Air India: भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने की तैयारी, एअर इंडिया बढ़ाएगी बड़े विमानों के ऑर्डर

Air India: एअर इंडिया अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बढ़ाने के लिए बड़े विमानों के नए ऑर्डर की तैयारी में है। CEO ने भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने का प्लान बताया

एअर इंडिया के सीईओ टेवोल्डे गेब्रेमेरियम ने कहा है कि भारत के पास वैश्विक विमानन केंद्र बनने का बड़ा मौका है। कंपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बढ़ाने के लिए नए वाइड-बॉडी विमान खरीदने पर विचार कर रही है। साथ ही खर्च घटाकर मुनाफे में लौटने की तैयारी है।

बिजनेस न्यूज़: टाटा समूह की एअर इंडिया आने वाले दिनों में अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करने की तैयारी कर रही है। कंपनी के सीईओ टेवोल्डे गेब्रेमेरियम ने मंगलवार, 3 नवंबर को कहा कि एयरलाइन के पास आगे बढ़ने के काफी अवसर हैं। इसके लिए बड़े विमानों की संख्या बढ़ाने, उड़ानों के नेटवर्क में बदलाव करने और खर्च कम करने पर काम हो रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि सही फैसलों से भारत को दुनिया का प्रमुख विमानन केंद्र बनाया जा सकता है।

एअर इंडिया क्यों बढ़ाना चाहती है बड़े विमानों का ऑर्डर?

एअर इंडिया अपने बेड़े में वाइड-बॉडी विमानों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है। इन विमानों का इस्तेमाल मुख्य रूप से लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में किया जाता है। इनमें ज्यादा यात्री सफर कर सकते हैं और लंबी दूरी के रूट पर इनका इस्तेमाल किया जाता है। नई दिल्ली में आयोजित एविएशन इंडिया एंड साउथ एशिया 2026 सम्मेलन में टेवोल्डे गेब्रेमेरियम ने बताया कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है। इसके लिए मौजूदा विमान ऑर्डर में और वाइड-बॉडी विमान जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।

कंपनी की बोइंग और एयरबस से भी बातचीत हुई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने अतिरिक्त विमान खरीदे जाएंगे और उनका ऑर्डर कब दिया जाएगा। एअर इंडिया के पास पहले से बड़े पैमाने पर नए विमानों के ऑर्डर हैं। कंपनी ने एयरबस और बोइंग से कुल 600 विमान खरीदने की घोषणा की थी। अब लंबी दूरी की उड़ानों के लिए और विमानों की जरूरत महसूस की जा रही है।

क्या भारत बन सकता है दुनिया का बड़ा एविएशन हब?

एअर इंडिया के सीईओ गेब्रेमेरियम को लगता है कि आने वाले समय में भारत हवाई सफर का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। देश में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ रही है। अब पहले के मुकाबले ज्यादा लोग विदेश भी जा रहे हैं। भारतीय एयरलाइंस भी दूसरे देशों के लिए अपनी उड़ानें बढ़ा रही हैं। ऐसे में भारत के पास अंतरराष्ट्रीय विमानन कारोबार में अपनी जगह बनाने का अच्छा मौका है।

हालांकि, गेब्रेमेरियम का कहना है कि इसके लिए केवल नए विमान खरीदने से काम नहीं चलेगा। एयरपोर्ट पर यात्रियों को अच्छी सुविधाएं मिलनी चाहिए और उड़ानें भी समय पर चलनी चाहिए। साथ ही भारत से ज्यादा देशों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने पर ध्यान देना होगा।

अभी भारत से विदेश जाने वाले बहुत से यात्रियों को दुबई, दोहा या दूसरे देशों के एयरपोर्ट पर विमान बदलना पड़ता है। एअर इंडिया चाहती है कि ऐसे यात्रियों को भारत से ही ज्यादा उड़ानों के विकल्प मिलें। अगर ऐसा होता है, तो विदेश जाने वालों का समय बचेगा और भारतीय एयरलाइंस को भी फायदा हो सकता है।

दिल्ली-मुंबई के बाद बेंगलुरु भी बन सकता है बड़ा हब

Air India: भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने की तैयारी, एअर इंडिया बढ़ाएगी बड़े विमानों के ऑर्डर

एअर इंडिया अपनी उड़ानों के नेटवर्क में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। कंपनी यह देख रही है कि किन शहरों से ज्यादा विमान चलाने की जरूरत है और किन रूट पर यात्रियों की संख्या अच्छी है। इसके हिसाब से आगे की योजना बनाई जाएगी। अभी दिल्ली और मुंबई एअर इंडिया के दो बड़े हब हैं। यहां से देश के साथ विदेशों के लिए भी काफी उड़ानें चलती हैं। अब कंपनी बेंगलुरु को तीसरे बड़े हब के तौर पर विकसित करने की संभावना तलाश रही है।

गेब्रेमेरियम के मुताबिक, मौजूदा परेशानियों को देखते हुए उड़ानों के रूट में कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं। कंपनी चाहती है कि उसके विमानों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो और उन देशों में उड़ानें बढ़ाई जाएं, जहां यात्रियों की अच्छी मांग है। हालांकि, बेंगलुरु को नया हब बनाने या किसी नए अंतरराष्ट्रीय रूट को शुरू करने को लेकर अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है। कंपनी फिलहाल इन सभी विकल्पों पर विचार कर रही है।

एअर इंडिया के लिए मुनाफा कमाना अभी बड़ी चुनौती

एअर इंडिया के सामने इस समय सबसे बड़ी परेशानी खर्च और कमाई के बीच संतुलन बनाने की है। कंपनी लंबे समय से मुनाफे में आने की कोशिश कर रही है, लेकिन बढ़ते खर्च की वजह से मुश्किलें बनी हुई हैं। गेब्रेमेरियम ने भी माना है कि एअर इंडिया अभी अपनी पूरी क्षमता के हिसाब से प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। उनका कहना है कि वह कंपनी को जल्द से जल्द मुनाफे में देखना चाहते हैं। इसके लिए कमाई बढ़ाने के साथ फालतू खर्च कम करना भी जरूरी है।

एयरलाइन ने इसी काम के लिए एक अलग टीम बनाई है। यह टीम कंपनी के अलग-अलग विभागों का खर्च देख रही है। कहां ज्यादा पैसा लग रहा है और उसे कैसे बचाया जा सकता है, इसकी जांच की जा रही है। एअर इंडिया के लिए महंगा विमान ईंधन भी परेशानी बना हुआ है। इसके अलावा पुराने विमान चलाने में ज्यादा खर्च आता है। अंतरराष्ट्रीय हवाई रास्तों पर लगी कुछ पाबंदियों से भी कंपनी की मुश्किलें बढ़ी हैं।

खासकर पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र पर पाबंदी की वजह से कुछ विदेशी उड़ानों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इससे विमान को मंजिल तक पहुंचने में ज्यादा समय लगता है और ईंधन भी अधिक खर्च होता है। इसका सीधा असर एयरलाइन के कुल खर्च पर पड़ता है।

पुराने विमानों को बदलेगी एअर इंडिया, यात्रियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

एअर इंडिया अपने पुराने विमानों की हालत सुधारने पर भी काम कर रही है। कई विमानों के अंदर की सीटों और दूसरी सुविधाओं को बदला जा रहा है। कंपनी चाहती है कि यात्रियों को सफर के दौरान पहले से बेहतर अनुभव मिले। इसके अलावा पुराने बड़े विमानों की जगह नई तकनीक वाले विमान लाने पर भी जोर है। पुराने वाइड-बॉडी विमानों के रखरखाव और ईंधन पर ज्यादा पैसा खर्च होता है। नए विमान कम ईंधन में लंबी दूरी तय करने में मदद कर सकते हैं। इससे आने वाले समय में कंपनी का खर्च घट सकता है।

कंपनी के सामने केवल मुनाफा कमाने की चुनौती नहीं है। उसे उड़ानों की समय की पाबंदी, यात्रियों की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को भी बेहतर बनाना होगा। नए नेतृत्व का ध्यान फिलहाल इन्हीं कामों पर है। गेब्रेमेरियम को अगस्त 2026 में एअर इंडिया का सीईओ नियुक्त किया गया था। उन्होंने अक्टूबर में अपनी जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले वह इथियोपियन एयरलाइंस के प्रमुख रह चुके हैं। अब उनके सामने एअर इंडिया की पुरानी परेशानियां दूर करने और उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत बनाने की जिम्मेदारी है।

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