मणिपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। RIMS इम्फाल को AIIMS का दर्जा देने और सेनापति में नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के प्रस्ताव पर केंद्र ने सकारात्मक रुख दिखाया है। इससे विशेषज्ञ इलाज और शिक्षा मजबूत होगी।
इम्फाल: मणिपुर के स्वास्थ्य क्षेत्र में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार ने क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं और मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने रखे हैं। इनमें इम्फाल स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी RIMS को AIIMS के स्तर के संस्थान के रूप में विकसित करना और सेनापति जिले में नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करना शामिल है।
इन प्रस्तावों को लेकर सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के बीच बैठक हुई। मुख्यमंत्री सचिवालय के अनुसार, नड्डा ने RIMS को AIIMS का दर्जा देने के प्रस्ताव पर सहमति जताई और सेनापति में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना को भी सिद्धांत रूप में मंजूरी दी।
RIMS के AIIMS स्तर पर पहुंचने से क्या बदलेगा
इम्फाल स्थित RIMS पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। वर्ष 1972 में स्थापित इस संस्थान में मणिपुर के अलावा आसपास के राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
यदि RIMS को AIIMS का दर्जा या समकक्ष संस्थागत विस्तार मिलता है, तो यहां विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण और चिकित्सा अनुसंधान की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
इससे राज्य के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों के बड़े चिकित्सा संस्थानों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और अनुसंधान के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए संस्थागत, प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों के बीच आगे की प्रक्रिया तय होने के बाद ही योजना का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट होगा।
सेनापति में मेडिकल कॉलेज से पहाड़ी जिलों को फायदा
दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव सेनापति जिले में नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने से जुड़ा है। इसका उद्देश्य मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल शिक्षा की पहुंच बढ़ाना है।
सेनापति और आसपास के पहाड़ी इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता अपेक्षाकृत सीमित रही है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज बनने से स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों के प्रशिक्षण का आधार भी तैयार होगा।
नया संस्थान बनने के बाद गंभीर बीमारी या विशेषज्ञ इलाज के लिए मरीजों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे उपचार की लागत और समय दोनों में कमी आने की संभावना है।
अमित शाह की बैठक के बाद प्रस्ताव को मिली गति
सेनापति मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव पहले भी केंद्र के सामने रखा जा चुका था। 26 अगस्त को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच हुई बैठक में इस परियोजना को लेकर चर्चा हुई थी।
राज्य सरकार के अनुसार, अमित शाह ने सेनापति मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखने पर सहमति जताई थी। उनका अक्टूबर के पहले सप्ताह में मणिपुर दौरा प्रस्तावित बताया गया है। इस दौरान परियोजना की आधारशिला रखे जाने की संभावना जताई गई है।
अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की ओर से सिद्धांत रूप में समर्थन मिलने के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
RIMS को लेकर पहले क्या स्थिति थी
RIMS को AIIMS में अपग्रेड करने का मुद्दा पूरी तरह नया नहीं है। इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से यह कहा गया था कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के उस समय लागू चरण के तहत मणिपुर में एक और AIIMS स्थापित करने का कोई प्रस्ताव नहीं था।
साथ ही, AIIMS अधिनियम के तहत किसी मौजूदा संस्थान जैसे RIMS को सीधे AIIMS में बदलने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
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ऐसे में वर्तमान में सामने आई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की सहमति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, केवल राजनीतिक या प्रशासनिक सहमति के बाद संस्थान का दर्जा तत्काल नहीं बदलता। इसके लिए केंद्र सरकार को आवश्यक औपचारिकताओं, संस्थागत ढांचे और संबंधित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी।
मणिपुर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की कोशिश
राज्य में लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जाती रही है। खासकर पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधुनिक अस्पतालों और उच्च स्तरीय जांच सुविधाओं तक पहुंच एक चुनौती बनी हुई है।
RIMS के विस्तार और सेनापति में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना से राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को दो अलग स्तरों पर मजबूती मिल सकती है। एक तरफ इम्फाल में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ उपचार की क्षमता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का नया केंद्र विकसित होगा।
इन परियोजनाओं से राज्य में मेडिकल प्रोफेशनल्स की संख्या बढ़ाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने में भी मदद मिल सकती है।
मरीजों को दूसरे राज्यों की ओर जाने की जरूरत घट सकती है
मणिपुर के कई मरीज गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए राज्य के बाहर के बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख करते हैं। विशेष उपचार, जटिल सर्जरी और उच्च स्तरीय जांच की जरूरत होने पर मरीजों और उनके परिवारों को लंबी यात्रा करनी पड़ती है।
RIMS की विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूत करने और सेनापति में नए मेडिकल कॉलेज के विकास से ऐसी जरूरतों को स्थानीय स्तर पर पूरा करने की क्षमता बढ़ सकती है।
विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ अगर पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, तो मणिपुर के स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
केंद्र से मिले सकारात्मक संकेत के बाद अब राज्य सरकार की नजर आगे की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया पर होगी। दोनों परियोजनाओं के लिए विस्तृत योजना, संस्थागत ढांचा, वित्तीय व्यवस्था और अन्य जरूरी मंजूरियां महत्वपूर्ण होंगी।
RIMS के मामले में AIIMS स्तर का दर्जा देने की प्रक्रिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट संस्थागत और कानूनी व्यवस्था जरूरी होगी।
वहीं, सेनापति मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन, निर्माण, मानव संसाधन, मेडिकल शिक्षा से जुड़ी आवश्यकताएं और अस्पताल की क्षमता जैसे मुद्दों पर काम करना होगा।
अगर दोनों प्रस्ताव निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ते हैं, तो मणिपुर में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं, विशेषज्ञ चिकित्सा प्रशिक्षण, अनुसंधान और मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार संभव है। इससे खासकर पहाड़ी जिलों के लोगों को बेहतर और अधिक सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।









