लखनऊ में खुलेगा यूपी का पहला वन रेंजर प्रशिक्षण केंद्र, 18 माह की ट्रेनिंग में आधुनिक तकनीकों पर जोर

लखनऊ में यूपी का पहला वन रेंजर प्रशिक्षण केंद्र विकसित होगा। यहां 18 माह की ट्रेनिंग में वानिकी, वन्यजीव प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों पर जोर रहेगा।

उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ में प्रदेश का पहला वन रेंजर प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने की तैयारी कर रही है। केंद्र बनने के बाद रेंजरों को प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों में नहीं भेजना पड़ेगा। यहां 18 माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार राजधानी लखनऊ में प्रदेश का पहला वन रेंजर प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित केंद्र बनने के बाद राज्य के वन रेंजरों को ट्रेनिंग के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यहां कक्षा प्रशिक्षण के साथ फील्ड एक्सरसाइज, प्रायोगिक प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण के जरिए रेंजरों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

अलीगंज परिसर में बन सकता है प्रशिक्षण केंद्र

प्रदेश में अभी वन रेंजरों को प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों की वन अकादमियों और प्रशिक्षण संस्थानों में भेजना पड़ता है। नए केंद्र के शुरू होने के बाद यह निर्भरता खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षण की सुविधा विकसित होने से अन्य राज्यों के वन कर्मचारियों को भी यहां ट्रेनिंग दी जा सकेगी।

प्रस्तावित वन रेंजर प्रशिक्षण केंद्र उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंध अकादमी (उपाम) के अलीगंज परिसर में विकसित किया जा सकता है। सरकार की इस पहल से प्रदेश में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर एक संस्थागत व्यवस्था तैयार होगी।

18 माह का होगा प्रशिक्षण

देश में वन रेंज अधिकारियों का प्रशिक्षण केंद्र और राज्य सरकारों की वन अकादमियों तथा वन प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से कराया जाता है। राज्य संचालित वन अकादमियों और प्रशिक्षण संस्थानों में फॉरेस्ट रेंज अफसरों के लिए 18 माह का प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है।

वर्तमान में यह प्रशिक्षण उत्तराखंड वन प्रशिक्षण अकादमी, हल्द्वानी; तमिलनाडु वन अकादमी, कोयंबटूर; हिमाचल प्रदेश वन अकादमी, सुंदरनगर; तेलंगाना राज्य वन अकादमी, हैदराबाद; कर्नाटक वन अकादमी, धारवाड़; गुजरात फॉरेस्ट रेंजर्स कॉलेज, राजपीपला; ओडिशा फॉरेस्ट रेंजर्स कॉलेज, अंगुल; तथा महाराष्ट्र की चंद्रपुर और कुंडल स्थित वन अकादमियों में हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में अभी फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, कानपुर में वन रक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। वन रेंजरों के लिए प्रदेश में अलग प्रशिक्षण केंद्र की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

वानिकी और वन्यजीव प्रबंधन की मिलेगी ट्रेनिंग

प्रस्तावित केंद्र में वन रेंजरों को केवल कक्षा आधारित प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें प्रायोगिक प्रशिक्षण, फील्ड एक्सरसाइज, विभिन्न योग्यता मॉड्यूल और व्यापक अध्ययन भ्रमण भी कराया जाएगा। इससे प्रशिक्षण के दौरान रेंजरों को मैदानी परिस्थितियों में काम करने की व्यावहारिक जानकारी मिल सकेगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में वानिकी, जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन, मृदा एवं जल संरक्षण और वन प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा जंगलों और मैदानी क्षेत्रों में आने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक तकनीकों और कार्यप्रणाली की जानकारी भी दी जाएगी।

दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम

नए प्रशिक्षण केंद्र के विकसित होने से उत्तर प्रदेश के वन रेंजरों को ट्रेनिंग के लिए दूसरे राज्यों में भेजने की जरूरत कम होगी। इससे राज्य में ही प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और वन विभाग के अधिकारियों को प्रदेश की भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण देने में भी मदद मिलेगी।

साथ ही, केंद्र की क्षमता के अनुसार भविष्य में दूसरे राज्यों के वन कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। इससे लखनऊ में वन प्रशिक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र विकसित होने की संभावना है।

Leave a comment