टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। टाटा मोटर्स ने 3.43 अरब यूरो में इवेको ग्रुप की 89.42 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है। दोनों कंपनियों का संयुक्त कारोबार करीब 2.28 लाख करोड़ रुपये है।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स ने इटली की इवेको ग्रुप का अधिग्रहण कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इस बड़े कारोबारी सौदे के बाद टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को रोम में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। बैठक में उन्होंने इवेको को टाटा समूह से जोड़ने के बाद की कारोबारी योजनाओं की जानकारी दी। दोनों कंपनियां अब मिलकर दुनिया के प्रमुख कमर्शियल वाहन निर्माताओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रही हैं।
इटली की प्रधानमंत्री से मुलाकात में क्या हुई बातचीत?
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने रोम स्थित पलाजो चिगी में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब टाटा मोटर्स ने इटली की प्रमुख कमर्शियल वाहन कंपनी इवेको ग्रुप का अधिग्रहण किया है। बैठक में चंद्रशेखरन ने बताया कि आने वाले वर्षों में दोनों कंपनियां किस तरह मिलकर कारोबार बढ़ाएंगी। खासतौर पर ट्रक, बस और नई वाहन तकनीक के क्षेत्र में दोनों की क्षमताओं का इस्तेमाल करने की योजना है।
इससे पहले मंगलवार, 3 नवंबर को इटली के तुरीन शहर में आयोजित कार्यक्रम में चंद्रशेखरन ने इवेको के साथ नए सफर की शुरुआत की घोषणा की थी। उन्होंने अधिग्रहण प्रक्रिया में सहयोग के लिए इटली सरकार, प्रधानमंत्री मेलोनी और उद्योग मंत्री एडोल्फो उर्सो का आभार भी जताया था।
3.43 अरब यूरो में टाटा मोटर्स ने खरीदी कितनी हिस्सेदारी?
टाटा मोटर्स ने 30 अक्टूबर 2026 को घोषणा की थी कि इवेको ग्रुप के अधिग्रहण की शुरुआती प्रक्रिया पूरी हो गई है। कंपनी ने करीब 3.43 अरब यूरो में इवेको की 89.42 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की है। यह सौदा टाटा मोटर्स की सहायक कंपनी TML CV Holdings B.V. के जरिए किया गया है। इसके तहत इवेको के करीब 23.82 करोड़ शेयर खरीदे गए। प्रत्येक शेयर के लिए 14.40 यूरो का नकद भुगतान तय हुआ था।
इस अधिग्रहण के बाद इवेको ग्रुप आधिकारिक तौर पर टाटा मोटर्स की अप्रत्यक्ष सहायक कंपनी बन गई है। हालांकि, बाकी शेयरों को खरीदने की प्रक्रिया अभी जारी है। इसके लिए 2 से 6 नवंबर तक शेयरधारकों को दोबारा अपने शेयर बेचने का मौका दिया गया है। इस चरण में मिले शेयरों का भुगतान 13 नवंबर को किया जाना है।
दोनों कंपनियों का कारोबार अब कितना बड़ा हो गया?
टाटा मोटर्स और इवेको ग्रुप के एक साथ आने से कमर्शियल वाहनों के क्षेत्र में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय समूह तैयार हुआ है। दोनों कंपनियों की संयुक्त सालाना आय करीब 21 अरब यूरो यानी 2.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इनकी मौजूदगी 130 से ज्यादा देशों में है। संयुक्त कारोबार में 27 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, 25 रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर और लगभग 9,300 सेल्स व सर्विस सेंटर शामिल हैं। दोनों कंपनियों से कुल 73 हजार से ज्यादा कर्मचारी जुड़े हैं।
इनका नेटवर्क यूरोप, भारत, दक्षिण अमेरिका, एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका तक फैला है। संयुक्त समूह की सालाना वाहन बिक्री करीब 5.90 लाख यूनिट है। बिक्री की मात्रा के आधार पर छह टन से अधिक वजन वाले कमर्शियल वाहनों के क्षेत्र में यह समूह दुनिया के चार सबसे बड़े निर्माताओं में शामिल हो गया है।
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इवेको की तकनीक से टाटा मोटर्स को क्या फायदा मिलेगा?
इवेको यूरोप और लैटिन अमेरिका में ट्रक और बस बनाने वाली बड़ी कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी कई सालों से इंजन और भारी गाड़ियां बनाने का काम कर रही है। वहीं, टाटा मोटर्स की भारत में अच्छी पकड़ है। दूसरे देशों में भी कंपनी अपने वाहन बेचती है। ऐसे में दोनों के साथ आने से टाटा मोटर्स को विदेशों में कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इवेको के पास गाड़ियां बनाने की नई तकनीक और विदेशी बाजारों में काम करने का लंबा अनुभव है। इसका फायदा टाटा मोटर्स को मिल सकता है। वहीं, इवेको को भारत में टाटा मोटर्स के बड़े नेटवर्क और इंजीनियरिंग की जानकारी से मदद मिलेगी। दोनों कंपनियां मिलकर इलेक्ट्रिक ट्रक, हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों और दूसरे ईंधन से चलने वाले वाहनों पर भी काम करने की तैयारी में हैं। इसके अलावा ऐसी गाड़ियां बनाने पर भी ध्यान रहेगा, जिनमें नई डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल हो।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के मुताबिक, अगले पांच साल में गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के साथ कंपनी की कमाई और मुनाफा बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि बाजार में गाड़ियों की मांग कैसी रहती है और दोनों कंपनियां मिलकर कितनी अच्छी तरह काम कर पाती हैं।
रतन टाटा का इटली के तुरीन शहर से क्या रिश्ता रहा है?
इटली के तुरीन शहर में हुए कार्यक्रम में एन चंद्रशेखरन ने रतन टाटा से जुड़ी एक पुरानी बात भी बताई। उन्होंने कहा कि टाटा मोटर्स का इस शहर से रिश्ता कई साल पुराना है। 1990 के दशक के आखिरी वर्षों में रतन टाटा भारत में अपनी कार बनाने की तैयारी कर रहे थे। उस समय उन्होंने कार के डिजाइन के लिए तुरीन की मशहूर कंपनी IDEA की मदद ली थी।
इसी कंपनी की मदद से टाटा इंडिका का डिजाइन तैयार हुआ था। इंडिका टाटा मोटर्स के लिए काफी खास कार रही है। इस गाड़ी के आने के बाद कंपनी ने भारत में कार बनाने वाली कंपनियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। चंद्रशेखरन ने कहा कि तुरीन शहर ने पहले भी टाटा मोटर्स की मदद की थी। अब इवेको के साथ जुड़ने से दोनों के बीच पुराना रिश्ता और आगे बढ़ेगा।









