मेजर शैतान सिंह भाटी! 17,000 फीट पर दिखाई थी वीरता, राजस्थान के लाल की शौर्य गाथा बनी परमवीर चक्र का इतिहास

‘120 बहादुर’ फ़िल्म 1962 के रेजांग ला युद्ध में मेजर शैतान सिंह भाटी की अतुलनीय वीरता को बड़े पर्दे पर दर्शाती है, आज देशभर में रिलीज़।

देश की बहुप्रतीक्षित वॉर ड्रामा फ़िल्म ‘120 बहादुर’ आज 21 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई। यह फ़िल्म 1962 के भारत-चीन युद्ध में रेजांग ला की ऐतिहासिक लड़ाई और राजस्थान के परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह भाटी की अतुलनीय वीरता को बड़े पर्दे पर जीवंत करती है।

Jaipur: राजस्थान के वीर सपूत मेजर शैतान सिंह भाटी की शौर्यगाथा पर आधारित फ़िल्म ‘120 बहादुर’ आज देशभर में रिलीज़ हो गई। फ़िल्म 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान लड़े गए रेजांग ला के उस भीषण संग्राम को दर्शाती है, जहां मात्र 120 भारतीय सैनिकों ने 17,000 फीट की कठोर ऊंचाई पर हज़ारों चीनी सैनिकों से भिड़कर इतिहास रच दिया था। 

मेजर शैतान सिंह ने न सिर्फ अपनी टुकड़ी का मनोबल बनाए रखा, बल्कि अंतिम सांस तक मोर्चा संभालते हुए परमवीर चक्र के योग्य वीरता का प्रदर्शन किया। राजस्थान के इस महान योद्धा के सम्मान में आज भी उनके गांव में मंदिर बना है और लोग हर शुभ कार्य से पहले वहां मत्था टेकते हैं। फ़िल्म उनकी इसी अविश्वसनीय वीरता, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनती है।

मेजर शैतान सिंह: राजस्थान के वीर योद्धा

मेजर शैतान सिंह भाटी, जिनका जन्म 1 दिसंबर 1924 को जोधपुर रियासत के बनासोर गांव में हुआ, भारतीय सेना के उन अद्वितीय वीरों में से एक थे जिन्होंने देश के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। सैन्य परिवेश में पले-बढ़े भाटी ने अपनी शिक्षा चोपासनी स्कूल, जोधपुर से पूरी की और 1949 में कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हुए। उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और साहसिक निर्णय क्षमता के चलते उन्हें 1962 के भारत-चीन युद्ध में 13 कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी का नेतृत्व सौंपा गया, जहां उन्होंने अप्रतिम वीरता का परिचय दिया।

रेजांग ला में अद्वितीय वीरता

18 नवंबर 1962 को रेजांग ला की 17,000 फीट ऊँची चौकी पर मेजर शैतान सिंह भाटी ने ऐसा इतिहास रचा, जिसकी मिसाल विश्व युद्धों में भी दुर्लभ है। मुख्य सुरक्षा क्षेत्र से कटे इस मोर्चे पर उनकी चार्ली कंपनी के 120 जवानों का सामना 3,000 से अधिक चीनी सैनिकों से था। हालात बेहद कठिन थे, फिर भी मेजर सिंह ने पीछे हटने से इनकार करते हुए एक-एक पोस्ट पर जाकर जवानों का हौसला बढ़ाया और रणनीति निर्देशित की। विपरीत परिस्थितियों में भी उनकी नेतृत्व क्षमता और अटूट साहस ने इस लड़ाई को अमर बना दिया।

अंतिम सांस तक युद्ध

भारी गोलीबारी के बीच गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी मेजर शैतान सिंह ने मोर्चा नहीं छोड़ा। अपने साथियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने उन्हें पीछे हटने का आदेश दिया और स्वयं चट्टान के पीछे डटे रहे। लगातार होती फायरिंग के बीच वे वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन उनके अडिग साहस ने चीनी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया। इस लड़ाई में उनके 120 में से 114 जवान शहीद हुए, लेकिन 1300 से अधिक चीनी सैनिक ढेर कर दिए गए, जिससे चूसूल और लद्दाख की सुरक्षा मजबूत बनी रही।

स्क्रीन पर जीवंत हुई शौर्यगाथा

मेजर शैतान सिंह की अमर कहानी पर आधारित फिल्म 120 बहादुर आज देशभर में रिलीज हो रही है। फरहान अख्तर इस फिल्म में मेजर का किरदार निभा रहे हैं और उनकी टुकड़ी की वीरता को बड़े पर्दे पर जीवंत करते हैं। फिल्म की रिलीज उस समय हुई है जब दो दिन पूर्व मेजर की शहादत की पुण्यतिथि मनाई गई। जोधपुर स्थित उनके गांव में हर साल 18 नवंबर को विशेष आयोजन होते हैं, जहां उनकी प्रतिमा और मंदिर में ग्रामीण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि मेजर भाटी आज भी उनकी रक्षा करते हैं।

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