MGU में पानी संकट पर छात्राओं का प्रदर्शन, महिला हॉस्टल में सुविधाओं की कमी पर विरोध

तेलंगाना के महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में महिला हॉस्टल में पेयजल संकट और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया. समाधान की मांग की

महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के महिला हॉस्टल में पेयजल संकट और सुविधाओं की कमी से नाराज छात्राओं ने देर रात प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रशासन पर शिकायतों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पानी की आपूर्ति बहाल करने और समस्याओं के समाधान की मांग की।

खम्मम: तेलंगाना के नलगोंडा स्थित महात्मा गांधी विश्वविद्यालय (MGU) में महिला हॉस्टल में पेयजल संकट और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर छात्राओं का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। गुरुवार देर रात बड़ी संख्या में छात्राओं ने कुलपति (Vice-Chancellor) के अतिथि गृह के बाहर एकत्र होकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्राओं का आरोप है कि पिछले कई दिनों से हॉस्टल में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जिससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने कहा कि उन्हें पीने के पानी के साथ-साथ शौचालय और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया, जिससे उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

महिला हॉस्टल में पेयजल संकट से बढ़ी परेशानी

छात्राओं के अनुसार हॉस्टल में पानी की आपूर्ति लगातार बाधित रहने के कारण सामान्य दिनचर्या प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि सीमित जल आपूर्ति के चलते पीने के पानी की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है।

छात्राओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों के लिए महिला हॉस्टल को मिलने वाले पानी का उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि इसी वजह से हॉस्टल में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है और रहने की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

प्रशासन पर शिकायतों की अनदेखी का आरोप

प्रदर्शनकारी छात्राओं ने कहा कि उन्होंने कई बार कुलपति और रजिस्ट्रार कार्यालय को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि केवल आश्वासन दिए गए, जबकि जमीन पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। छात्राओं ने आरोप लगाया कि लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन करना उनकी मजबूरी बन गया। छात्राओं ने मांग की कि हॉस्टल में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ सभी बुनियादी सुविधाओं को तत्काल बहाल किया जाए।

देर रात पुलिस पहुंचने पर बढ़ा विवाद

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब देर रात पुलिस विश्वविद्यालय परिसर में पहुंची। पुलिस की मौजूदगी पर छात्राओं और विभिन्न छात्र संगठनों ने आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन ने पुलिस को बुलाकर विरोध को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनकी मांगें मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी हैं तो प्रशासन संवाद करने के बजाय कानून-व्यवस्था का सहारा क्यों ले रहा है। हालांकि पुलिस ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और परिसर में शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया।

कुलपति कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी

छात्राओं ने घोषणा की कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कुलपति कार्यालय का घेराव करेंगी। उनका कहना है कि जब तक पेयजल संकट और हॉस्टल से जुड़ी अन्य समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल बुनियादी सुविधाएं प्राप्त करना है और वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रख रही हैं।

छात्र संगठनों ने भी दिया समर्थन

महिला छात्राओं के आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों का भी समर्थन मिला। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में शामिल होकर विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल पानी की आपूर्ति बहाल करने और हॉस्टल की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। छात्र संगठनों का कहना है कि किसी भी विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ेगा।

उच्च शिक्षा संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा

विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में केवल शैक्षणिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि छात्रावासों की गुणवत्ता भी शिक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, बिजली, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं प्रत्येक छात्र का मूल अधिकार हैं।

यदि इन सुविधाओं में लगातार कमी बनी रहती है तो छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन को समय रहते प्रभावी कदम उठाने चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के आंदोलन की नौबत न आए।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति पर प्रशासन और पुलिस दोनों नजर बनाए हुए हैं। छात्राओं को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा और हॉस्टल में पानी की नियमित आपूर्ति बहाल की जाएगी।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्राओं की शिकायतों का समाधान किस प्रकार करता है। फिलहाल छात्राओं ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी समस्याएं दूर नहीं हुईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

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