Medical Admission 2026: MBBS सीटें बढ़ीं, फिर भी हर एक सीट पर 8 उम्मीदवारों की दावेदारी

Medical Admission 2026 में MBBS सीटें बढ़कर 1,36,939 हुईं, फिर भी NEET UG 2026 के 11.21 लाख क्वालिफाई अभ्यर्थियों के कारण हर सीट पर करीब 8उम्मीदवार दावेदार हैं।

NEET UG 2026 के बाद MBBS सीटों की संख्या बढ़कर 1,36,939 हो गई है, लेकिन 11.21 लाख अभ्यर्थियों के क्वालिफाई करने से प्रवेश की प्रतिस्पर्धा अब भी काफी अधिक बनी हुई है।

नई दिल्ली: Medical Admission 2026 के लिए MBBS सीटों में इस वर्ष बढ़ोतरी की गई है, लेकिन NEET UG 2026 में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के क्वालिफाई करने से दाखिले की दौड़ पहले की तरह कड़ी बनी हुई है। काउंसलिंग, कटऑफ और रैंक इस बार भी प्रवेश में अहम भूमिका निभाएंगे।

सीटें बढ़ीं, लेकिन मुकाबला अब भी बेहद कड़ा

NEET UG 2026 का परिणाम जारी होने के बाद अब मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया पर सभी की नजरें हैं। इस वर्ष MBBS सीटों की संख्या में करीब 9,911 की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल सीटें बढ़कर 1,36,939 हो गई हैं। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रतिस्पर्धा कम नहीं हुई है। इस बार 11.21 लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में क्वालिफाई हुए हैं, जिसके चलते औसतन हर एक MBBS सीट के लिए लगभग आठ उम्मीदवार दावेदार हैं।

Medical Admission 2026: MBBS सीटें बढ़ीं, फिर भी हर एक सीट पर 8 उम्मीदवारों की दावेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अच्छा स्कोर हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होगा। उम्मीदवारों को काउंसलिंग प्रक्रिया, सीट मैट्रिक्स और कॉलेजों की चॉइस फिलिंग भी बेहद सावधानी से करनी होगी।

सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में कितनी हैं सीटें?

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के 2026-27 शैक्षणिक सत्र के अनुसार, देश में इस समय 823 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इनमें कुल 1,36,939 MBBS सीटें उपलब्ध हैं। इनमें 441 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 63,296 सीटें हैं, जबकि 382 निजी मेडिकल कॉलेजों में 73,643 सीटें उपलब्ध हैं।

सरकारी कॉलेजों में कम फीस और बेहतर सुविधाओं के कारण सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। इसलिए बेहतर रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के सरकारी कॉलेज में प्रवेश की संभावना अधिक रहती है।

हर सीट पर आठ उम्मीदवार, इसलिए बढ़ेगी कटऑफ की चुनौती

NTA के अनुसार, NEET UG 2026 में लगभग 11.21 लाख उम्मीदवार क्वालिफाई हुए हैं। यदि उपलब्ध MBBS सीटों की तुलना की जाए तो प्रत्येक सीट पर औसतन 8.2 उम्मीदवार दावेदारी कर रहे हैं। यही वजह है कि इस वर्ष भी मेडिकल प्रवेश के लिए कटऑफ ऊंची रहने की संभावना जताई जा रही है।

अच्छी रैंक वाले उम्मीदवारों को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की संभावना अधिक होगी, जबकि अपेक्षाकृत कम रैंक वाले अभ्यर्थियों को निजी मेडिकल कॉलेजों या अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों का विकल्प चुनना पड़ सकता है।

काउंसलिंग में इन बातों का रखना होगा ध्यान

NEET UG 2026 के बाद अब मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें ऑल इंडिया कोटा (15 प्रतिशत) और राज्य कोटा (85 प्रतिशत) के तहत सीटों का आवंटन किया जाएगा। इस दौरान उम्मीदवारों की रैंक, श्रेणी, आरक्षण, कटऑफ और दस्तावेज सत्यापन जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होंगे।

कुल 11.21 लाख सफल अभ्यर्थियों में से केवल 1.36 लाख के करीब छात्रों को ही MBBS सीट मिल सकेगी। शेष अभ्यर्थी BDS, AYUSH, वेटरिनरी, BSc Nursing और अन्य स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों में प्रवेश के विकल्प चुन सकते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ उम्मीदवारों को सलाह दे रहे हैं कि वे काउंसलिंग के प्रत्येक चरण में समय पर भाग लें और सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें, ताकि प्रवेश प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो

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