झारखंड के गिरिडीह में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर थाना में तैनात एक दारोगा को कथित तौर पर 30 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई की खबर सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारी के खिलाफ ACB की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल आरोपी दारोगा को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि ACB को दारोगा के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत मिली थी। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच और शिकायत की सत्यता की पुष्टि की गई। इसके बाद ACB की टीम ने जाल बिछाया और निर्धारित रकम के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही कथित तौर पर 30 हजार रुपए की रिश्वत की रकम दारोगा ने स्वीकार की, टीम ने उसे पकड़ लिया। रंगेहाथ गिरफ्तारी के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई और पुलिस विभाग में मामले की जानकारी तेजी से फैल गई।
गिरिडीह में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। हाल ही में गिरिडीह पुलिस ने धनबाद के एक कथित साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया था, जो ठगी की रकम लेने के लिए जिले में आने वाला था। उसके पास से मोबाइल, दो सिम, दो एटीएम कार्ड और 20 हजार रुपए नकद बरामद किए गए थे। इस मामले में साइबर थाना में केस भी दर्ज किया गया था।
ऐसे समय में साइबर थाना के ही एक दारोगा की ACB द्वारा गिरफ्तारी पुलिस महकमे के लिए गंभीर मामला मानी जा रही है। साइबर थाना का काम ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड, फर्जी बैंक खातों और इंटरनेट के जरिए होने वाले अपराधों की जांच करना है। गिरिडीह पुलिस पहले भी साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाती रही है। झारखंड पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी गिरिडीह साइबर थाना पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी और उनके पास से मोबाइल व सिम कार्ड बरामद किए जाने की कार्रवाई दर्ज है।
ACB की कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गिरफ्तारी कथित रिश्वत की रकम के साथ रंगेहाथ की गई। ऐसे मामलों में जांच एजेंसी शिकायत, ट्रैप की पूरी प्रक्रिया, रकम की बरामदगी और आरोपी की भूमिका से जुड़े साक्ष्यों को रिकॉर्ड करती है। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित कानूनी धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जाती है। मामले की विस्तृत जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि रिश्वत की रकम किस काम के बदले मांगी गई थी और शिकायतकर्ता से आरोपी का संपर्क किस संदर्भ में हुआ था।
गिरिडीह में ACB की यह कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिले में पहले भी भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई हो चुकी है। अप्रैल 2026 में धनवार क्षेत्र में ACB ने मनरेगा के एक जूनियर इंजीनियर को 5 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। इससे स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर ACB की नजर जिले के अलग-अलग विभागों और सरकारी कार्यालयों पर बनी हुई है।
पुलिस विभाग में तैनात किसी अधिकारी के खिलाफ रिश्वत लेने की कार्रवाई आम लोगों के बीच भी गंभीर संदेश देती है। पुलिस से जुड़े मामलों में शिकायतकर्ता अक्सर अपनी समस्या के समाधान और कानूनी कार्रवाई के लिए जांच अधिकारियों पर निर्भर रहता है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगता है तो इससे पूरे विभाग की छवि प्रभावित होती है। यही वजह है कि भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों को गंभीरता से लेती हैं।
फिलहाल यह जांच का विषय है कि दारोगा ने कथित तौर पर किस मामले में 30 हजार रुपए की मांग की थी। ACB की पूछताछ के दौरान इस संबंध में जानकारी सामने आ सकती है। जांच एजेंसी आरोपी के मोबाइल फोन, संपर्कों और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल कर सकती है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके संबंध में भी कार्रवाई की संभावना रहेगी।
गिरिडीह में साइबर अपराध से जुड़े मामलों का दबाव पहले से काफी है। जिले में साइबर ठगी के अलग-अलग मामलों में पुलिस लगातार कार्रवाई करती रही है। जून 2026 में बेंगाबाद थाना क्षेत्र के बिराजपुर जंगल में साइबर थाना की टीम ने कथित तौर पर फर्जी लोन और ई-चालान APK के जरिए ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस कार्रवाई में आठ मोबाइल फोन और सात सिम कार्ड बरामद होने की जानकारी दी गई थी।
इसके अलावा सितंबर की शुरुआत में गिरिडीह पुलिस ने फर्जी बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम मंगाने वाले नेटवर्क से जुड़े एक कथित आरोपी को भी गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक उसके पास से मोबाइल, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, पहचान संबंधी दस्तावेज और 20 हजार रुपए नकद बरामद किए गए थे। ऐसे मामलों की जांच करने वाली पुलिस इकाई के किसी अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप सामने आना इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है।
ACB की कार्रवाई के बाद अब विभागीय स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिए जाने की संभावना है। आमतौर पर किसी पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला संबंधित पुलिस अधिकारियों और जांच की स्थिति के आधार पर होगा। आरोपी के खिलाफ अदालत में मामला आगे बढ़ेगा और कानूनी प्रक्रिया के दौरान आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर होगी।
रिश्वतखोरी के मामलों में यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ आरोप लगना और अदालत में आरोप साबित होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए फिलहाल दारोगा के खिलाफ लगे आरोपों को जांच के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए। ACB की कार्रवाई में गिरफ्तारी होने के बावजूद मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
घटना के बाद गिरिडीह पुलिस महकमे में चर्चा तेज है। खासकर साइबर थाना जैसे संवेदनशील विभाग में तैनात अधिकारी के खिलाफ ACB की कार्रवाई को विभाग के लिए झटका माना जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में रिश्वत की मांग और उसके पीछे के कथित कारणों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में किसी अन्य पुलिसकर्मी या व्यक्ति की भूमिका भी सामने आती है।
फिलहाल ACB की कार्रवाई ने यह स्पष्ट किया है कि सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत लेने के आरोपों पर जांच एजेंसी कार्रवाई कर सकती है, चाहे आरोपी किसी भी विभाग में तैनात क्यों न हो। गिरिडीह में 30 हजार रुपए की कथित रिश्वत के मामले में दारोगा की गिरफ्तारी के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिश्वत किस काम के लिए मांगी गई थी और इस मामले में आगे कितने लोगों तक जांच की कड़ी पहुंचती है।










