पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मोहम्मद रिजवान को कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़ी NCCIA जांच पर सार्वजनिक रूप से सफाई देने की अनुमति नहीं मिली। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने PCB से दो बार मीडिया से बातचीत की मंजूरी मांगी, लेकिन दोनों अनुरोध अस्वीकार कर दिए गए।
स्पोर्ट्स न्यूज़: पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर-बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान से जुड़ी जांच के बीच नया विवाद सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, रिजवान ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) से मीडिया के सामने अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगी थी, लेकिन बोर्ड ने दोनों बार उनकी मांग अस्वीकार कर दी। बताया गया है कि रिजवान मौजूदा मामले को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते थे, क्योंकि उनके अनुसार इस प्रकरण को लेकर भ्रम और अटकलें बनी हुई हैं।
मामला पाकिस्तान की National Cyber Crime Investigation Agency (NCCIA) की उस जांच से जुड़ा है, जिसमें रिजवान और साथी क्रिकेटर इमाम-उल-हक से पूछताछ की गई है। रिपोर्टों में ऑनलाइन बेटिंग, जुए और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच का उल्लेख है। हालांकि, रिजवान को किसी अपराध का दोषी घोषित नहीं किया गया है और जांच अभी जारी है।
रिजवान ने दो बार मांगी मीडिया से बात करने की अनुमति
21 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, रिजवान ने पिछले सप्ताह दो अलग-अलग मौकों पर PCB से मीडिया से बातचीत करने की अनुमति मांगी थी। दोनों बार बोर्ड ने उनकी मांग ठुकरा दी। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि रिजवान इस पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखना चाहते थे और विशेष रूप से इंग्लैंड दौरे के दौरान उनके मोबाइल फोन लिए जाने तथा उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर स्पष्टीकरण देना चाहते थे।
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, रिजवान ICC को भेजे गए एक पत्र से संबंधित जानकारी भी सार्वजनिक करना चाहते थे। सूत्रों ने दावा किया कि वह अपने केंद्रीय अनुबंध की संबंधित धाराओं का हवाला देते हुए बोर्ड से सहयोग की अपेक्षा कर रहे थे। वहीं, PCB की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
केंद्रीय अनुबंध से जुड़ा है मीडिया से बात करने का नियम
रिपोर्टों के अनुसार, PCB के केंद्रीय अनुबंध में खिलाड़ियों के सार्वजनिक बयानों से संबंधित प्रावधान हैं। इसके तहत केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ियों को बोर्ड की मंजूरी के बिना बोर्ड या अपने रोजगार से संबंधित मामलों पर सार्वजनिक रूप से बयान देने की अनुमति नहीं होती।
इसी वजह से रिजवान को मीडिया से बातचीत के लिए PCB की अनुमति लेना जरूरी था। रिपोर्टों में केंद्रीय अनुबंध की Clause 4.1 का उल्लेख किया गया है, जो सार्वजनिक बयान से पहले बोर्ड की अनुमति से जुड़ी है। वहीं, Clause 16 को खिलाड़ी और बोर्ड के बीच आपसी सहयोग से संबंधित बताया गया है।
इंग्लैंड दौरे के बाद शुरू हुआ मामला
यह पूरा विवाद पाकिस्तान के इंग्लैंड दौरे के दौरान लॉर्ड्स में खेले गए टेस्ट के बाद सामने आया। रिजवान और इमाम-उल-हक को दौरे के बीच पाकिस्तान वापस भेजा गया था। दोनों को बाद में NCCIA के सामने पेश होना पड़ा।
10 सितंबर को दोनों क्रिकेटर लाहौर में एजेंसी के सामने पहुंचे थे। Geo News की रिपोर्ट के अनुसार, NCCIA ने दोनों से करीब दो घंटे पूछताछ की और जांच का एक पहलू इंग्लैंड दौरे के दौरान कथित ड्रेसिंग-रूम लीक से भी जुड़ा था।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि दोनों खिलाड़ियों के मोबाइल फोन जांच के लिए लिए गए थे। बाद में डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच की बात सामने आई। इस जांच में फोन में मौजूद संचार और अन्य डिजिटल गतिविधियों से संबंधित सामग्री की पड़ताल की जा रही है।
ऑनलाइन बेटिंग और जुए से जुड़े आरोपों पर जांच
रिजवान के खिलाफ NCCIA की कार्रवाई में ऑनलाइन बेटिंग और जुए से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख हुआ है। लाहौर हाईकोर्ट में दायर उनकी याचिका के अनुसार, रिजवान ने एजेंसी के नोटिस की वैधता और जांच के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए थे।
रिजवान की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि नोटिस में कथित तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि वह किस विशेष ऑनलाइन बेटिंग या जुए की गतिविधि में शामिल होने के संदेह में जांच के दायरे में हैं। उन्होंने क्रिकेट से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों में ICC की Anti-Corruption Unit की भूमिका का भी हवाला दिया।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये रिजवान और उनके पक्ष की ओर से उठाए गए कानूनी तर्क हैं। NCCIA की जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
लाहौर हाईकोर्ट ने 17 सितंबर को क्या कहा?
रिजवान ने NCCIA के नोटिस और जांच को चुनौती देते हुए लाहौर हाईकोर्ट का रुख किया था। 17 सितंबर 2026 को अदालत ने उनकी याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और उन्हें पहले एजेंसी के सवालों का जवाब देने को कहा।
अदालत ने कहा कि रिजवान को NCCIA के समक्ष अपना जवाब देना चाहिए। इसके बाद उनकी याचिका खारिज कर दी गई। बाद में सामने आए लिखित आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि एजेंसी का कॉल-अप नोटिस अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बराबर नहीं है। अदालत ने साथ ही रिजवान को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।

मोबाइल फोन की जांच पर भी उठे सवाल
रिजवान के वकील काजी उमैर अली की ओर से अदालत में दावा किया गया था कि इंग्लैंड में लॉर्ड्स टेस्ट के बाद होटल में उनसे पूछताछ की गई और उनका फोन लिया गया। उनके अनुसार, फोन को लगभग तीन घंटे में लौटाने की बात कही गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसी फोन को बाद में फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की बात सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, रिजवान और इमाम दोनों के फोन जांच का हिस्सा हैं। हालांकि, जांच एजेंसी की अंतिम फोरेंसिक रिपोर्ट और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई अभी स्पष्ट नहीं है।
इमाम-उल-हक भी जांच के दायरे में
मामले में रिजवान अकेले क्रिकेटर नहीं हैं। इमाम-उल-हक से भी NCCIA पूछताछ कर चुकी है। दोनों खिलाड़ियों को इंग्लैंड दौरे से वापस बुलाए जाने के बाद एजेंसी के सामने पेश होना पड़ा था।
इमाम लॉर्ड्स टेस्ट में चोट के कारण दोनों पारियों में बल्लेबाजी के लिए नहीं उतरे थे। उनकी चोट और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, इन घटनाओं से संबंधित विभिन्न दावे अभी जांच और रिपोर्टों का विषय हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल रिजवान के मामले में तीन प्रक्रियाएं समानांतर रूप से महत्वपूर्ण हैं—NCCIA की जांच, जब्त मोबाइल फोन और डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच तथा PCB की आंतरिक प्रक्रिया। PCB ने अभी तक रिजवान के मीडिया से बात करने की अनुमति से इनकार किए जाने पर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
रिजवान की ओर से सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखने की कोशिश के बावजूद जांच का कानूनी और प्रशासनिक रास्ता अभी जारी है। लाहौर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें NCCIA की पूछताछ में सहयोग करना है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एजेंसी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई ठोस आधार या साक्ष्य मिलता है या नहीं।











