मार्च 2026 में भारत की आर्थिक गति धीमी, PMI 56.5 पर गिरा; मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर प्रभावित

मार्च में भारत की आर्थिक गतिविधियां धीमी रफ्तार पर, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर पर असर, मांग घटा, लागत बढ़ी, रोजगार में कुछ मजबूती दिखी।

मार्च 2026 में भारत की आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार साढ़े तीन साल के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गई। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में गिरावट, बढ़ती लागत और कमजोर घरेलू मांग से उत्पादन धीमा हुआ, जबकि रोजगार और निर्यात में कुछ मजबूती रही।

India Economy: मार्च 2026 में भारत की आर्थिक गतिविधियों की गति पिछले साढ़े तीन साल के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, ऊर्जा संकट और बढ़ती लागत ने देश के निजी क्षेत्र को प्रभावित किया है। हालांकि रोजगार और निर्यात में कुछ मजबूती दिखाई दी है। S&P Global के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारत का फ्लैश कंपोजिट पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) 56.5 पर आया, जो फरवरी में 58.9 था। यह अक्टूबर 2022 के बाद का सबसे कम स्तर है।

सर्विस सेक्टर पर असर

मार्च में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का फ्लैश PMI 53.8 पर गिर गया, जो फरवरी में 56.9 था। यह लगभग साढ़े चार साल का सबसे निचला स्तर है। सर्विस सेक्टर का PMI भी घटकर 57.2 पर पहुंच गया, जो फरवरी में 58.1 था। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव और महंगाई के दबाव ने उत्पादन और सेवाओं दोनों पर असर डाला है।

मांग और नए ऑर्डर में गिरावट

कंपनियों ने बताया कि घरेलू मांग कमजोर होने के कारण नए ऑर्डर में वृद्धि धीमी रही। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए ऑर्डर अगस्त 2021 के बाद सबसे धीमी गति से बढ़े। सर्विस सेक्टर में भी बिक्री की वृद्धि कमजोर रही, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार से ऑर्डर में तेजी आई, जिससे निर्यात में मजबूती बनी रही।

बढ़ती लागत का दबाव

मार्च में कंपनियों की इनपुट कॉस्ट में तेज वृद्धि देखी गई। एल्यूमिनियम, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऊर्जा, खाद्य पदार्थ, आयरन ओर, लेदर, तेल, रबर और स्टील जैसी वस्तुओं की कीमतों में उछाल इसका मुख्य कारण रहा। कंपनियां पूरी लागत ग्राहकों पर नहीं डाल रही हैं, जिससे मुनाफे पर असर पड़ा है। इसके बावजूद उत्पाद और सेवाओं की कीमतों में सात महीने की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रोजगार सृजन में मजबूती

अच्छी खबर यह है कि मार्च में कंपनियों ने तेजी से भर्ती की। रोजगार सृजन अगस्त 2025 के बाद सबसे तेज रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उम्मीद, लंबित ऑर्डर और नए काम मिलने की संभावना के चलते हुआ। इससे पता चलता है कि बाजार में भविष्य के लिए भरोसा बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय हालात का प्रभाव

पश्चिम एशिया में संघर्ष, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कारोबार पर असर डाला है। कंपनियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा में बाधाओं और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में मंदी आई। इसी वजह से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग दोनों प्रभावित हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियां बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल रही हैं। उन्होंने अपने मुनाफे में कटौती कर इसका कुछ हिस्सा खुद वहन किया है। मार्च में उत्पाद और सेवाओं की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई, लेकिन सर्विस सेक्टर में यह दबाव मैन्युफैक्चरिंग की तुलना में ज्यादा रहा।

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