ब्रज में विधवा माताओं की रंगभरी होली: विदेशी महिलाओं संग उड़ा गुलाल, देवकीनंदन महाराज की हाइड्रोलिक पिचकारी बनी आकर्षण

ब्रज में विधवा माताओं की रंगभरी होली: विदेशी महिलाओं संग उड़ा गुलाल, देवकीनंदन महाराज की हाइड्रोलिक पिचकारी बनी आकर्षण
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उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित ब्रज क्षेत्र में इस बार होली का उत्सव खास रहा। यहां विधवा माताओं ने सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए रंग-गुलाल उड़ाया और फूलों की होली खेली। इस आयोजन में विदेशी महिलाएं भी शामिल हुईं, जिन्होंने पूरे उत्साह के साथ ब्रज की पारंपरिक होली का आनंद लिया।

कार्यक्रम के दौरान वातावरण भक्ति और उल्लास से सराबोर नजर आया। ढोल, मंजीरे और भजनों की धुन पर सभी झूमते दिखाई दिए। सफेद वस्त्रों में आई विधवा माताएं जब रंगों में सराबोर हुईं तो दृश्य भावुक कर देने वाला था। वर्षों पहले तक जिन महिलाओं के लिए होली जैसे त्योहारों में भाग लेना वर्जित माना जाता था, आज वे पूरे आत्मविश्वास के साथ उत्सव मना रही हैं।

इस मौके पर कथावाचक देवकीनंदन महाराज भी मौजूद रहे। उन्होंने हाइड्रोलिक पिचकारी से गुलाल उड़ाकर उत्सव को और भी भव्य बना दिया। उनकी पिचकारी से उड़ता गुलाल दूर तक फैलता दिखा और श्रद्धालु खुशी से झूम उठे। आयोजन स्थल पर “राधे-राधे” और “श्याम नाम” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।

ब्रज की होली विश्व प्रसिद्ध है, खासकर फूलों की होली का अलग ही महत्व है। इस आयोजन में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विदेशी महिलाओं ने भी पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर रंगोत्सव में हिस्सा लिया और ब्रज संस्कृति की सराहना की।

आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन समाज को सकारात्मक संदेश देता है कि हर व्यक्ति को खुशियां मनाने का अधिकार है। विधवा माताओं की भागीदारी ने इस होली को और भी खास बना दिया।

सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित ढंग से संभाला गया।

ब्रज में रंग और भक्ति के इस अनोखे संगम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यहां की होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और समरसता का प्रतीक भी है।

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