प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के तीसरे कार्यकाल को करीब ढाई साल हो चुके हैं। इस दौरान कई मंत्री मंत्रिपरिषद से बाहर हो चुके हैं। मौजूदा स्थिति में मंत्रिपरिषद में निर्धारित संख्या के मुकाबले 13 पद खाली हैं।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में संभावित विस्तार और फेरबदल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मौजूदा समय में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 13 पद खाली हैं, जबकि कई कैबिनेट मंत्रियों को एक से अधिक मंत्रालय संभालने पड़ रहे हैं। ऐसे में संसद के आगामी शीतकालीन सत्र से पहले मंत्रिपरिषद में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। संभावित फेरबदल में नए चेहरों को शामिल करने के साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव हो सकता है।
मोदी कैबिनेट में कितने पद खाली हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल को शुरू हुए करीब ढाई साल हो चुके हैं। इस अवधि में कुछ मंत्रियों ने अपने पद छोड़े हैं, जबकि कुछ को दोबारा राज्यसभा का टिकट नहीं मिला। इसके कारण मंत्रिपरिषद की मौजूदा संख्या अपनी संवैधानिक अधिकतम सीमा से काफी नीचे है। केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं।
फिलहाल सरकार में 29 कैबिनेट मंत्री, पांच राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 34 राज्य मंत्री हैं। यानी कुल 68 मंत्री सरकार में काम कर रहे हैं। इस हिसाब से अधिकतम स्वीकृत संख्या के मुकाबले 13 पद अभी खाली हैं। यदि हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्री पद छोड़ते हैं, तो मंत्रिपरिषद की संख्या और कम हो सकती है।
करीब 40% कैबिनेट मंत्रियों के पास कई मंत्रालय
मंत्रियों की संख्या कम होने का सीधा असर विभागों के बंटवारे पर दिखाई दे रहा है। मौजूदा समय में करीब 12 मंत्री एक से अधिक मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यह कैबिनेट का लगभग 40 फीसदी हिस्सा है। अमित शाह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, निर्मला सीतारमण, मनोहर लाल खट्टर, अश्विनी वैष्णव, प्रह्लाद जोशी और जी किशन रेड्डी उन प्रमुख मंत्रियों में शामिल हैं, जिनके पास एक से अधिक विभागों का अतिरिक्त प्रभार है।
कुछ मामलों में एक ही मंत्री को तीन महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ रही है। इससे प्रशासनिक कामकाज का बोझ बढ़ने और विभागीय प्राथमिकताओं के बीच संतुलन की चुनौती पैदा होने की संभावना है।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा पर भी नजर
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवारों की हालिया घोषणा के बाद हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई हैं। दोनों को इस बार उम्मीदवारों की सूची में जगह नहीं मिली है। यदि दोनों का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद मंत्रिपद भी जाता है, तो केंद्रीय मंत्रिपरिषद में रिक्तियों की संख्या और बढ़ जाएगी।
इससे सरकार के सामने नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने की गुंजाइश और बढ़ सकती है। इससे पहले जून में रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया था। इसके बाद उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था।
विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर हो सकता है विस्तार
संभावित मंत्रिमंडल विस्तार का असर आने वाले विधानसभा चुनावों की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों को लेकर पार्टी की रणनीति महत्वपूर्ण हो सकती है। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्य के कुछ प्रमुख नेताओं को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी देने की संभावना पर चर्चा हो रही है। वहीं पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सिख प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
मौजूदा स्थिति में केंद्र सरकार में धार्मिक अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा होती रही है। सरकार में मुस्लिम और ईसाई समुदाय से कोई मंत्री नहीं है। हरदीप सिंह पुरी के संभावित बाहर होने की स्थिति में सिख प्रतिनिधित्व भी खत्म हो सकता है। किरेन रिजिजू सरकार में अल्पसंख्यक समुदाय से प्रमुख चेहरा हैं और वह बौद्ध समुदाय से आते हैं।










