महिला आरक्षण विधेयक 2026: परिसीमन प्रावधान पर बढ़ा राजनीतिक विवाद, संसद में कई दलों ने जताया विरोध

महिला आरक्षण विधेयक 2026 को लेकर राजनीति गरमा गई है। परिसीमन प्रावधान पर विवाद बढ़ता जा रहा है और संसद में कई विपक्षी दलों ने इसका विरोध जताया है। जानिए इस बिल

केंद्र सरकार संसद के विशेष सत्र में आज महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है।

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जा रहे महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर अधिकांश विपक्षी दल महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं, वहीं प्रस्ताव में शामिल परिसीमन (Delimitation) के प्रावधान को लेकर व्यापक विरोध सामने आया है।

सरकार इस विधेयक के माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना पर काम कर रही है, जिसे 2029 के आम चुनावों से प्रभावी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया को आधार बनाया गया है, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर लगभग 850 तक करने का प्रस्ताव भी शामिल बताया जा रहा है।

परिसीमन प्रावधान पर बढ़ा राजनीतिक तनाव

इस विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक स्थिति में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए यह संख्या जुटाना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। जहां विपक्ष के अधिकांश दल महिला आरक्षण के पक्ष में एकजुट दिखाई दे रहे हैं, वहीं परिसीमन के प्रावधान ने राजनीतिक विभाजन को और गहरा कर दिया है। कई दलों का कहना है कि यह प्रावधान क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर डाल सकता है।

विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन से जुड़े प्रावधानों का कड़ा विरोध करेंगे। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में यह रणनीति तय की गई। बैठक में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi, द्रमुक नेता T R Baalu, तृणमूल कांग्रेस की Sagarika Ghose, राजद नेता Tejashwi Yadav, शिवसेना (उबाठा) के Sanjay Raut, एनसीपी (शरद पवार गुट) की Supriya Sule और आम आदमी पार्टी के Sanjay Singh सहित कई नेता शामिल हुए।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया जाएगा, लेकिन परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताते हुए उसका विरोध किया जाएगा।

महिला आरक्षण विधेयक 2026: परिसीमन प्रावधान पर बढ़ा राजनीतिक विवाद, संसद में कई दलों ने जताया विरोध

क्षेत्रीय दलों की चिंता भी सामने आई

विपक्षी गठबंधन के अलावा कई क्षेत्रीय दलों ने भी परिसीमन प्रावधान पर आपत्ति जताई है। Biju Janata Dal (BJD), Bharat Rashtra Samithi (BRS) और YSR Congress Party (YSRCP) ने स्पष्ट किया है कि वे महिला आरक्षण का समर्थन करेंगे, लेकिन परिसीमन प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करेंगे। इन दलों के अनुसार, प्रस्तावित परिसीमन से राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण होगा, जिससे कुछ राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है।

दक्षिणी राज्यों से भी इस प्रस्ताव को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M K Stalin ने कहा कि परिसीमन का प्रस्ताव दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ ऐतिहासिक अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व को असंतुलित कर सकता है और राज्यों की राजनीतिक आवाज को कमजोर करेगा।

सरकार का पक्ष और टीडीपी का समर्थन

दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि यह विधेयक महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। Telugu Desam Party (TDP) के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N Chandrababu Naidu ने इस विधेयक का समर्थन किया है। उन्होंने विभिन्न दलों से अपील की है कि वे महिला आरक्षण को मजबूत करने के लिए इस संशोधन का समर्थन करें। नायडू ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करना देश के लोकतांत्रिक ढांचे को अधिक समावेशी बनाएगा।

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