लखनऊ के गोसाईंगंज इलाके में पति की हत्या की एक खौफनाक साजिश का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, पत्नी ने अपने पति को खीर में नींद की गोलियां मिलाकर खिलाईं और उसके बेहोश होने के बाद रिश्तेदारों के साथ मिलकर ईंट से वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को बोरे में भरकर स्कूटी से ले जाया गया और बाराबंकी के सतरिख क्षेत्र स्थित सिकंदरपुर माइनर में फेंक दिया गया। पुलिस ने मामले में पत्नी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मृतक की पहचान गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के मीसा गांव निवासी रामतीरथ रावत के रूप में हुई है। पुलिस को 5 जुलाई को सतरिख थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर माइनर में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। बाद में जांच के दौरान शव की पहचान रामतीरथ के रूप में हुई। इसके बाद मृतक के पिता की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
शुरुआत में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान और हत्या की वजह का पता लगाना था। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने मृतक के परिवार और उसके आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई। इसी दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनसे हत्या के पीछे साजिश की आशंका मजबूत हुई। पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि रामतीरथ की पत्नी रामदुलारी ने वारदात से पहले उसके खाने में नींद की गोलियां मिला दी थीं। खीर खाने के बाद जब रामतीरथ गहरी नींद में चला गया तो कथित तौर पर उसके सहयोगियों ने उस पर हमला किया। पुलिस का कहना है कि ईंट से उसके चेहरे पर कई वार किए गए और बाद में शव को ठिकाने लगाने की योजना को अंजाम दिया गया।
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को बोरे में रखा। इसके बाद उसे मृतक की ही स्कूटी से ले जाकर नहर में फेंक दिया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का उद्देश्य शव को ऐसी जगह ठिकाने लगाना था, जिससे हत्या का सुराग आसानी से न मिल सके। लेकिन नहर से शव बरामद होने के बाद पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कर दीं।
जांच में पुलिस ने मृतक की पत्नी के अलावा उसके रिश्तेदारों की भूमिका की भी पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक, पत्नी रामदुलारी, चचेरे भाई सरफजीत और सगे भाई अवधेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की गई है। तीनों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात से जुड़े कई सामान भी बरामद किए हैं। इनमें हत्या में इस्तेमाल किए गए ईंट के टुकड़े, खून से सना स्टोल, तकिया, प्लास्टिक की बोरी और घटना में इस्तेमाल की गई स्कूटी शामिल बताई गई है। इन सामानों को जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
मामले की जांच में यह भी महत्वपूर्ण है कि शव को नहर तक कैसे पहुंचाया गया और हत्या के बाद आरोपियों ने किस तरह सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस बरामद सामान और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का मिलान कर रही है। इससे हत्या के घटनाक्रम और आरोपियों की भूमिका को और स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
पुलिस की जांच में हत्या के पीछे पारिवारिक और निजी विवाद से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है। किसी भी हत्या के मामले में आरोपी की ओर से बताई गई वजह और वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों से करना जरूरी होता है। इसलिए पुलिस पूछताछ के साथ मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बना रही है।
रामतीरथ की हत्या के बाद शव को दूसरी जगह फेंकने की कोशिश ने मामले को और गंभीर बना दिया। यदि शव की पहचान जल्दी नहीं हो पाती तो जांच और मुश्किल हो सकती थी। लेकिन पुलिस ने शव की पहचान होने के बाद मृतक के परिवार और उसके परिचितों के बारे में जानकारी जुटाकर जांच को आगे बढ़ाया।
पुलिस ने मामले में घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के लिए आरोपियों से पूछताछ की। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की गई कि हत्या की योजना कब बनी, इसमें कौन-कौन शामिल था और वारदात के बाद शव को नहर तक ले जाने की पूरी प्रक्रिया क्या थी।
इस मामले में नहर से शव मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर भी सनसनी फैल गई थी। अज्ञात शव की पहचान होने के बाद जांच का दायरा मृतक के घर और परिचितों तक पहुंचा। पुलिस को यहीं से हत्या की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण सुराग मिले।
मामले में पुलिस की कार्रवाई यह भी बताती है कि हत्या के बाद शव को छिपाने की कोशिश हमेशा जांच से बचने में सफल नहीं होती। घटनास्थल से मिले छोटे-छोटे साक्ष्य, मोबाइल और वाहन से जुड़ी जानकारी तथा आरोपियों के बयान को जोड़कर पुलिस पूरे घटनाक्रम तक पहुंच सकती है।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि हत्या से पहले मृतक और आरोपियों के बीच किस तरह के संबंध थे। परिवार के लोगों और परिचितों से पूछताछ के जरिए घटना से पहले के विवाद या तनाव की जानकारी जुटाई जा सकती है। इससे हत्या की वजह और साजिश की पृष्ठभूमि को समझने में मदद मिलेगी।
घटना में नींद की गोलियों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मेडिकल और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मृतक के शरीर पर किस तरह की चोटें थीं और मौत किन परिस्थितियों में हुई। इसके बाद पुलिस इन निष्कर्षों को आरोपियों के बयानों और बरामद साक्ष्यों से मिलाएगी।
हत्या में ईंट का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आने के बाद बरामद ईंट के टुकड़े भी जांच के लिए अहम हैं। पुलिस इनसे जुड़े फॉरेंसिक साक्ष्यों को केस की बाकी जानकारी के साथ जोड़ सकती है। खून से सना कपड़ा और अन्य सामान भी घटनाक्रम की पुष्टि में उपयोगी हो सकते हैं।
मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उनकी भूमिका अलग-अलग स्तर पर स्पष्ट करने में जुटी है। किस आरोपी ने क्या भूमिका निभाई और हत्या के बाद शव ठिकाने लगाने में कौन शामिल था, इसकी जानकारी जांच में सामने आने की उम्मीद है।
इस वारदात ने पति-पत्नी के रिश्ते और पारिवारिक विवाद के एक खतरनाक रूप को सामने रखा है। हालांकि हत्या की वास्तविक वजह और पूरी साजिश के बारे में अंतिम निष्कर्ष पुलिस की विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। अभी सामने आई जानकारी पुलिस जांच और पूछताछ पर आधारित है।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बरामद सामान और अन्य साक्ष्यों को केस में शामिल किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगी कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरी घटना की कड़ियां अदालत के सामने स्पष्ट रूप से रखी जा सकें।
कुल मिलाकर, लखनऊ के गोसाईंगंज क्षेत्र के रामतीरथ रावत हत्याकांड में पुलिस ने पत्नी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कथित साजिश का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, पति को खीर में नींद की गोलियां देकर बेहोश किया गया और उसके बाद ईंट से वार कर हत्या की गई। शव को बोरे में भरकर स्कूटी से बाराबंकी के सिकंदरपुर माइनर में फेंक दिया गया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर ईंट के टुकड़े, खून से सना सामान, बोरी और स्कूटी समेत कई साक्ष्य बरामद किए हैं।











