Bank of Baroda पर ₹1.43 लाख करोड़ का मुकदमा, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस, जानें पूरा विवाद

Bank of Baroda: बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर ₹1.43 लाख करोड़ का मुकदमा किया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया। जानें NMC हेल्थकेयर से जुड़ा पूरा विवाद

कारोबारी बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य पक्षों के खिलाफ करीब 1.43 लाख करोड़ रुपये के हर्जाने का मुकदमा किया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बैंक को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।

बिजनेस न्यूज़: सरकारी क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़ा एक बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है। NMC हेल्थकेयर और UAE एक्सचेंज के संस्थापक बीआर शेट्टी ने बैंक और 25 अन्य लोगों व संस्थाओं के खिलाफ 15 अरब डॉलर यानी लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा किया है। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में बैंक को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने अभी आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ किस कारोबारी ने किया मुकदमा?

सरकारी बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा अब एक बड़े कानूनी मामले में घिर गया है। भारतीय मूल के मशहूर कारोबारी बीआर शेट्टी ने बैंक के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी याचिका में बैंक के मौजूदा और पूर्व अधिकारियों समेत कुल 26 लोगों और संस्थाओं को पक्षकार बनाया है। बीआर शेट्टी का पूरा नाम बावागुथु रघुराम शेट्टी है। एक समय संयुक्त अरब अमीरात में उनका बड़ा कारोबारी साम्राज्य था। 

उन्होंने वहां NMC हेल्थकेयर और UAE एक्सचेंज जैसे कारोबार खड़े किए थे। NMC हेल्थकेयर की गिनती खाड़ी देशों की बड़ी निजी स्वास्थ्य सेवा कंपनियों में होती थी। लेकिन साल 2020 में हालात बदल गए। NMC हेल्थकेयर भारी आर्थिक संकट में फंस गई। कंपनी पर चढ़े कर्ज और पैसों के लेन-देन को लेकर कई सवाल खड़े हुए। इसी मामले से जुड़े विवाद को लेकर शेट्टी अब भारत में अदालत पहुंचे हैं।

1.43 लाख करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग क्यों?

बीआर शेट्टी ने मुकदमे में कुल 15 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग की है। इस रकम को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। उन्होंने कथित धोखाधड़ी और लापरवाही से हुए सीधे नुकसान के लिए पांच अरब डॉलर मांगे हैं। इसके अलावा कारोबार और दूसरे आर्थिक अवसरों के नुकसान के बदले पांच अरब डॉलर की मांग की गई है।

बाकी पांच अरब डॉलर उनकी प्रतिष्ठा और कारोबारी साख को कथित तौर पर पहुंचे नुकसान के लिए मांगे गए हैं। शेट्टी ने दावे के एक हिस्से पर 18 प्रतिशत सालाना ब्याज देने की मांग भी की है। यह समझना जरूरी है कि 1.43 लाख करोड़ रुपये की रकम फिलहाल केवल हर्जाने का दावा है। इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक को इतनी रकम चुकाने का आदेश दे दिया गया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बैंक को क्या निर्देश दिए?

Bank of Baroda पर ₹1.43 लाख करोड़ का मुकदमा, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस, जानें पूरा विवाद

गुरुवार, 5 नवंबर को यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस आरिफ डॉक्टर के सामने आया। बीआर शेट्टी की ओर से वरिष्ठ वकील जाल अध्यरुजिना और वसीम पंगारकर ने अदालत में मामले को तत्काल सुनने की मांग रखी। वकीलों ने कहा कि बैंक के पास मौजूद मामले से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि आगे की सुनवाई में उनका इस्तेमाल किया जा सके।

शेट्टी की ओर से बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड, ईमेल और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने तथा उनकी जांच कराने की भी मांग की गई है। अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए बैंक को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को तय की गई है। उस दिन शेट्टी की अंतरिम राहत संबंधी अर्जियों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल अदालत ने सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने या हर्जाने की रकम अलग रखने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने आरोपों पर क्या कहा?

बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस विवाद पर अपना पक्ष भी रखा है। बैंक ने 29 अक्टूबर को बताया था कि उसे मुकदमे और अंतरिम अर्जियों की आधिकारिक कॉपी नहीं मिली थी। बैंक ने कहा था कि जब तक उसे कानूनी दस्तावेज नहीं मिलते, तब तक अदालत में साबित नहीं हुए आरोपों पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

बैंक ने यह भी आरोप लगाया कि उसके तिमाही नतीजे आने से पहले मुकदमे से जुड़ी जानकारी चुनिंदा तरीके से मीडिया तक पहुंचाई गई। बैंक ने इस मामले में उचित कार्रवाई करने की बात कही थी। इससे पहले बैंक स्पष्ट कर चुका है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष मजबूती से रखेगा। बैंक के मुताबिक, वह बीआर शेट्टी से लगभग 2,800 करोड़ रुपये की बकाया रकम वसूलने के लिए भारत और संयुक्त अरब अमीरात में कानूनी कार्रवाई भी कर रहा है।

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