केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 गुरुवार से लागू हो गया है।
नई दिल्ली: भारत में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए Constitution (106th Amendment) Act, 2023, जिसे आमतौर पर ‘महिला आरक्षण कानून’ या ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है, अब आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल 2026 से इस कानून को प्रभावी करने की अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, इसके बावजूद महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण का लाभ तुरंत नहीं मिलेगा।
क्या है महिला आरक्षण अधिनियम?
Constitution (106th Amendment) Act, 2023 का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना है। यह कानून भारतीय राजनीति में लैंगिक समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस अधिनियम को सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था और इसे व्यापक समर्थन मिला था।
तुरंत क्यों नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ?
![]()
हालांकि यह कानून लागू हो चुका है, लेकिन इसके प्रावधानों को लागू करने के लिए कुछ आवश्यक प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं।
- जनगणना पर निर्भरता: इस कानून को लागू करने के लिए अगली जनगणना आवश्यक है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।
- परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया: Delimitation in India यानी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण इस कानून का अहम हिस्सा है। जब तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक यह तय नहीं हो सकता कि किन सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा।
- वर्तमान लोकसभा पर लागू नहीं: अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में इस आरक्षण को लागू नहीं किया जा सकता। इसका लाभ अगले चुनावों के बाद ही मिलेगा।
कब तक लागू हो सकता है महिला आरक्षण?
विशेषज्ञों और सरकारी संकेतों के अनुसार, यह आरक्षण 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही लागू हो पाएगा। ऐसे में अनुमान है कि महिलाओं को इसका वास्तविक लाभ 2029 के आम चुनावों या उसके बाद मिल सकता है। कुछ आकलनों के अनुसार, यदि प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं होतीं, तो इसका पूर्ण प्रभाव 2034 तक भी टल सकता है।
इस कानून को लागू करने के पीछे सरकार ने “तकनीकी कारणों” का हवाला दिया है। हालांकि विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि यह अधिसूचना भविष्य की प्रक्रियाओं को औपचारिक रूप से शुरू करने के लिए आवश्यक थी। यह कदम इस दिशा में प्रशासनिक तैयारी को आगे बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।









