लखनऊ की हवा पर बड़ा दावा, लेकिन स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 15वां स्थान10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में इंदौर नंबर-1

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ 15वें स्थान पर रहा। इंदौर ने 200 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया।
लखनऊ की हवा पर बड़ा दावा, लेकिन स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 15वां स्थान10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में इंदौर नंबर-1
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को लेकर सोशल मीडिया और अलग-अलग रिपोर्टों में हवा की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर कई तरह के दावे सामने आते रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ देश में पहले स्थान पर नहीं रहा। इस श्रेणी में लखनऊ को 200 में से 179 अंक मिले और वह 15वें स्थान पर रहा। वहीं मध्य प्रदेश का इंदौर 200 अंक हासिल कर पहले स्थान पर रहा। जबलपुर 199 अंकों के साथ दूसरे और आगरा तथा सूरत 196-196 अंकों के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल किसी शहर के एक दिन या एक समय के AQI को देखकर यह तय करना नहीं है कि वहां की हवा सबसे साफ है। यह सर्वेक्षण शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों और उनके क्रियान्वयन का आकलन करता है। इसके तहत ठोस कचरा प्रबंधन, सड़क की धूल को नियंत्रित करना, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण, औद्योगिक प्रदूषण को कम करने के उपाय और वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़े दूसरे मानकों को देखा जाता है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत शहरों का मूल्यांकन किया जाता है।

लखनऊ के लिए इस बार की रैंकिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले वर्ष के मुकाबले शहर की स्थिति कमजोर हुई है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2024 में लखनऊ 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में चौथे स्थान पर था और उसे 200 में से 189 अंक मिले थे। 2025 में अंक घटकर 179 रह गए और रैंकिंग 15वें स्थान पर पहुंच गई। यानी एक साल के भीतर शहर के स्कोर में 10 अंकों की कमी आई और रैंकिंग में 11 पायदान की गिरावट दर्ज हुई।

2025 की सूची में इंदौर ने 200 में से पूरे 200 अंक हासिल कर पहला स्थान पाया। जबलपुर 199 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर रहा। आगरा और सूरत ने 196-196 अंक हासिल किए और दोनों को संयुक्त रूप से तीसरा स्थान मिला। इसके बाद नवी मुंबई 195 अंकों के साथ चौथे, कानपुर 192.2 अंकों के साथ पांचवें और भोपाल 191 अंकों के साथ छठे स्थान पर रहा। प्रयागराज 188 अंकों के साथ सातवें, चंडीगढ़ 186.6 अंकों के साथ आठवें और त्रिची 186 अंकों के साथ नौवें स्थान पर रहा।

उत्तर प्रदेश के लिहाज से देखें तो लखनऊ से बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों में आगरा, कानपुर और प्रयागराज शामिल रहे। आगरा ने 196 अंक हासिल कर देश में तीसरा स्थान पाया। कानपुर 192.2 अंकों के साथ पांचवें और प्रयागराज 188 अंकों के साथ सातवें स्थान पर रहा। वाराणसी भी 184 अंकों के साथ 11वें स्थान पर रहा। इस तरह 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने लखनऊ से बेहतर प्रदर्शन किया।

लखनऊ के प्रदर्शन में आई गिरावट के पीछे कई कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार नगर निकाय से जुड़े अधिकारियों ने वाहन प्रदूषण नियंत्रण और इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित आंकड़ों में कमी को एक कारण बताया था। इसके अलावा शहर के विस्तार वाले इलाकों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों से जुड़े मुद्दे भी मूल्यांकन में सामने आए। सर्वेक्षण के मानक केवल सड़क या चौराहे की सफाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे शहर में प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था और उसके परिणामों को भी देखा जाता है।

लखनऊ में पिछले वर्षों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कई स्तरों पर काम किया गया है। सड़क की धूल कम करने, कचरा प्रबंधन बेहतर करने, हरित क्षेत्र बढ़ाने, यातायात व्यवस्था में सुधार और प्रदूषणकारी गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। हालांकि, सर्वेक्षण के परिणाम बताते हैं कि इन प्रयासों को लगातार और ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत है। केवल कुछ इलाकों में सुधार से पूरे महानगर की रैंकिंग बेहतर नहीं हो सकती, बल्कि शहर के सभी हिस्सों में प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था मजबूत करनी होगी।

यहां यह अंतर समझना भी जरूरी है कि स्वच्छता सर्वेक्षण और स्वच्छ वायु सर्वेक्षण दो अलग-अलग मूल्यांकन हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण मुख्य रूप से शहर की सफाई, कचरा प्रबंधन, स्वच्छता सुविधाओं और नागरिक भागीदारी जैसे पहलुओं पर केंद्रित होता है। दूसरी ओर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का फोकस वायु प्रदूषण कम करने और हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए उपायों पर होता है। लखनऊ ने स्वच्छता के मोर्चे पर अलग उपलब्धियां हासिल की हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में लखनऊ को 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में देश का तीसरा सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया था।

इसी वजह से लखनऊ को लेकर कभी-कभी स्वच्छता और स्वच्छ हवा की रैंकिंग को एक ही समझ लिया जाता है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में अहमदाबाद पहले, भोपाल दूसरे और लखनऊ तीसरे स्थान पर रहा था। इसके विपरीत स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में लखनऊ 15वें स्थान पर रहा। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में लखनऊ की हवा देश में सबसे साफ है। उपलब्ध आधिकारिक सूची में इंदौर इस श्रेणी में शीर्ष पर है।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग शहरों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वायु प्रदूषण सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। शहर में सड़क पर उड़ने वाली धूल, वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन और कचरे के प्रबंधन में कमी जैसे कई कारण हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में नगर निकाय और प्रशासन के सामने केवल सफाई बनाए रखने की चुनौती नहीं होती, बल्कि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर उन्हें कम करने की भी जिम्मेदारी होती है।

लखनऊ जैसे तेजी से बढ़ते महानगर में यह चुनौती और बड़ी है। शहर का विस्तार होने के साथ वाहनों की संख्या, निर्माण गतिविधियां और यातायात का दबाव भी बढ़ता है। ऐसे में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, सड़क की धूल को नियंत्रित करना, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन कराना और औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी जरूरी हो जाती है। यदि इन क्षेत्रों में लगातार सुधार किया जाए तो आने वाले सर्वेक्षण में लखनऊ अपनी स्थिति फिर से बेहतर कर सकता है।

लखनऊ की मौजूदा रैंकिंग को शहर के लिए अंतिम स्थिति नहीं माना जा सकता। वर्ष 2024 में चौथे स्थान पर रहने के बाद 2025 में 15वें स्थान पर पहुंचना यह बताता है कि दूसरे शहरों ने भी वायु प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में तेजी से काम किया है। ऐसे में लखनऊ को अपनी पुरानी उपलब्धियों पर निर्भर रहने के बजाय नए स्तर पर काम करना होगा। शहर के लिए चुनौती केवल रैंकिंग सुधारने की नहीं, बल्कि वास्तव में प्रदूषण के स्तर को कम करने और लोगों को बेहतर हवा उपलब्ध कराने की है।

फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 का पहला स्थान इंदौर के नाम रहा है। लखनऊ 179 अंकों के साथ 15वें स्थान पर है। वहीं स्वच्छता सर्वेक्षण में लखनऊ ने देश के बड़े शहरों में तीसरा स्थान हासिल किया था। इसलिए लखनऊ की उपलब्धि को स्वच्छता के क्षेत्र में बड़ी सफलता कहा जा सकता है, लेकिन देश में सबसे साफ हवा वाला शहर कहना स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 के आंकड़ों से सही नहीं बैठता।

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