़कर तैयार किया गया है। एक तकनीक McKibben actuator है, जिसमें फ्लूइड दबाव के जरिए ट्यूब जैसी संरचना सिकुड़ती है। दूसरी इलेक्ट्रोहाइड्रोडायनामिक्स पर आधारित एक माइक्रो पंप तकनीक है, जो इलेक्ट्रिक फोर्स से फ्लूइड को नियंत्रित करती है।
शोधकर्ताओं ने इस छोटे पंप को सीधे मसल्स फाइबर में जोड़ दिया है, जिससे बाहरी मशीन की जरूरत खत्म हो गई है। यह संरचना इंसानी मसल्स की तरह जोड़ी में काम करती है, जहां एक हिस्सा सिकुड़ता है और दूसरा फैलता है, जिससे संतुलित मूवमेंट संभव होता है।
रोबोटिक्स में क्या बदलाव ला सकती हैं यह तकनीक
यह तकनीक रोबोट्स के डिजाइन को अधिक हल्का, कॉम्पैक्ट और ऊर्जा-कुशल बना सकती है। पारंपरिक रोबोट्स में इस्तेमाल होने वाले मोटर और गियर सिस्टम की जगह अब ये सॉफ्ट मसल्स ले सकती हैं।
इस बदलाव से रोबोट्स का मूवमेंट ज्यादा प्राकृतिक होगा और उन्हें हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग और वियरेबल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे भविष्य में ऐसे रोबोट तैयार हो सकते हैं जो इंसानों के बेहद करीब रहकर काम कर सकें।








