मणिपुर दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंफाल में विस्थापित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सुरक्षा, पुनर्वास और आजीविका सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने समुदायों से शांति और संवाद बनाए रखने की अपील की तथा अधिकारियों को पुनर्वास कार्य तेज करने के निर्देश दिए।
Imphal: मणिपुर में जारी तनाव और अलग-अलग समुदायों के बीच गहराते भरोसे के संकट के बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का इंफाल दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुरुवार को राष्ट्रपति मुर्मू ने लोक भवन में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों अर्थात IDPs (Internally Displaced Persons) से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि भारत सरकार उनके साथ खड़ी है।
उन्होंने विस्थापित परिवारों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि उनकी जरूरतों, सुरक्षा, आजीविका और बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी सरकार की है, और इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। मणिपुर में पिछले कई महीनों से जारी अशांति के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से दूर रहने को मजबूर हैं। राष्ट्रपति की यह मुलाकात उनके दर्द और समस्याओं को समझने की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
सरकार हर विस्थापित व्यक्ति के साथ: राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंफाल में कुछ आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों से मुलाकात कर उनसे बातचीत की। पोस्ट में कहा गया कि राष्ट्रपति ने सभी को आश्वासन दिया कि उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार हर संभव सहायता दे रही है।
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पोस्ट में यह भी बताया गया कि राष्ट्रपति ने पुष्टि की कि केंद्र सरकार उनके घरों के पुनर्निर्माण, स्थायी आजीविका की व्यवस्था और उनके बच्चों की शिक्षा तथा भविष्य को सुरक्षित करने पर काम कर रही है। वे चाहती हैं कि मणिपुर के सभी परिवार सामान्य जीवन में जल्द लौट सकें और स्थिति लंबे समय तक स्थिर बनी रहे।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर व्यक्ति सुरक्षित महसूस करे और मणिपुर में शांति तथा स्थायी विकास का माहौल कायम हो।
शांति और सद्भाव की अपील
विस्थापित लोगों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने सिर्फ सहायता का भरोसा ही नहीं दिया, बल्कि समुदायों के बीच सद्भाव और संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मणिपुर का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब लोग आपसी भरोसा बढ़ाएंगे और हिंसा तथा भेदभाव की हर स्थिति को समाप्त करने में सहयोग करेंगे।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे शांति प्रक्रिया का हिस्सा बनें, क्योंकि स्थायी समाधान केवल बातचीत और सहयोग से ही निकलेगा। मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में किसी भी प्रकार की हिंसा का असर न सिर्फ परिवारों बल्कि पूरे समाज के ताने-बाने पर पड़ता है। इसलिए राष्ट्रपति ने स्पष्ट संदेश दिया कि देश के हर नागरिक की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है।
कुकी नागरिक संस्थाओं ने स्वागत कार्यक्रम से बनाई दूरी
राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे के बीच एक अहम घटनाक्रम तब सामने आया जब मणिपुर के कांगपोकपी जिले की कुकी नागरिक संस्थाओं ने यह फैसला किया कि वे नगा बहुल Senapati जिला में होने वाले राष्ट्रपति के स्वागत कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगी।
इन संस्थाओं का कहना है कि उनकी कुछ चिंताओं और मुद्दों पर अब तक उचित ध्यान नहीं दिया गया है। इसलिए उन्होंने प्रतीकात्मक विरोध के रूप में स्वागत कार्यक्रम से दूर रहने का निर्णय लिया।
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कुकी नागरिक संस्थाओं का कहना है कि पिछले कई महीनों से चल रहे संघर्ष में उनके समुदाय को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और सरकार को उनकी सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर और अधिक गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। उनका यह फैसला राज्य के विभिन्न समुदायों के बीच चल रहे तनाव का संकेत भी देता है।
कुकी और नगा समुदायों के बीच जटिल संबंध
मणिपुर में जारी संकट का एक बड़ा हिस्सा विभिन्न समुदायों के बीच बढ़ती दूरी और आपसी अविश्वास से जुड़ा है। कांगपोकपी मुख्य रूप से कुकी बहुल क्षेत्र है, जबकि सेनापति जिला नगा बहुल है। दोनों समुदायों की अलग-अलग चिंताएं और मांगें हैं, जो लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक जटिलता पैदा कर रही हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे का उद्देश्य इन तमाम जटिलताओं को समझना और यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र सरकार इन मुद्दों को गंभीरता से ले रही है। हालांकि कुकी संस्थाओं के इस निर्णय ने साफ कर दिया कि मणिपुर में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं और विश्वास बहाल करने के लिए लंबे समय तक निरंतर प्रयासों की जरूरत होगी।
विस्थापित परिवारों की स्थिति
मणिपुर में हजारों लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। उनके घर नष्ट हो चुके हैं, खेती और रोजगार बाधित हैं और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हुई है। राष्ट्रपति मुर्मू ने जब उनसे मुलाकात की, तो कई लोगों ने बताया कि वे जल्द अपने घर लौटना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा की स्थिति उन्हें निर्णय लेने से रोक रही है।
सरकार ने पिछले कुछ महीनों में राहत और पुनर्वास के लिए कई योजनाओं पर काम किया है, लेकिन अभी भी यह प्रक्रिया धीमी है। राष्ट्रपति ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पुनर्वास प्रक्रिया को तेज करें और हर परिवार को राहत सामग्री समय पर मिले।










