Maharashtra में विधान परिषद की खाली हो रही 17 सीटों को लेकर महायुति गठबंधन के भीतर खींचतान तेज हो गई है। Bharatiya Janata Party ने इनमें से 12 सीटों पर दावा जताया है, जिससे सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सीट शेयरिंग को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य में विधान परिषद (MLC) की खाली हो रही 17 सीटों को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के भीतर मतभेद सामने आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इनमें से 12 सीटों पर दावा ठोक दिया है, जिससे सहयोगी दलों में असंतोष बढ़ गया है।
महायुति गठबंधन में शामिल Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना और उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को अब सीमित सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है।
17 MLC सीटों पर बढ़ा राजनीतिक तनाव
महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें वर्तमान समीकरण के अनुसार पहले से ही भाजपा के पास 7, शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 5, एनसीपी के पास 3 और कांग्रेस के पास 2 सीटें हैं। लेकिन नए समीकरण में भाजपा ने 12 सीटों पर दावा कर राजनीतिक संतुलन को बदलने की कोशिश की है।इस दावे के बाद शिवसेना और एनसीपी दोनों के लिए केवल 5 सीटें बचती नजर आ रही हैं, जिससे गठबंधन में तनाव स्पष्ट रूप से बढ़ गया है।
महायुति के भीतर सीट बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों की अलग-अलग मांगें सामने आई हैं। शिंदे गुट की शिवसेना का कहना है कि उसे कम से कम 7 सीटें मिलनी चाहिए, जबकि एनसीपी (अजित पवार गुट) 3 सीटों की मांग कर रही है। एनसीपी के लिए रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग सीट को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पूरे विवाद ने गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है, जबकि सभी दल आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान: बातचीत जारी
मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने सीट शेयरिंग विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गठबंधन के भीतर लगातार बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि नासिक और संभाजीनगर सीटों पर शिवसेना के साथ चर्चा जारी है, जबकि पुणे सीट को लेकर एनसीपी से बातचीत हो रही है। फडणवीस ने भरोसा जताया कि महायुति के सभी घटक दल जल्द ही आपसी सहमति से इस मुद्दे का समाधान निकाल लेंगे और कोई बड़ा विवाद नहीं होगा।
इस बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई थी कि एनसीपी नेता Sunetra Pawar के परिवार से जुड़े कुछ नाम विधान परिषद के लिए आगे आ सकते हैं। खासकर जय पवार को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, एनसीपी नेता उमेश पाटिल ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए स्पष्ट किया कि जय पवार का फिलहाल चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है और पार्टी जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को अवसर देने पर ध्यान दे रही है।
विपक्ष का हमला: रोहित पवार ने साधा निशाना
विपक्षी एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक Rohit Pawar ने इस पूरे विवाद पर महायुति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने सहयोगी दलों की सीटों पर भी नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है और भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रही है। रोहित पवार के अनुसार, यह केवल सीटों का मामला नहीं है बल्कि गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर भी गंभीर मतभेद हैं।
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना दूसरे स्थान पर और अजित पवार की एनसीपी तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा कुछ छोटे सहयोगी दल भी गठबंधन का हिस्सा हैं।










