मणिपुर हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर सख्ती: 5,400 से अधिक सांप्रदायिक पोस्ट चिन्हित, 187 अकाउंट ब्लॉक

मणिपुर पुलिस ने 2023 की जातीय हिंसा के बाद पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही 5406 संवेदनशील पोस्ट चिन्हित कर 3200 हटवाए, 187 पेज और अकाउंट ब्लॉक किए गए हैं।

मणिपुर पुलिस ने 2023 की जातीय हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भड़काऊ सामग्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने 5406 संवेदनशील पोस्ट चिन्हित कर 3200 हटवाए, जबकि 187 पेज और अकाउंट ब्लॉक किए गए हैं।

इम्फाल: पूर्वोत्तर भारत के संवेदनशील राज्य Manipur में जातीय हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भड़काऊ और सांप्रदायिक कंटेंट के खिलाफ पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। मणिपुर पुलिस के महानिदेशक Rajiv Singh ने जानकारी दी कि जून 2023 से अब तक 5,406 संवेदनशील, हिंसक और सांप्रदायिक सोशल मीडिया पोस्ट की पहचान की गई है।

इनमें से लगभग 3,200 पोस्ट हटाए जा चुके हैं, जबकि 187 सोशल मीडिया पेज और अकाउंट ब्लॉक किए गए हैं। यह कार्रवाई राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और Ministry of Electronics and Information Technology के सहयोग से की गई।

राज्य में लंबे समय से जारी जातीय तनाव और हिंसा के बीच सोशल मीडिया पर अफवाहों और गलत सूचनाओं को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पुलिस आधुनिकीकरण कार्यक्रम के दौरान दी जानकारी

डीजीपी राजीव सिंह ने यह जानकारी उस कार्यक्रम के दौरान दी, जहां मुख्यमंत्री N Biren Singh ने पुलिस आधुनिकीकरण पहल के तहत खरीदे गए 477 नए पुलिस वाहनों को हरी झंडी दिखाई।

यह कार्यक्रम 1st Manipur Rifles Ground में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

डीजीपी ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत सूचनाएं राज्य में कानून-व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए फेक न्यूज की रोकथाम, निगरानी और सत्यापन को पुलिस की प्राथमिकता बनाया गया है।

“राज्य इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था”

राजीव सिंह ने कहा कि जब उन्होंने जून 2023 में पदभार संभाला, तब मणिपुर अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच जातीय हिंसा और तनाव तेजी से बढ़ रहा था।

उन्होंने कहा कि उस समय हालात ऐसे थे, जहां केवल तत्काल सुरक्षा कार्रवाई पर्याप्त नहीं थी, बल्कि पुलिस बल को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाना भी जरूरी था।

डीजीपी के अनुसार, इसी उद्देश्य से 2023 के अंत तक एक व्यापक पुलिस आधुनिकीकरण योजना तैयार की गई और राज्य सरकार को सौंपी गई।

केंद्र सरकार से मिला 196 करोड़ रुपये से अधिक का समर्थन

राजीव सिंह ने बताया कि Ministry of Home Affairs ने 31 अक्टूबर 2025 को मणिपुर पुलिस के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 196.61 करोड़ रुपये की मंजूरी दी।

इस फंड का उपयोग सुरक्षा ढांचे, आधुनिक संचार प्रणाली, फोरेंसिक सुविधाओं, पुलिस मोबिलिटी और स्मार्ट पुलिसिंग पहलों को मजबूत करने में किया जा रहा है।

डीजीपी ने कहा कि केंद्र सरकार के इस सहयोग से मणिपुर पुलिस की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी बेहतर हुई है।

पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों में तैनात होंगे नए वाहन

कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग को सौंपे गए 477 नए वाहनों को राज्य के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया जाएगा।

डीजीपी के अनुसार, लगभग 54 प्रतिशत वाहन पहाड़ी जिलों में भेजे जाएंगे, जबकि बाकी वाहन घाटी क्षेत्रों और पुलिस विभाग की तकनीकी इकाइयों को दिए जाएंगे।

मणिपुर का भौगोलिक स्वरूप काफी चुनौतीपूर्ण है। पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में पुलिस की त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक वाहनों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि नए वाहनों और तकनीकी संसाधनों से पुलिस की प्रतिक्रिया क्षमता और गश्त व्यवस्था में सुधार होगा।

सोशल मीडिया निगरानी बनी बड़ी चुनौती

मणिपुर हिंसा के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी मात्रा में भड़काऊ वीडियो, फर्जी तस्वीरें और सांप्रदायिक संदेश वायरल हुए थे। इन पोस्ट्स ने कई बार तनाव को और बढ़ाने का काम किया।

राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अफवाह फैलाना अब आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।

इसी वजह से पुलिस ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। पुलिस लगातार फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर), इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी रख रही है।

सोशल मीडिया पर बढ़ी मणिपुर पुलिस की मौजूदगी

डीजीपी ने बताया कि संकट के दौरान मणिपुर पुलिस की सोशल मीडिया पहुंच में भी बड़ा विस्तार हुआ है।

उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के फेसबुक फॉलोअर्स की संख्या बढ़कर 79,000 तक पहुंच गई है, जबकि एक्स पर फॉलोअर्स की संख्या 27,000 हो गई है।

पुलिस का मानना है कि सोशल मीडिया केवल अफवाहों का माध्यम नहीं, बल्कि सही जानकारी पहुंचाने का भी प्रभावी प्लेटफॉर्म हो सकता है। इसी कारण पुलिस विभाग ने आधिकारिक अपडेट्स और तथ्यात्मक जानकारी साझा करने पर विशेष ध्यान दिया।

उगाही के खिलाफ भी बड़ा अभियान

डीजीपी राजीव सिंह ने बताया कि राज्य में उगाही और अवैध वसूली की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए एक विशेष “इंटीग्रेटेड एंटी-एक्सटॉर्शन सेल” बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि अब तक पहाड़ी और घाटी दोनों क्षेत्रों में 1,000 से अधिक उगाही करने वालों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

मणिपुर में लंबे समय से उग्रवाद और हथियारबंद समूहों की गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उगाही के नेटवर्क को कमजोर करना राज्य में स्थायी शांति बहाल करने के लिए जरूरी कदम है।

मणिपुर में शांति बहाली की दिशा में प्रयास जारी

राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां मणिपुर में हालात सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। हालांकि जातीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद, विश्वास निर्माण और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदार व्यवहार भी मणिपुर में स्थायी शांति के लिए आवश्यक हैं।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल हिंसा और नफरत फैलाने के बजाय सही सूचना और शांति बनाए रखने के लिए हो।

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