अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में कथित पाकिस्तानी मिसाइल हमले में 7 लोगों की मौत और 75 घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में सीमा पर तनाव बढ़ गया है और पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच हालात फिर से युद्ध जैसे बन गए हैं।
इस्लामाबाद/ काबुल: अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत कुनार में सोमवार को हुए एक बड़े हमले ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार इस हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 75 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों में विश्वविद्यालय के छात्र, बच्चे और आम नागरिक शामिल हैं।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है।
असदाबाद और यूनिवर्सिटी पर हमले के आरोप
स्थानीय प्रशासन का दावा है कि राजधानी असदाबाद में रिहायशी इलाकों और एक विश्वविद्यालय को भी निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि Syed Jamaluddin Afghani University परिसर के आसपास भी विस्फोट और रॉकेट हमले हुए।
तालिबान सरकार के उप प्रवक्ता Hamdullah Fitrat ने आरोप लगाया है कि ये हमले पाकिस्तान की तरफ से किए गए हैं। उनके अनुसार दोपहर करीब 2 बजे मोर्टार और रॉकेट दागे गए, जिससे नागरिक क्षेत्रों को गंभीर नुकसान हुआ।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि रिहायशी इलाकों और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाने की खबरें गलत हैं।
सीमा पर हिंसक झड़प: सैनिकों की मौत के दावे
इससे पहले रविवार को पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा पर स्थित कंधार और स्पिन बोल्डक क्षेत्र में भी भारी तनाव देखने को मिला था। रिपोर्ट्स के अनुसार, रात के समय दोनों पक्षों के बीच फायरिंग हुई।
सूत्रों के मुताबिक इस झड़प में पाकिस्तान के 6 सैनिकों की मौत होने और एक सैनिक के अपहरण का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसी दौरान एक स्थानीय बच्चे की मौत की भी खबर सामने आई है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
जवाबी कार्रवाई और बढ़ता तनाव
सीमा पर बढ़ती हिंसा के बाद तालिबान बलों ने जवाबी कार्रवाई की बात कही है। सोशल मीडिया पर इस संघर्ष से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें भारी गोलीबारी और सैन्य गतिविधियां देखी जा सकती हैं।
दोनों देशों के बीच यह स्थिति धीरे-धीरे “जंग जैसे हालात” की ओर बढ़ती दिख रही है।

पहले भी हुआ संघर्ष और सीजफायर
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। मार्च 2026 में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी सीजफायर हुआ था, जिससे कई हफ्तों से चल रही झड़पों में थोड़ी राहत मिली थी।
हालांकि, उससे पहले भी दोनों देशों के बीच कई बार सीमा पार हमले और एयरस्ट्राइक हो चुके हैं। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर कथित आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई का दावा किया था, जबकि अफगानिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया था।
TTP विवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता
इस पूरे तनाव के केंद्र में Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) का मुद्दा भी अहम भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान की जमीन से संचालन करता है और पाकिस्तान में हमले करता है।
वहीं, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है और दावा करती है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकवादी संगठन के लिए नहीं हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, TTP का अफगान तालिबान से ऐतिहासिक और वैचारिक जुड़ाव भी इस तनाव को और जटिल बनाता है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिंता
इस संघर्ष को रोकने के लिए कई क्षेत्रीय देश और अंतरराष्ट्रीय शक्तियां सक्रिय हो चुकी हैं। चीन, तुर्किए, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देश इस विवाद को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर चुके हैं।
लेकिन लगातार बढ़ती हिंसा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीमा विवाद और सुरक्षा मुद्दों पर दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है।









