जोधपुर पुलिस ने आयुष मंत्रालय भर्ती परीक्षा में नकल गिरोह के मास्टरमाइंड और 25 हजार के इनामी अशोक मीणा को गिरफ्तार किया है। वह कार से जा रहा था। नाकाबंदी के दौरान दो कॉन्स्टेबलों ने उसे पकड़कर कोटा पुलिस को सौंपा।
जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर शहर में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 हजार रुपये के इनामी और नकल गिरोह के कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और कोटा पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। आरोपी की गिरफ्तारी जोधपुर पूर्व पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते संभव हो सकी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी को उस समय पकड़ा गया जब वह एक कार में सवार होकर जोधपुर के भदवासिया फ्रूट मंडी क्षेत्र से गुजर रहा था। गश्त कर रही पुलिस टीम ने मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर तुरंत नाकाबंदी की और संदिग्ध वाहन को रोककर आरोपी को हिरासत में ले लिया।
गश्त के दौरान मिली खुफिया सूचना बनी सफलता की कुंजी
इस पूरी कार्रवाई में जोधपुर पूर्व जिले के दो पुलिसकर्मियों की अहम भूमिका रही। महामंदिर थाने के कॉन्स्टेबल राकेश सिंह और बनाड़ थाने के कॉन्स्टेबल माणकचंद मूंड नियमित गश्त पर थे, जब उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली कि वांछित अपराधी शहर के इसी इलाके से गुजरने वाला है।
सूचना के अनुसार, आरोपी अपने एक सहयोगी के साथ सफेद रंग की कार में सवार होकर भदवासिया फ्रूट मंडी की तरफ आ रहा था। सूचना को गंभीरता से लेते हुए दोनों पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए फ्रूट मंडी तिराहे पर नाकाबंदी की व्यवस्था की।
कुछ ही देर बाद संदिग्ध कार वहां पहुंची। पुलिस ने वाहन को रोककर उसमें बैठे व्यक्ति से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में उसकी पहचान करौली जिले के महावीरजी थाना क्षेत्र के बिनेगा गांव निवासी अशोक मीणा (31), पुत्र मुल्याराम के रूप में हुई।
कौन है गिरफ्तार आरोपी अशोक मीणा?
गिरफ्तार आरोपी अशोक मीणा पर आरोप है कि वह एक संगठित नकल गिरोह का मास्टरमाइंड है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली कराने का काम करता था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह तकनीकी साधनों और संगठित नेटवर्क के जरिए परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने की साजिशों में शामिल रहा है।
उसकी गतिविधियों को देखते हुए कोटा पुलिस ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था। लंबे समय से फरार रहने के कारण वह लगातार अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहा था।
आयुष मंत्रालय भर्ती परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का मामला
यह पूरा मामला बीते वर्ष 27 नवंबर 2025 को आयोजित एक भर्ती परीक्षा से जुड़ा हुआ है, जो केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (Central Council for Research in Ayurvedic Sciences) के तहत मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) पदों के लिए आयोजित की गई थी।
कोटा में स्थित बीएसएनएल सर्किल के एक ऑनलाइन आईटी एजुकेशन सेंटर पर परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर नकल और पेपर लीक की शिकायत सामने आई थी। जांच के दौरान पुलिस को परीक्षा केंद्र से कई संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नकल सामग्री और प्रश्नपत्रों के हल की प्रिंट कॉपियां बरामद हुई थीं।
जब इन उत्तरों की तुलना मूल प्रश्नपत्र से की गई, तो बड़ी संख्या में जवाब हूबहू मेल खाते पाए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा में सुनियोजित तरीके से धांधली की गई थी।
संगठित गिरोह का नेटवर्क और जांच का दायरा
कोटा पुलिस की शुरुआती जांच में यह सामने आया था कि यह कोई सामान्य नकल मामला नहीं था, बल्कि एक संगठित गिरोह के जरिए संचालित व्यापक नेटवर्क था। इस गिरोह में कई लोग शामिल थे, जो परीक्षा केंद्रों, तकनीकी संसाधनों और उम्मीदवारों तक पहुंच बनाकर सिस्टम को प्रभावित करते थे।
इस मामले में पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन मुख्य आरोपी अशोक मीणा पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई जिलों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा था और उस पर निगरानी रखी जा रही थी।
नए कानूनों के तहत दर्ज हुआ गंभीर मामला
इस नकल प्रकरण में कोटा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 के तहत कार्रवाई की गई है।
नए कानून के तहत यह अपराध बेहद गंभीर श्रेणी में आता है, जिसमें संगठित पेपर लीक, डिजिटल माध्यम से धोखाधड़ी और परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने जैसे अपराध शामिल हैं। इन प्रावधानों के तहत दोषियों को कठोर सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
जोधपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से खुला बड़ा सुराग
जोधपुर पुलिस की तत्परता के चलते इस फरार आरोपी को पकड़ने में महत्वपूर्ण सफलता मिली। गिरफ्तारी के बाद उसे तुरंत कोटा पुलिस के हवाले कर दिया गया। कोटा से आई आरके पुरम थाना पुलिस टीम आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को अपने साथ ले गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के बाद नकल गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
आगे की जांच और संभावित खुलासे
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह का नेटवर्क कितनी दूर तक फैला हुआ था और किन-किन राज्यों में इसकी गतिविधियां संचालित हो रही थीं। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने के लिए किस तरह की तकनीक और संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी के बाद कई अन्य बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं और देशभर में फैले परीक्षा धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।









