UP Gram Panchayat: नए चुनाव तक पूर्व प्रधान संभालेंगे जिम्मेदारी, योगी सरकार का बड़ा फैसला

UP सरकार का बड़ा फैसला। नई पंचायतों के गठन तक पूर्व ग्राम प्रधान प्रशासक बनकर गांवों के सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है। नई पंचायतों के गठन तक या अधिकतम छह महीने तक वे गांवों के सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। यह व्यवस्था 27 मई 2026 से लागू होगी और नई पंचायतों के गठन तक गांवों के सामान्य कामकाज को जारी रखने में मदद करेगी।

ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकार का फैसला

उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में राज्य सरकार ने गांवों में प्रशासनिक और विकास कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करें।

यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक नई ग्राम पंचायतों का गठन नहीं हो जाता। सरकार ने इसके लिए अधिकतम छह महीने की समयसीमा तय की है। इस फैसले का उद्देश्य गांवों में जरूरी सेवाओं और योजनाओं को बिना रुकावट जारी रखना है।

सिर्फ सामान्य प्रशासनिक काम संभाल सकेंगे प्रशासक

सरकार की ओर से साफ किया गया है कि प्रशासक बनाए गए पूर्व ग्राम प्रधान केवल सामान्य और रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य ही संभाल सकेंगे। उन्हें किसी भी तरह के बड़े वित्तीय, नीतिगत या स्थायी फैसले लेने का अधिकार नहीं दिया जाएगा।

गांवों में सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, मनरेगा और अन्य जरूरी सेवाओं को जारी रखने की जिम्मेदारी इन्हीं प्रशासकों के पास रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे पंचायत स्तर पर कामकाज प्रभावित नहीं होगा और ग्रामीणों को जरूरी सुविधाएं मिलती रहेंगी।

बड़े फैसलों के लिए डीएम की मंजूरी जरूरी

राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना जरूरी होता है, तो प्रशासक सीधे फैसला नहीं ले सकेंगे। ऐसे मामलों में प्रस्ताव पहले जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा।

डीएम की मंजूरी मिलने के बाद ही उस प्रस्ताव पर कार्रवाई की जा सकेगी। इससे पंचायतों में प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने की कोशिश की गई है।

सरकार के इस फैसले को पंचायत चुनाव से पहले प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे गांवों में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक खालीपन की स्थिति नहीं बनेगी।

Leave a comment