हर साल आज, 6 दिसंबर को भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की पुण्यतिथि के रूप में महापरिनिर्वाण दिवस मनाया जाता है। इन्हें बाबासाहेब अंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है। डॉ. अंबेडकर भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता थे और एक सम्मानित नेता, विचारक एवं समाज सुधारक थे।
Dr. B.R. Ambedkar Life & Legacy: हर साल 6 दिसंबर को भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की पुण्यतिथि पर महापरिनिर्वाण दिवस मनाया जाता है। डॉ. अंबेडकर, जिन्हें बाबासाहेब अंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता (आर्किटेक्ट) थे। वे एक महान नेता, दूरदर्शी विचारक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समानता के सिद्धांत और जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए समर्पित कर दिया।
देशभर में लाखों लोग इस पवित्र दिन पर उनकी शिक्षाओं और न्यायपूर्ण समाज निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करते हुए उनके योगदान को सम्मान देते हैं। महापरिनिर्वाण दिवस 2024, बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 69वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 6 दिसंबर, 2024 को डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन (DAF) और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संसद भवन परिसर में प्रेरणा स्थल पर आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और संसद के अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहेंगे और पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।
महापरिनिर्वाण दिवस का महत्व
महापरिनिर्वाण दिवस, डॉ. बी.आर. अंबेडकर की परिवर्तनकारी विरासत के प्रति श्रद्धांजलि का प्रतीक है। बौद्ध साहित्य के अनुसार, भगवान बुद्ध के निधन को महापरिनिर्वाण कहा जाता है, जिसका अर्थ है “मृत्यु के बाद निर्वाण।” इसमें जीवन संघर्ष, कर्म और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति का संदेश निहित है। डॉ. अंबेडकर स्वयं भगवान बुद्ध के विचारों से प्रेरित थे। उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाकर समाज में अस्पृश्यता और अन्याय के खिलाफ अभियान चलाया। उनके अनुयायी उन्हें बुद्ध के समान प्रभावशाली नेता मानते हैं।
महापरिनिर्वाण दिवस केवल शोक मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह चिंतन और प्रेरणा का दिन है। यह हमें न्यायपूर्ण और समावेशी दुनिया के निर्माण की दिशा में उनके दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर और सामाजिक न्याय
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डॉ. बी.आर. अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन हाशिए पर रह रहे समुदायों, विशेषकर दलितों, वंचितों, महिलाओं और मजदूरों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। अंबेडकर ने पहचाना कि जातिगत उत्पीड़न देश को कमजोर कर रहा है, और उन्होंने इन गहरी जड़ें जमाई अन्यायपूर्ण प्रथाओं को खत्म करने के लिए निर्णायक कदम उठाए।
उन्होंने शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में उत्पीड़ित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए आरक्षण और अन्य क्रांतिकारी प्रावधान प्रस्तावित किए। दलितों की आवाज बुलंद करने के लिए उन्होंने मूकनायक अखबार की स्थापना की। शिक्षा के प्रसार और आर्थिक स्थितियों में सुधार के लिए उन्होंने 1923 में बहिष्कृत हितकारिणी सभा (Outcast Welfare Association) की स्थापना की।
डॉ. अंबेडकर ने महाड़ मार्च (1927) और कालाराम मंदिर आंदोलन (1930) जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया। उन्होंने जाति आधारित भेदभाव और पुरोहिती प्रभुत्व को चुनौती दी। 1932 में पूना समझौते के माध्यम से दलितों के लिए आरक्षित सीटें सुनिश्चित की गईं, जो भारत के सामाजिक न्याय के इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुईं।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर: संविधान निर्माता
आधुनिक भारत के निर्माण में डॉ. अंबेडकर की भूमिका केवल सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं थी। वे भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता भी थे। उन्होंने एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना की, जो न केवल राजनीतिक लोकतंत्र को कायम रखे बल्कि सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करे। उनकी दूरदर्शिता ने भारतीय आर्थिक और सामाजिक ढांचों को आकार दिया। डॉ. अंबेडकर ने भारत के वित्त आयोग, आरबीआई अधिनियम (1934), रोजगार कार्यालयों, राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड प्रणाली और दामोदर घाटी, हीराकुंड बांध, सोन नदी परियोजना जैसी बुनियादी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने 1948 में संविधान का मसौदा तैयार किया, जिसे 1949 में न्यूनतम परिवर्तनों के साथ अपनाया गया। उनके विचारों ने अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की और समावेशी लोकतंत्र की नींव रखी। बौद्ध धर्म अपनाने के बाद डॉ. अंबेडकर ने मुक्ति और समानता के संदेश को फैलाया। उन्होंने जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाकर दलितों और वंचितों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव किए। उनके अनुयायी उन्हें बौद्ध समाज में प्रेरक और मार्गदर्शक मानते हैं।
विरासत और सम्मान
डॉ. बी.आर. अंबेडकर को 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनका बहुआयामी योगदान सामाजिक न्याय, आर्थिक नीति, बुनियादी ढांचा और संवैधानिक कानून ने उन्हें राष्ट्र निर्माता के रूप में स्थापित किया। महापरिनिर्वाण दिवस हमें उनके आदर्शों न्याय, समानता और स्वतंत्रता को याद दिलाता है और हमें प्रेरित करता है कि हम एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और सामंजस्यपूर्ण समाज की ओर बढ़ें। उनके जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर, हम उनके सपनों का भारत और दुनिया बना सकते हैं।











