लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बार-बार क्यों धंस रहा? IIT खड़गपुर को मिली लैब रिपोर्ट में ड्रेनेज समस्या का खुलासा

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के धंसने की शुरुआती लैब रिपोर्ट में ड्रेनेज समस्या सामने आई है। IIT खड़गपुर की समग्र रिपोर्ट के बाद सुधारात्मक कार्य होंगे।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के बार-बार धंसने की शुरुआती जांच रिपोर्ट IIT खड़गपुर को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में ड्रेनेज समस्या सामने आई है। समग्र रिपोर्ट के बाद सुधारात्मक कार्य कराए जाएंगे और इसके बाद एक्सप्रेसवे को सभी वाहनों के लिए खोला जाएगा।

लखनऊ: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के बार-बार धंसने की वजह जानने के लिए लिए गए सड़क के नमूनों की प्रारंभिक लैब रिपोर्ट IIT खड़गपुर को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में ड्रेनेज से जुड़ी समस्या सामने आई है। अब प्रोफेसर केएस रेड्डी और उनकी टीम रिपोर्ट का विश्लेषण करेगी, जिसके आधार पर NHAI कार्यदायी संस्था PNC से सुधारात्मक कार्य कराएगा।

नमूनों की जांच के बाद सामने आई ड्रेनेज की समस्या

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क धंसने की घटनाओं के बाद अगस्त की शुरुआत में NHAI और IIT खड़गपुर की टीम ने प्रभावित स्थानों का निरीक्षण किया था। टीम ने बार-बार धंस रही सड़क के हिस्सों से नमूने लिए और उनकी वीडियोग्राफी भी कराई थी। इन नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया था।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बार-बार क्यों धंस रहा? IIT खड़गपुर को मिली लैब रिपोर्ट में ड्रेनेज समस्या का खुलासा

अब लैब ने जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट IIT खड़गपुर को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में एक्सप्रेसवे के ड्रेनेज सिस्टम से जुड़ी समस्या सामने आई है। हालांकि अभी IIT खड़गपुर की ओर से समग्र रिपोर्ट आना बाकी है। इसके बाद प्रोफेसर केएस रेड्डी और उनकी टीम रिपोर्ट का विस्तृत विश्लेषण कर सुधार के लिए सुझाव देगी।

कई हिस्सों में फिर डाली जा सकती है डामर की परत

प्रारंभिक निष्कर्षों के आधार पर एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में दोबारा डामर की परत बिछाने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों पर करीब 50 एमएम तक डामर की अतिरिक्त परत डाली जा सकती है।

NHAI का कहना है कि प्रोफेसर केएस रेड्डी के सुझावों के आधार पर एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने का काम पहले ही किया जा चुका है। अब IIT की समग्र रिपोर्ट और उसके सुझावों के आधार पर बाकी सुधारात्मक कार्य कराए जाएंगे।

इस दौरान कार्यदायी संस्था PNC की टीम को विशेष रूप से अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं। एक्सप्रेसवे की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि दोबारा सड़क धंसने जैसी स्थिति सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक

बरसात के दौरान एक्सप्रेसवे पर दबाव कम करने के लिए भारी वाहनों की आवाजाही पर भी रोक लगाई गई है। लखनऊ की ओर दारोगा खेड़ा के पास एलिवेटेड रोड पर भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए NHAI ने टोल प्रवेश द्वार पर बैरिकेडिंग की है। इसी तरह उन्नाव और कानपुर के टोल पर भी बैरियर लगाए गए हैं।

एक्सप्रेसवे पर टोल शुरू नहीं होने के कारण वाहनों की संख्या बढ़ गई थी। इसी वजह से भारी वाहनों के दबाव को कम करने की कवायद की गई है। नवाबगंज टोल संचालक ने भी वाहनों की बढ़ती संख्या को लेकर NHAI को पत्र लिखकर विरोध जताया था।

सुधार के बाद शुरू होगा ट्रकों का संचालन और टोल

NHAI के मुख्य महाप्रबंधक (तकनीकी) सह क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल के अनुसार, IIT खड़गपुर की रिपोर्ट के आधार पर आगे की दिशा तय की जाएगी। सुधारात्मक कार्य पूरे होने के बाद ट्रकों का संचालन शुरू किया जाएगा और टोल वसूली भी शुरू होगी।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 63 किलोमीटर है। करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना की आधारशिला 5 जनवरी 2022 को रखी गई थी। एक्सप्रेसवे पर वाहनों की निगरानी के लिए आधुनिक कैमरे, वीडियो इमेज डिटेक्शन सिस्टम और पैन-टिल्ट-जूम कैमरे लगाए गए हैं। परियोजना में ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है।

एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की घटनाओं के बाद अब इसकी निर्माण गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था और सड़क की मजबूती को लेकर IIT खड़गपुर की विस्तृत रिपोर्ट अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट के सुझावों के आधार पर होने वाले सुधारात्मक कार्यों के बाद ही एक्सप्रेसवे को पूरी तरह सामान्य यातायात के लिए खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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