महाराष्ट्र राजनीति में तनाव, शिंदे गुट की नाराजगी पर BJP का बड़ा निर्णय

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना और BJP के बीच तनाव बढ़ गया है। शिंदे गुट की नाराजगी के बाद BJP ने कार्यकर्ताओं को शामिल न करने का फैसला लिया।

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना और बीजेपी के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है। शिंदे गुट ने कार्यकर्ताओं की बीजेपी में एंट्री पर नाराजगी जताई, जिसके बाद बीजेपी ने ऐसा न करने का भरोसा दिया। अब दोनों दल विवाद पर चर्चा के लिए बैठक करेंगे।

Mumbai: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना और बीजेपी के बीच चल रहे तनाव पर अब बड़ी खबर सामने आई है। उप मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के मंत्रियों की नाराजगी के बाद बीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शिवसेना नेताओं या कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी में शामिल नहीं करेगी। दोनों दल इस मुद्दे पर दो दिनों के भीतर बैठक करेंगे ताकि जारी विवाद पर चर्चा हो सके।

शिवसेना मंत्रियों की नाराजगी की वजह

एकनाथ शिंदे गुट के मंत्रियों की नाराजगी उस समय खुलकर सामने आई जब उनके गढ़ ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और पालघर से कई कार्यकर्ताओं के बीजेपी में शामिल होने की खबरें आने लगीं। इसी नाराजगी के चलते शिवसेना के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कैबिनेट मीटिंग का बहिष्कार किया और सीधे जाकर शिकायत दर्ज कराई।

कैबिनेट बैठक में गैरहाजिर क्यों रहे मंत्री

कैबिनेट बैठक के समय शिवसेना मंत्री मीटिंग हॉल में जाने के बजाय फडणवीस के कार्यालय में बैठे रहे। केवल एकनाथ शिंदे ही मीटिंग में शामिल हुए। बैठक खत्म होने के बाद शिवसेना मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और बताया कि वे इस बात से नाराज हैं कि शिवसेना नेताओं को बीजेपी में शामिल किया जा रहा है।

फडणवीस का शिंदे को आश्वासन

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि उल्हासनगर में शुरुआत शिवसेना ने ही की थी जहां उनके गुट ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं को शामिल किया था। उन्होंने कहा कि यदि शिंदे गुट ऐसा करे तो सही और बीजेपी करे तो गलत, यह संभव नहीं है।

हालांकि, विवाद बढ़ने से रोकने के लिए उन्होंने आश्वासन दिया कि अब से दोनों दल एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी में शामिल नहीं करेंगे।

टकराव वाले जिलों पर चर्चा होगी

शिवसेना और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में यह तय किया जाएगा कि महायुति में किस जिले में सबसे ज्यादा टकराव है और उसका समाधान कैसे निकाला जाए। यह बैठक महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले होने वाली है और इसका मकसद दोनों दलों के बीच तालमेल बनाना है।

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