हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में चल रही प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा के दौरान पंजाब और हरियाणा से आए दो श्रद्धालुओं की मौत से माहौल गमगीन हो गया। यात्रा के दौरान एक श्रद्धालु की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद मौत हुई, जबकि दूसरे श्रद्धालु की लंगर सेवा के दौरान जान चली गई। दोनों घटनाओं के बाद शवों को भरमौर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई। हादसों की जानकारी सामने आने के बाद यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीरता बढ़ गई है।
मणिमहेश यात्रा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में आयोजित होने वाली प्रमुख धार्मिक यात्राओं में शामिल है। जिला प्रशासन के अनुसार वर्ष 2026 की आधिकारिक यात्रा 4 सितंबर से 19 सितंबर तक निर्धारित है। मणिमहेश झील समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। हड़सर से मणिमहेश तक करीब 13 किलोमीटर का पैदल मार्ग है, जबकि रास्ते में धनछो जैसे पड़ाव आते हैं।
पहली घटना में हरियाणा के अंबाला निवासी 56 वर्षीय मनमोहन लाल की मौत की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक वह अपने चार दोस्तों के साथ मणिमहेश यात्रा पर पहुंचे थे। पांच दोस्तों का यह समूह भरमौर से हेलिकॉप्टर के जरिए गौरीकुंड पहुंचा था। इसके बाद सभी पैदल डल झील की ओर गए। रात में कैलाश पर्वत के दर्शन करने के बाद श्रद्धालु टेंट में आराम करने चले गए। इसी दौरान मनमोहन लाल की अचानक तबीयत खराब हो गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी और सांस फूलने लगी। दोस्तों के उपचार के लिए स्वास्थ्य शिविर तक ले जाने से पहले ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में हृदय गति रुकने की आशंका जताई है।
रिपोर्ट के अनुसार मृतक को पहले से हृदय संबंधी परेशानी थी और उन्हें स्टेंट भी पड़ा हुआ था। ऐसे में ऊंचाई वाले क्षेत्र में अचानक तबीयत बिगड़ना उनकी मौत की एक संभावित वजह मानी जा रही है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद उसे साथ आए दोस्तों को सौंप दिया। इसके बाद शव को भरमौर लाने की प्रक्रिया पूरी की गई। मामले में मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर ही मानी जाएगी।
दूसरी घटना पंजाब से आए श्रद्धालु से जुड़ी बताई जा रही है। वह मणिमहेश यात्रा के दौरान लंगर सेवा में जुटे हुए थे। इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं, वहीं कई श्रद्धालु और धार्मिक संगठन लंगर लगाकर सेवा भी करते हैं। इस दौरान भोजन तैयार करने, श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराने और अन्य सेवा कार्यों में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। इसी सेवा के दौरान पंजाब के श्रद्धालु की मौत होने से उनके साथियों और लंगर सेवा से जुड़े लोगों में भी शोक का माहौल है।
दोनों घटनाओं के बाद शवों को भरमौर लाने की कार्रवाई की जा रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्र से शवों को नीचे लाना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में चुनौतीपूर्ण होता है। इसी वजह से यात्रा मार्ग पर प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और रेस्क्यू टीमों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। मणिमहेश यात्रा के दौरान प्रशासन ने पहले ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई व्यवस्थाएं लागू की हैं।
मणिमहेश झील तक पहुंचने वाला रास्ता पहाड़ी और ऊंचाई वाला है। यहां मौसम तेजी से बदल सकता है और कम तापमान, ऑक्सीजन की कमी, थकान तथा पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं श्रद्धालुओं के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं। इसी कारण प्रशासन की ओर से यात्रा से पहले पंजीकरण और आवश्यक तैयारियों पर जोर दिया गया है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले पंजीकरण कराने और पंजीकरण की रसीद साथ रखने की जानकारी दी गई है।
यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी घटनाएं सामने आना नया नहीं है। 4 सितंबर को भी मणिमहेश यात्रा के दौरान चार श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई थी। इनमें दो को एंबुलेंस और दो को हेली टैक्सी के जरिए उपचार के लिए सिविल अस्पताल भरमौर पहुंचाया गया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऊंचाई वाले यात्रा मार्ग पर मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए स्वास्थ्य और रेस्क्यू व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है।
प्रशासन ने इस बार यात्रा को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए यात्रा मार्ग पर आवाजाही तथा लंगर संचालन को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हड़सर से डल झील के बीच शाम 7 बजे के बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक जैसे निर्देश सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। लंगर संचालकों के लिए भी प्रशासन की ओर से नियम तय किए गए हैं, ताकि यात्रा के दौरान स्वच्छता और व्यवस्था बनी रहे।
मणिमहेश यात्रा में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों से श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना जारी रहता है। प्रशासन के मुताबिक यात्रा के लिए अलग-अलग चरणों में पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, जबकि बुजुर्ग और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोग हेली टैक्सी की सुविधा का भी इस्तेमाल करते हैं। अगस्त में भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पैदल और हेली टैक्सी के माध्यम से यात्रा की थी।
ऊंचाई वाले धार्मिक स्थलों की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बेहद जरूरी मानी जाती है। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से हृदय, सांस या रक्तचाप जैसी समस्या है, उन्हें यात्रा से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। मणिमहेश झील की ऊंचाई करीब 13 हजार फीट है, इसलिए सामान्य मैदानी इलाकों की तुलना में यहां शरीर को वातावरण के अनुकूल होने में परेशानी हो सकती है। यात्रा के दौरान सांस फूलना, सीने में दर्द, अत्यधिक थकान या अचानक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
मनमोहन लाल की मौत की घटना में पहले से हृदय संबंधी बीमारी होने की बात सामने आई है। इसलिए यह घटना दूसरे श्रद्धालुओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी की तरह है कि ऊंचाई वाले धार्मिक स्थलों की यात्रा केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य से भी जुड़ी होती है। प्रशासन की ओर से उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का समय पर इस्तेमाल करना और गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत रेस्क्यू सहायता लेना जरूरी है।
दूसरी ओर, लंगर सेवा के दौरान श्रद्धालु की मौत की घटना ने सेवा कार्य में जुटे लोगों को भी झकझोर दिया है। मणिमहेश यात्रा के दौरान पंजाब और अन्य राज्यों से आने वाली लंगर समितियां श्रद्धालुओं के लिए भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। इन समितियों में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक सेवा करते हैं। प्रशासन की ओर से लंगर संचालन के लिए नियम और सुरक्षा व्यवस्था तय किए जाने का एक उद्देश्य भीड़ और सेवा गतिविधियों को व्यवस्थित रखना है।
दो श्रद्धालुओं की मौत की घटनाओं के बाद अब प्रशासन और यात्रा व्यवस्था से जुड़े विभागों के सामने यह चुनौती भी है कि शेष यात्रा अवधि में मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की व्यवस्था लगातार मजबूत रखी जाए। यात्रा अभी 19 सितंबर तक चलनी है, इसलिए आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के भरमौर और मणिमहेश पहुंचने की संभावना है। जिला प्रशासन की ओर से यात्रा पंजीकरण और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया गया है।
फिलहाल दोनों श्रद्धालुओं की मौत से उनके परिवारों और साथ आए लोगों में शोक का माहौल है। एक श्रद्धालु की मौत की प्रारंभिक वजह हृदय गति रुकना बताई गई है, जबकि दूसरे की मौत लंगर सेवा के दौरान हुई। दोनों मामलों में शवों को भरमौर लाने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस और प्रशासन की ओर से आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की जा रही है। मौत के कारणों से जुड़े अंतिम तथ्य संबंधित मेडिकल जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे।
मणिमहेश यात्रा आस्था और कठिन पहाड़ी यात्रा का संगम है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन के निर्देशों का पालन करना, निर्धारित मार्ग से ही यात्रा करना, मौसम और स्वास्थ्य की स्थिति पर लगातार नजर रखना तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता लेना बेहद जरूरी है। इस बीच पंजाब और हरियाणा के दो श्रद्धालुओं की मौत ने यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सभी का ध्यान खींचा है।









