Micro Wind Turbine: छत पर लगेगी छोटी पवन चक्की, 1kW तक बिजली बनाएगी जर्मन तकनीक

जर्मनी की SkyWind Energy की Micro Wind Turbine घर की छत पर लग सकती है। पर्याप्त हवा मिलने पर यह 1kW तक बिजली बना सकती है, जानें इसकी खासियत।

जर्मनी की SkyWind Energy ने घरों की छतों के लिए Micro Wind Turbine विकसित की है। यह हवा से बिजली बनाती है और कम जगह में लग सकती है। एक टरबाइन 1kW तक पावर जनरेट कर सकती है।

Micro Wind Turbine: घर की छत पर बिजली बनाने के लिए सोलर पैनल के साथ अब छोटी पवन चक्की का विकल्प भी सामने आया है। जर्मनी की SkyWind Energy की माइक्रो टरबाइन कम जगह में लगाई जा सकती है और हवा से बिजली पैदा करती है। अच्छी हवा मिलने पर एक टरबाइन 1kW तक बिजली बनाने में सक्षम बताई गई है।

क्या है Micro Wind Turbine और कैसे करती है काम?

Micro Wind Turbine बड़ी पवन चक्कियों का छोटा और कॉम्पैक्ट रूप है, जिसे घरों की छत, खेतों या ऑफ-ग्रिड जगहों पर लगाया जा सकता है। इसका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि कम जगह में भी हवा की मदद से बिजली बनाई जा सके।

इस सिस्टम में छोटे एयरोडायनामिक ब्लेड लगाए जाते हैं। हवा चलने पर ये ब्लेड घूमते हैं और उनसे जुड़ा जनरेटर बिजली पैदा करता है। इसके बाद इनवर्टर की मदद से उत्पन्न बिजली को घर के इलेक्ट्रिक सिस्टम से जोड़ा जा सकता है।

इस तकनीक की खासियत यह है कि इसे केवल धूप पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। जब सोलर पैनल रात में या कम रोशनी के कारण कम बिजली बना रहे हों, उस समय हवा उपलब्ध होने पर माइक्रो टरबाइन काम कर सकती है।

छत पर कैसे लगाई जाती है यह छोटी पवन चक्की?

माइक्रो विंड टरबाइन को घर की छत पर पोल और क्लैंप की मदद से स्थापित किया जा सकता है। टरबाइन को छत से कुछ ऊंचाई पर लगाने का उद्देश्य उसे बेहतर हवा उपलब्ध कराना होता है।

इंस्टॉलेशन के बाद टरबाइन से बनने वाली बिजली को इनवर्टर के जरिए घर के मेन डिस्ट्रीब्यूशन पैनल से जोड़ा जाता है। जरूरत और सिस्टम के डिजाइन के अनुसार इसका इस्तेमाल घरेलू बिजली की जरूरत पूरी करने में किया जा सकता है।

तेज हवा, आंधी या सिस्टम पर अधिक लोड की स्थिति में सुरक्षा के लिए कंट्रोलर और डंप लोड जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इससे सिस्टम को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

1kW तक बिजली बना सकती है एक टरबाइन

SkyWind Energy के अनुसार, पर्याप्त हवा उपलब्ध होने पर एक माइक्रो टरबाइन 1,000 वॉट यानी 1kW तक की पावर जनरेट कर सकती है। रिपोर्ट में इसके सालाना औसत उत्पादन को करीब 615 kWh तक बताया गया है, हालांकि वास्तविक उत्पादन स्थान, हवा की गति और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

अगर किसी घर को ज्यादा बिजली उत्पादन की जरूरत है तो एक से अधिक टरबाइन को साथ में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कुल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर घर के लिए एक ही स्तर का उत्पादन संभव होगा। माइक्रो विंड टरबाइन की क्षमता पूरी तरह स्थानीय हवा की स्थिति और इंस्टॉलेशन की जगह पर निर्भर करती है।

सोलर पैनल का विकल्प या साथी?

माइक्रो विंड टरबाइन को सोलर पैनल का सीधा विकल्प मानना सही नहीं होगा। दोनों तकनीकों की अपनी अलग उपयोगिता है। सोलर पैनल को धूप की जरूरत होती है, जबकि विंड टरबाइन हवा की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

शहरी इलाकों में आसपास ऊंची इमारतों और दूसरी संरचनाओं के कारण हवा का बहाव अस्थिर हो सकता है। ऐसे स्थानों पर टरबाइन का उत्पादन उम्मीद से कम रह सकता है। वहीं खुले और तेज हवा वाले क्षेत्रों में इसका प्रदर्शन बेहतर हो सकता है।

इसी वजह से सोलर और विंड सिस्टम को एक साथ इस्तेमाल करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। दिन में सोलर पैनल और हवा उपलब्ध होने पर टरबाइन मिलकर बिजली उत्पादन कर सकते हैं।

सुरक्षा के लिए ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम

माइक्रो टरबाइन के डिजाइन में सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। SkyWind Energy के अनुसार, इसके ब्लेड्स को कंप्यूटर आधारित डिजाइन के जरिए तैयार किया गया है, ताकि संचालन के दौरान शोर को कम रखा जा सके।

तेज हवा या तूफान जैसी स्थिति में ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम टरबाइन की गति को नियंत्रित करने में मदद करता है। इससे सिस्टम और उससे जुड़े घरेलू उपकरणों की सुरक्षा बढ़ाने का दावा किया गया है।

इस तरह माइक्रो विंड टरबाइन खास तौर पर उन जगहों पर उपयोगी हो सकती है जहां छत पर जगह सीमित है, लेकिन पर्याप्त हवा उपलब्ध रहती है। हालांकि इसे लगाने से पहले स्थानीय हवा की स्थिति, भवन की संरचना और इंस्टॉलेशन की सुरक्षा का तकनीकी आकलन जरूरी है।

Leave a comment