अमेरिका और एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट के बावजूद शुक्रवार को सेंसेक्स 1,718 अंक चढ़ गया। निफ्टी भी 25,000 के पार बंद हुआ। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से एक दिन में निवेशकों की संपत्ति करीब 1.49 लाख करोड़ रुपये बढ़ी।
बिजनेस न्यूज़: दुनिया के बड़े शेयर बाजारों में शुक्रवार, 6 नवंबर को भारी बिकवाली देखने को मिली, लेकिन भारतीय बाजार ने इसके उलट शानदार प्रदर्शन किया। सुबह गिरावट के साथ कारोबार शुरू होने के बाद सेंसेक्स 81,028 और निफ्टी 25,030 के स्तर पर बंद हुआ। इस तेजी के पीछे विदेशी निवेशकों की वापसी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारतीय कंपनियों की बेहतर कमाई को अहम वजह माना जा रहा है।
गिरावट के साथ खुला बाजार, फिर सेंसेक्स ने लगाई बड़ी छलांग
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। अमेरिका में टेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट के बाद एशियाई बाजारों में भी बिकवाली हो रही थी। इसका असर शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी पर दिखाई दिया। हालांकि कुछ देर बाद बैंकिंग, ऑटो और बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने लगी। देखते ही देखते बाजार की गिरावट तेजी में बदल गई।
कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 1,718.01 अंक यानी 2.17 प्रतिशत चढ़कर 81,028.02 पर बंद हुआ। निफ्टी 493.75 अंक की बढ़त के साथ 25,030.35 पर पहुंच गया। इस उछाल से BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 1.49 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 503.10 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 501.61 लाख करोड़ रुपये था।
विदेशी निवेशकों ने फिर भारतीय बाजार में लगाया पैसा
बाजार में आई तेजी की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की खरीदारी रही। लंबे समय से भारतीय शेयर बेच रहे विदेशी निवेशकों ने नवंबर की शुरुआत में अपना रुख बदल दिया है। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार, 5 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 14,975 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह लगभग छह साल में उनकी सबसे बड़ी एकदिनी शुद्ध खरीदारी थी।
शुक्रवार को भी खरीदारी जारी रही। विदेशी निवेशकों ने करीब 13,750 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। नवंबर के पहले पांच कारोबारी सत्रों में उनकी कुल खरीदारी लगभग 45,960 करोड़ रुपये रही। हालांकि इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली की। इससे साफ है कि बाजार में विदेशी पैसा लौट रहा है, लेकिन सभी निवेशक एक जैसी रणनीति नहीं अपना रहे हैं।
अमेरिकी AI कंपनियों में गिरावट का भारत पर कम असर
अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। नैस्डैक करीब 5.5 प्रतिशत टूट गया। S&P 500 में 4.4 प्रतिशत और डाउ जोन्स में लगभग 3.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को चिंता है कि AI डेटा सेंटर, चिप निर्माण और दूसरे तकनीकी प्रोजेक्ट पर कंपनियां भारी रकम खर्च कर रही हैं।
अगर भविष्य में इन निवेशों से उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं मिला, तो कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद AI सेक्टर पर सख्त नियम लागू होने की आशंका ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। भारत में इस तरह के बड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर कंपनियों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। यही वजह रही कि अमेरिकी टेक शेयरों में बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार बेहतर प्रदर्शन कर सका।
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एशियाई बाजारों में भी दिखा भारी नुकसान
अमेरिका से शुरू हुई बिकवाली ने एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों को भी प्रभावित किया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई करीब छह प्रतिशत गिर गए। ताइवान के शेयर बाजार में भी लगभग 4.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन देशों की कई बड़ी कंपनियां सेमीकंडक्टर, चिप निर्माण और AI टेक्नोलॉजी से जुड़ी हैं।
इसलिए अमेरिकी टेक कंपनियों में गिरावट का सीधा असर इनके शेयरों पर दिखाई दिया। इसके उलट भारतीय बाजार में बैंकिंग और घरेलू कारोबार पर निर्भर बड़ी कंपनियों के शेयरों ने तेजी को सहारा दिया।
कच्चे तेल की गिरती कीमतों से भारत को राहत
भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी सकारात्मक संकेत रही। देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत का आयात बिल बढ़ता है। इससे महंगाई और रुपये की कीमत पर दबाव पड़ सकता है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। बाजार को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुधार हो सकता है।
इसके अलावा कुछ बड़ी भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। इससे निवेशकों की दिलचस्पी बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और दूसरे प्रमुख सेक्टरों में बढ़ी है।
सेंसेक्स चढ़ा, लेकिन छोटे शेयरों में बिकवाली
शुक्रवार की तेजी का फायदा सभी कंपनियों को बराबर नहीं मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दो प्रतिशत से ज्यादा चढ़े, लेकिन छोटे और मझोले शेयरों में दबाव बना रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 0.8 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 लगभग सपाट रहा। बाजार में बढ़ने वाले शेयरों की तुलना में गिरने वाले शेयरों की संख्या ज्यादा थी। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल बड़ी और स्थापित कंपनियों के शेयरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।











